HIRD Nilokheri: हर BDPO गोद ले एक ग्राम पंचायत, नीलोखेड़ी में हरियाणा और लद्दाख के अफसरों की 6 दिवसीय ट्रेनिंग का हुआ समापन
हर बीडीपीओ एक ग्राम पंचायत को गोद ले, आदर्श बनाए : डॉ. चौहान
HIRD Nilokheri: ग्रामीण विकास की वास्तविक सफलता तब तक मुकम्मल नहीं मानी जा सकती, जब तक कि उसका सीधा असर जमीनी स्तर पर न दिखे। सरकारी विकास केवल दफ्तरों की फाइलों, बजट के आकलनों और कागजी आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह तो गांव की चौपाल पर बैठे अंतिम व्यक्ति के मुखमंडल की मुस्कान में नजर आना चाहिए।” यह बात हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान (HIRD) के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वह शनिवार को संस्थान में विभिन्न राज्यों के खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों (BDPOs) तथा पंचायती राज विभाग के कार्यकारी अभियंताओं (XENs) के लिए आयोजित छह दिवसीय क्षमता विकास कार्यक्रम के समापन सत्र को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
‘गांव की संसद’ को प्रभावी बनाए बिना ग्राम स्वराज की कल्पना अधूरी
अधिकारियों के भीतर नई ऊर्जा फूंकते हुए डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने एक बड़ा आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी अपने-अपने विकास खंड (ब्लॉक) की कम से कम एक ग्राम पंचायत को गोद लें और वहां की ग्राम सभा को एक आदर्श एवं प्रभावी रूप देने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करें। पंचायती राज अधिनियम की मूल भावना का जिक्र करते हुए उन्होंने बेबाकी से स्वीकार किया कि कानून में जिस तरह की जीवंत और सशक्त ग्राम सभा की कल्पना की गई है, धरातल पर वैसी ग्राम सभाएं आज भी दुर्लभ हैं। उन्होंने दो टूक कहा, “जब तक हम ‘गांव की संसद’ यानी ग्राम सभा को नीतिगत रूप से प्रभावी नहीं बनाएंगे, तब तक सच्चे ग्राम स्वराज की बात करना बेमानी है। एक सशक्त ग्राम सभा ही पारदर्शी, सहभागी और जवाबदेह पंचायत व्यवस्था की असली बुनियाद होती है।”
6 दिन की ट्रेनिंग में सुशासन और डिजिटल गवर्नेंस का मिला पाठ
इस छह दिवसीय सघन प्रशिक्षण कार्यक्रम के खाके पर रोशनी डालते हुए कार्यक्रम समन्वयक एवं सहायक आचार्य कमलदीप सांगवान ने बताया कि सत्र के दौरान प्रतिभागियों को महज किताबी ज्ञान नहीं दिया गया, बल्कि व्यावहारिक धरातल पर मजबूत किया गया। विशेषज्ञों ने पंचायत प्रशासन, ग्रामीण विकास की नई योजनाओं, वित्तीय प्रबंधन, लीडरशिप डेवलपमेंट, डिजिटल गवर्नेंस और सामाजिक सहभागिता (सोशल ऑडिट) जैसे विषयों पर गहन ट्रेनिंग दी।
वहीं, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRDPR), हैदराबाद से विशेष तौर पर पहुंचीं डॉ. आकांक्षा शुक्ला और डॉ. सुचारिता पुजारी ने प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी कार्यशैली बदलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण का असली मकसद अधिकारियों की निर्णय लेने की क्षमता को धार देना और जनसेवा के प्रति एक सकारात्मक, संवेदनशील और नवाचारी (Innovative) दृष्टिकोण विकसित करना है।
हरियाणा और लद्दाख के अनुभवों का अनूठा संगम
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इस मायने में भी खास रहा कि इसमें भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से पूरी तरह भिन्न दो क्षेत्रों— हरियाणा और लद्दाख— के प्रशासनिक अनुभवों का अनूठा संगम देखने को मिला। राजौंद की बीडीपीओ अनु टांक ने कहा कि इस ट्रेनिंग के बाद अब ब्लॉक स्तर पर विकास योजनाओं का खाका ज्यादा परिणामोन्मुखी और प्रभावी ढंग से तैयार किया जा सकेगा। बबैन के बीडीपीओ आशुतोष ने भी माना कि तकनीकी अनुभव से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधरेगी।
दूरदराज लद्दाख से आए अधिकारी मोहम्मद ईसा ने इस मंच की सराहना करते हुए कहा कि हरियाणा और लद्दाख ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक-दूसरे के तौर-तरीकों से बहुत कुछ सीख सकते हैं। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए सिरसा से आए पंचायती राज विभाग के कार्यकारी अभियंता (एक्सियन) गौरव भारद्वाज ने एक महत्वपूर्ण जमीनी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि लद्दाख ने जिस तरह विपरीत परिस्थितियों के बीच ‘ठोस कचरा निस्तारण’ (Solid Waste Management) के क्षेत्र में काम किया है, वह देश के अन्य राज्यों के लिए एक बेहतरीन नजीर और अनुकरणीय मॉडल है। इस समापन अवसर पर दोनों राज्यों के दर्जनों पंचायत अधिकारी, तकनीकी विंग के इंजीनियर्स और संस्थान के संकाय सदस्य मौजूद रहे।
यह भी पढ़ें– Haryana News: हरियाणा में नदियों का रौद्र रूप, कुरुक्षेत्र में मारकंडा नदी उफान पर, इन 6 जिलों में अलर्ट
