July 9, 2026

Kurukshetra News: नरवाना ब्रांच नहर की पटरी में आई भयानक दरारें, सिंचाई विभाग की मरम्मत पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

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Kurukshetra News: नरवाना ब्रांच नहर की पटरी में आई भयानक दरारें, सिंचाई विभाग की मरम्मत पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

कुरुक्षेत्र में भाखड़ा नहर की पटरी में आई दरारें

Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक स्थल ज्योतिसर के पास से गुजरने वाली नरवाना ब्रांच (भाखड़ा) नहर की बदहाली इन दिनों सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अभी कुछ समय पहले ही विभाग ने लाखों-करोड़ों की लागत से इस नहर की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का ढिंढोरा पीटा था, लेकिन पहली बारिश से ठीक पहले ही नहर की पटरियों ने दरकना शुरू कर दिया है। पटरी पर आई चौड़ी और गहरी दरारें साफ गवाही दे रही हैं कि सरकारी अमले ने काम के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की है। अब आलम यह है कि आसपास के ग्रामीण और राहगीर इस रास्ते से गुजरने में भी कतरा रहे हैं, क्योंकि पटरी का यह खोखलापन किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है।

रेस्ट हाउस के ठीक सामने ‘सिस्टम’ का डैमेज कंट्रोल

हैरानी की बात यह है कि ये दरारें किसी सुदूर ग्रामीण इलाके में नहीं, बल्कि सिंचाई विभाग के ज्योतिसर स्थित रेस्ट हाउस से दबखेड़ी की तरफ जाने वाले करीब एक किलोमीटर के मुख्य वीआईपी दायरे में साफ देखी जा सकती हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और नहरी अधिकारियों की मिलीभगत के चलते काम की गुणवत्ता (क्वालिटी) से जमकर समझौता किया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर पटरियों को मजबूत करने का काम मानकों के अनुरूप हुआ होता, तो महज कुछ ही दिनों के भीतर मिट्टी इस तरह नहीं धंसती। मानसून सिर पर है और अगर नहर में पानी का दबाव थोड़ा भी बढ़ा, तो ये दरारें पूरी पटरी को बहा ले जाएंगी।

45 दिन का काम और 10 दिन की मोहलत: एक्सईएन की अपनी मजबूरी

इस पूरे मामले पर जब उंगलियां सिंचाई विभाग की तरफ उठीं, तो कुरुक्षेत्र मंडल के एक्सईएन (XEN) मुनीश बब्बर ने अपनी लाचारी जाहिर करते हुए समय की कमी का रोना रोया। उन्होंने बताया कि विभाग ने नहर के जीर्णोद्धार और संपूर्ण मरम्मत के लिए सरकार से कम से कम 45 दिन का क्लोजर (नहर बंदी) मांगा था।

मगर, ऊपरी मंजूरियों के फेर में उन्हें सिर्फ 25 दिन का समय मिला। मुनीश बब्बर के मुताबिक, “25 दिनों में से शुरुआती 15 दिन तो नहर के भीतर 6 फुट से ज्यादा जमा पानी को पूरी तरह सुखाने और गाद निकालने में ही निकल गए। हमारे पास तकनीकी काम के लिए महज 10 दिन बचे थे। इतने सीमित समय में मजदूरों और मशीनों के जरिए जितना संभव हो सका, उतना काम मुस्तैदी से कराया गया।”

जब तीन साल पहले नहर ने निगल लिए थे खेत

नहर की इस जर्जर हालत को देखकर स्थानीय लोग इसलिए भी खौफजदा हैं क्योंकि उनके जेहन में अभी 3 साल पुराना वो मंजर ताजा है, जब ठोल गांव के पास यही नरवाना ब्रांच नहर अचानक टूट गई थी। उस वक्त नहर के तेज बहाव ने देखते ही देखते दर्जनों गांवों को अपनी चपेट में ले लिया था, फसलें बर्बाद हो गईं और करोड़ों का नुकसान हुआ था।

तकनीकी जानकारों की मानें तो अगर ज्योतिसर के इस संवेदनशील हिस्से में नहर का बांध टूटता है, तो पानी सबसे पहले पास की कृत्रिम झील में जाएगा। झील के ओवरफ्लो होते ही पूरा ज्योतिसर गांव जलमग्न हो जाएगा। हालांकि, नहरी विभाग का दावा है कि उनके पास पानी को तुरंत मोड़ने और कंट्रोल करने का बैकअप प्लान तैयार है, लेकिन ग्रामीण इस खोखले आश्वासन पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं।

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