July 3, 2026

Ladwa School Reopening: लाडवा के सहारा इंटरनेशनल स्कूल में वैदिक मंत्रोच्चार से नए सत्र की शुरुआत, बच्चों ने दी आहुति

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Ladwa School Reopening: लाडवा के सहारा इंटरनेशनल स्कूल में वैदिक मंत्रोच्चार से नए सत्र की शुरुआत, बच्चों ने दी आहुति

गर्मियों की छुट्टियों के बाद खुला सहारा इंटरनेशनल स्कूल, हवन-यज्ञ के साथ गूंजा गुरुकुल जैसा माहौल

Ladwa School Reopening (कैलाश गोयल) गर्मियों की लंबी छुट्टियों के बाद जब बच्चे दोबारा स्कूल की दहलीज पर कदम रखते हैं, तो उनके मन में उत्साह के साथ-साथ एक नई शुरुआत का कौतूहल भी होता है। लाडवा के सहारा इंटरनेशनल स्कूल में इस नई शुरुआत को बेहद अनूठे और आध्यात्मिक अंदाज में पिरोया गया। 1 जुलाई 2026 को नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन स्कूल परिसर किसी सामान्य क्लासरूम की तरह नहीं, बल्कि एक गुरुकुल की तरह नजर आया। चारों तरफ गूंजते वैदिक मंत्रों और पावन हवन-यज्ञ की खुशबू के बीच छात्र-छात्राओं ने अपनी नई कक्षाओं में कदम रखा। इस धार्मिक अनुष्ठान से पूरा परिसर सकारात्मक ऊर्जा और श्रद्धा भाव से सराबोर हो उठा।

सफलता और ज्ञानवर्धन के लिए सबने दी आहुति

सुबह की विशेष प्रार्थना सभा के दौरान आयोजित इस यज्ञ में स्कूल के चेयरमैन विक्रांत अग्रवाल, उप-प्रधानाचार्या रितु गोगिया सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया। वेदमंत्रों के सस्वर पाठ के बीच सभी ने आहुतियां डालीं और नए सत्र के सफल, सुरक्षित व ज्ञानवर्धक होने के लिए सामूहिक प्रार्थना की। शिक्षकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से बच्चों में पढ़ाई के प्रति एक नई एकाग्रता और मानसिक शांति का संचार होता है, जो छुट्टियों के सुस्त मिजाज से बाहर निकलने में मददगार साबित होता है।

“सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, उत्तम संस्कार ही है असली शिक्षा”

हवन की पूर्णाहुति के बाद विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए स्कूल के चेयरमैन विक्रांत अग्रवाल ने जीवन में शिक्षा के वास्तविक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “शिक्षा केवल डिग्रियां हासिल करने या किताबी ज्ञान रटने का माध्यम नहीं है। इसका असली मकसद जीवन में उत्तम संस्कार, कड़ा अनुशासन, कठिन परिश्रम और नैतिक मूल्यों को समाहित करना है।” उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे इस नए सत्र को एक नई कोरी स्लेट की तरह देखें और पूरे आत्मविश्वास व सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ें।

नए संकल्प और नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ने की सीख

वहीं, उप-प्रधानाचार्या रितु गोगिया ने भी बच्चों का स्वागत करते हुए उनके भीतर छिपी प्रतिभा को जगाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि हर नया सत्र अपने साथ नई चुनौतियां और नए अवसर लेकर आता है। छात्रों को समय की कद्र करते हुए बिना रुके निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में बच्चों को प्रसाद वितरित किया गया, जिसके बाद वे मुस्कुराते चेहरों और नई किताबों के साथ अपनी-अपनी कक्षाओं की ओर बढ़ गए।

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