Nilokheri News: मेरठ में न्याय मांग रहे दलितों पर लाठीचार्ज संविधान की हत्या, डॉ. वाल्मीकि ने एसएसपी पर एफआईआर की मांग की
दलित परिवार की बेटी को न्याय दिलाने की मांग कर रहे लोगों पर पुलिस की कथित बर्बरता संविधान का अपमान: डॉ. राजेश वैध वाल्मीकि
Nilokheri News: देश में हाशिए पर खड़े दलित और शोषित समाज के संवैधानिक अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। हरियाणा लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य एवं करनाल ग्रामीण कांग्रेस के जिलाध्यक्ष डॉ. राजेश वैध वाल्मीकि ने एक तीखा प्रेस बयान जारी कर केंद्र और विभिन्न राज्यों की भाजपा सरकारों को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने दो टूक कहा कि वर्तमान शासनकाल में दलित समाज पर होने वाले अत्याचार अब असहनीय और बर्दाश्त से बाहर के स्तर पर पहुंच चुके हैं, जो देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने के लिए एक गंभीर खतरा है।
न्याय मांगने पर मिलीं लाठियां, मेरठ पुलिस के रवैये पर उठाए गंभीर सवाल
डॉ. राजेश वैध वाल्मीकि ने उत्तर प्रदेश के मेरठ से सामने आई एक हालिया घटना का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कानून व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वहां अपनी मासूम बेटी को इंसाफ दिलाने की गुहार लेकर शांतिपूर्ण ढंग से धरने पर बैठे एक पीड़ित दलित परिवार और उनके समर्थकों पर पुलिसिया तंत्र काल बनकर टूटा। आरोप है कि मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और उनके मातहत पुलिसकर्मियों ने कानून की मर्यादाओं को ताक पर रखकर प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भांजी, उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
कांग्रेस नेता ने तल्ख लहजे में कहा, “जो जनता न्याय की आस में खाकी के पास जाती है, उसे अगर सड़कों पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा जाए, तो यह सीधे तौर पर बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान का अपमान है। लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन पुलिस अपराधियों को पकड़ने के बजाय पीड़ितों की आवाज दबाने में लगी है।”
सात दिन का अल्टीमेटम: आर-पार की लड़ाई के मूड में कांग्रेस
पीड़ितों के पक्ष में मजबूती से खड़े होने का दावा करते हुए डॉ. वाल्मीकि ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से ही समाज के वंचित, शोषित और पीड़ित वर्ग की ढाल रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस अमानवीय कृत्य में शामिल मेरठ के एसएसपी और अन्य दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ बिना किसी देरी के तत्काल प्रभाव से एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए और उन्हें निलंबित कर सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी या उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग से जांच कराने, पीड़ित परिवार को चौबीसों घंटे सुरक्षा मुहैया कराने और उन्हें उचित मुआवजा देने की भी मांग उठाई।
प्रशासन को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि सरकार इस मुगालते में न रहे कि दलित समाज की आवाज को लाठी और डंडे के बल पर खामोश किया जा सकता है। उन्होंने एक सप्ताह (7 दिन) का समय देते हुए कहा कि यदि तय समय सीमा के भीतर दोषियों पर गाज नहीं गिरी, तो कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी। इस अन्याय के खिलाफ समूचे देश और प्रदेश में एक व्यापक और उग्र जन आंदोलन की शुरुआत की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
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