July 12, 2026

Kurukshetra Highway Accident: 4 मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया, ट्रैक्टर चालक की लापरवाही ने ली जान

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Kurukshetra Highway Accident: 4 मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया, ट्रैक्टर चालक की लापरवाही ने ली जान

कुरुक्षेत्र एक्सीडेंट में 4 बच्चों के पिता की मौत

Kurukshetra Highway Accident: रफ्तार के कहर और हाईवे पर नियमों को ताक पर रखकर चलने वाले भारी वाहनों की लापरवाही ने एक बार फिर एक हंसते-खेलते परिवार का चिराग बुझा दिया। कुरुक्षेत्र जिले के इस्माइलाबाद इलाके में हिसार-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे-152 पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में महिंद्रा पिकअप गाड़ी के हेल्पर की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा लोटनी गांव के समीप उस वक्त हुआ जब एक ईंटों से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली के चालक ने लापरवाही से गाड़ी चलाते हुए अचानक कट मार दिया। इस टक्कर में पिकअप का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया और उसमें सवार तीन लोग मलबे में तब्दील हो चुके केबिन के भीतर ही जिंदगी और मौत के बीच फंस गए।

अचानक लगे ब्रेक और चीख-पुकार में बदल गया सफर

हादसे का शिकार हुई पिकअप गाड़ी हिसार से माल लेकर पंचकूला की तरफ जा रही थी। गाड़ी में चालक और उसके दोस्त के साथ 30 वर्षीय हेल्पर बमबम यादव भी सवार था। जैसे ही उनकी गाड़ी एनएच-152 पर लोटनी गांव के एक पेट्रोल पंप के पास पहुंची, तभी उनके आगे चल रहे ईंटों से ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली के ड्राइवर ने बिना कोई इंडिकेटर दिए अचानक पिकअप के ठीक सामने कट मार दिया और इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए। रफ्तार में आ रही पिकअप के चालक को संभलने का मौका तक नहीं मिला और गाड़ी सीधे ट्रॉली के पिछले हिस्से में जा धंसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि केबिन के परखच्चे उड़ गए और अंदर बैठे तीनों लोग उसमें बुरी तरह फंसकर लहूलुहान हो गए।

हाईवे पर मौजूद राहगीरों ने जब यह खौफनाक मंजर देखा, तो वे तुरंत घायलों की मदद के लिए दौड़े। लोहे की चादरों में फंसे तीनों युवकों को काफी जद्दोजहद के बाद बाहर निकाला गया और एम्बुलेंस के जरिए तुरंत कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी (LNJP) अस्पताल भिजवाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने हेल्पर की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल ले जाने के दौरान बीच रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

हाथ पर गुदे नाम ने दी पहचान, उजड़ गई चार मासूमों की दुनिया

हादसे के बाद मृतक की शिनाख्त को लेकर कुछ देर के लिए असमंजस की स्थिति बनी रही, लेकिन उसके दाहिने हाथ पर बने ‘बमबम’ नाम के टैटू ने उसकी पहचान की गुत्थी सुलझा दी। मृतक की पहचान 30 वर्षीय बमबम यादव के रूप में हुई, जो बिहार के मधुबनी जिले के महथोर गोठ गांव का रहने वाला था। गुरुग्राम में रहने वाले उसके बड़े भाई ललित यादव को जब फोन पर इस अनहोनी की खबर मिली, तो परिवार में कोहराम मच गया। ललित ने बताया कि उसका भाई अपने परिवार की आजीविका चलाने के लिए पिकअप पर हेल्पर का काम करता था।

यह हादसा सिर्फ एक जान का जाना भर नहीं है, बल्कि बिहार के एक सुदूर गांव में बैठे उस बूढ़े मां-बाप और चार मासूमों की उम्मीदों का टूट जाना भी है, जिनका बमबम इकलौता सहारा था। करीब 10 साल पहले उसकी शादी कविता के साथ हुई थी। अब उसके पीछे तीन छोटी बेटियां—दीपिका (8 साल), ऋषिका (7 साल), सृष्टि (3 साल) और महज 4 साल का इकलौता बेटा सिद्धार्थ रह गए हैं, जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है।

उधर, पुलिस ने भाई ललित यादव के बयानों के आधार पर दुर्घटना का कारण बने ट्रैक्टर के नंबर को नोट कर अज्ञात चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने और गैर-इरादतन हत्या की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन ने शव का पोस्टमॉर्टम करवाकर परिजनों के हवाले कर दिया है और फरार ट्रैक्टर चालक की तलाश तेज कर दी है।

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