July 26, 2026

Panipat News: श्रीकृष्ण पर विवादित टिप्पणी मामला, पानीपत कोर्ट ने मौलाना जर्जिस अंसारी को भेजा नोटिस, 12 अगस्त को पेशी

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Panipat News: श्रीकृष्ण पर विवादित टिप्पणी मामला, पानीपत कोर्ट ने मौलाना जर्जिस अंसारी को भेजा नोटिस, 12 अगस्त को पेशी

पानीपत कोर्ट से मौलाना जर्जिस अंसारी को झटका, 12 अगस्त को सभी सबूतों के साथ होना होगा हाजिर

Panipat News: भगवान श्रीकृष्ण पर अमर्यादित और अनर्गल टिप्पणी करने वाले उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी मौलाना जर्जिस अंसारी पर अब कानून का शिकंजा कसता नजर आ रहा है।

पानीपत की एक अदालत ने ‘मुस्लिम लीगल एड ट्रस्ट इंडिया’ की ओर से दाखिल याचिका पर संज्ञान लेते हुए मौलाना को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मौलाना जर्जिस को तमाम साक्ष्यों के साथ आगामी 12 अगस्त को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने के कड़े आदेश दिए हैं।

गीता के श्लोक की गलत व्याख्या से भड़का विवाद

पूरा विवाद इसी साल 23 जून का है, जब झारखंड में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मौलाना जर्जिस अंसारी ने अपने संबोधन में श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक का मनघड़ंत अर्थ निकाला।

मौलाना ने श्लोक का गलत हवाला देते हुए दावा कर दिया कि भगवान श्रीकृष्ण दिन में पांच वक्त की नमाज पढ़ा करते थे और धर्म से मुस्लिम थे। इतना ही नहीं, मौलाना ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लेते हुए आपत्तिजनक बातें कहीं और कहा कि इस्लाम सिर्फ मुसलमानों का नहीं बल्कि राम और कृष्ण का भी धर्म रहा है।

देशभर में हुआ था उग्र प्रदर्शन, संत समाज में था भारी रोष

मौलाना का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही देशभर में भारी विरोध शुरू हो गया था। हिंदू संगठनों ने जगह-जगह प्रदर्शन कर मौलाना पर एफआईआर दर्ज कराई, वहीं अयोध्या के संत समाज ने भी इस पर तीखा आक्रोश जताया था।

विवाद इतना बढ़ गया कि अयोध्या के संत विष्णु दास ने तो मौलाना की जीभ काटकर लाने वाले को 10 लाख रुपये का इनाम देने तक का ऐलान कर दिया था। इस बयान को लेकर मुस्लिम समाज के भीतर से भी मौलाना के खिलाफ आवाजें उठने लगी थीं।

अल्टीमेटम के बाद कोर्ट पहुंचा मुस्लिम लीगल एड ट्रस्ट

मुस्लिम लीगल एड ट्रस्ट इंडिया के चेयरमैन मोमिन मलिक ने बताया कि मौलाना जर्जिस को पहले 24 घंटे का अल्टीमेटम देकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और बयान वापस लेने को कहा गया था।

तय मियाद में कोई जवाब न मिलने पर ट्रस्ट ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। मोमिन मलिक का कहना है कि मौलाना के इस अपरिपक्व बयान से जहां एक तरफ हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ आम मुस्लिम समाज की छवि को भी भारी धक्का लगा है। फिलहाल मामला अदालत के विचाराधीन है और 12 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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