July 11, 2026

Narnaul Bar Association: पुलिस प्रशासन से बढ़ा विवाद, महेंद्रगढ़ बार के प्रस्ताव पर पूरे जिले में वकीलों ने ठप किया काम

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Narnaul Bar Association: पुलिस प्रशासन से बढ़ा विवाद, महेंद्रगढ़ बार के प्रस्ताव पर पूरे जिले में वकीलों ने ठप किया काम

महेंद्रगढ़ बार के प्रस्ताव पर पूरे जिले में वकीलों ने ठप किया काम

Narnaul Bar Association: महेंद्रगढ़ पुलिस प्रशासन और वकीलों के बीच उपजा विवाद अब गहराता जा रहा है। महेंद्रगढ़ बार एसोसिएशन द्वारा पारित विरोध प्रस्ताव के समर्थन में शुक्रवार को जिला बार एसोसिएशन नारनौल ने एक बड़ा कदम उठाया। एसोसिएशन के आह्वान पर नारनौल, नांगल चौधरी और अटेली के तमाम अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से ‘वर्क सस्पेंड’ रखा।

इस हड़ताल का सीधा असर इलाके की न्यायिक व्यवस्था पर देखने को मिला, जहां तीनों ही उपमंडलों की रेवेन्यू अदालतों (राजस्व न्यायालय) और मुख्य न्यायिक अदालतों में पूरे दिन वकीलों की कुर्सियां खाली नजर आईं और कानूनी कामकाज पूरी तरह से ठप रहा।

पुलिस प्रशासन और ADM कोर्ट से जुड़ा है पूरा गतिरोध

जिला बार एसोसिएशन नारनौल के प्रधान संतोख सिंह ने इस विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि को साफ करते हुए बताया कि यह कदम कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। दरअसल, महेंद्रगढ़ बार एसोसिएशन का स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ एक मामले को लेकर लंबा विवाद चल रहा है, वहीं एडीएम (अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट) कोर्ट से जुड़े कुछ प्रशासनिक मुद्दों पर भी वकीलों को गहरी आपत्तियां हैं।

इसी सिलसिले में महेंद्रगढ़ बार ने एक निंदा प्रस्ताव पारित कर अन्य सहयोगी बार एसोसिएशनों से समर्थन मांगा था, जिस पर एकजुटता दिखाते हुए जिले भर के कानूनी सलाहकारों ने एक दिन के लिए अदालती कार्यवाही से दूरी बनाने का फैसला किया।

“यह लड़ाई सिर्फ किसी एक बार एसोसिएशन की नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के मान-सम्मान और न्यायिक गरिमा से जुड़ी है। जब तक प्रशासनिक स्तर पर इन मुद्दों का सम्मानजनक समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक हमें ऐसे कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”

— संतोख सिंह, प्रधान, जिला बार एसोसिएशन नारनौल

दूर-दराज से आए मुवक्किल परेशान, अदालतों में पसरा रहा सन्नाटा

वकीलों की इस हड़ताल का सबसे तगड़ा झटका उन आम लोगों और पक्षकारों को लगा, जिनकी अदालतों में शुक्रवार के लिए तारीखें तय थीं। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों और पड़ोसी क्षेत्रों से सुबह-सुबह उम्मीद लेकर पहुंचे फरियादियों को कोर्ट रूम के बाहर पैर रखने की भी जगह नहीं मिली। बिना किसी कानूनी पैरवी के अदालत ने मामलों को अगली तारीखों पर टाल दिया, जिससे लोगों को समय और पैसे दोनों की भारी चपत लगी।

आमतौर पर सुबह से शाम तक गहमागहमी से गुलजार रहने वाले कोर्ट परिसर में पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। निराश होकर घर लौट रहे लोगों ने इस गतिरोध पर चिंता जताई, जबकि बार पदाधिकारियों ने साफ किया कि सामूहिक हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था।

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