July 9, 2026

Preity Zinta Deepfake Case: AI के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट सख्त, प्रीति जिंटा की प्राइवेसी को लेकर गूगल और मेटा को दिए कड़े निर्देश

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Preity Zinta Deepfake Case: AI के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट सख्त, प्रीति जिंटा की प्राइवेसी को लेकर गूगल और मेटा को दिए कड़े निर्देश

प्रीति जिंटा की प्राइवेसी को लेकर गूगल और मेटा को दिए कड़े निर्देश

Preity Zinta Deepfake Case: डिमपल्ड गर्ल के नाम से मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ को लेकर लगातार सुर्खियों में हैं। फिल्म के टीजर को मिले शानदार रिस्पॉन्स के बाद जहां फैंस उनकी बड़े पर्दे पर वापसी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं अभिनेत्री इस

समय इंटरनेट पर अपनी छवि को खराब करने वाले तत्वों के खिलाफ एक बड़ी कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। इस सिलसिले में बॉम्बे हाईकोर्ट से प्रीति जिंटा को एक बड़ी और महत्वपूर्ण राहत मिली है। अदालत ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए सभी सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि अभिनेत्री की मर्जी के बिना बनाए गए डीपफेक वीडियो, एआई (AI) जनित फर्जी तस्वीरें और मॉर्फ्ड फोटो को तत्काल प्रभाव से इंटरनेट से हटा दिया जाए।

प्राइवेसी पर चोट बर्दाश्त नहीं, शिकायत के बाद चुप नहीं बैठ सकते डिजिटल प्लेटफॉर्म

यह ऐतिहासिक फैसला जस्टिस माधव जामदार की एकल पीठ ने प्रीति जिंटा की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह का भ्रामक कंटेंट साफ तौर पर किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों और उसकी प्राइवेसी (निजता) पर सीधा हमला है।

जस्टिस जामदार ने साफ शब्दों में कहा कि जब भी किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म को इस तरह के आपत्तिजनक या फर्जी कंटेंट की जानकारी दी जाती है, तो वह मूकदर्शक बनकर चुप नहीं बैठ सकता। यह उन प्लेटफॉर्म्स की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है कि वे शिकायत मिलते ही ऐसी सामग्री को अपने सर्वर से डिलीट करें।

“पहले से कहीं ज्यादा असली दिखते हैं एआई डीपफेक”

सुनवाई के दौरान प्रीति जिंटा की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील ने अदालत के सामने दलील दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तकनीक अब इस कदर एडवांस हो चुकी है कि इसके जरिए बनाए गए डीपफेक वीडियो और तस्वीरें बिल्कुल असली नजर आते हैं।

आम यूजर के लिए असली और नकली का अंतर कर पाना नामुमकिन होता जा रहा है, जिससे किसी भी नामचीन हस्ती की सामाजिक प्रतिष्ठा और निजी जिंदगी को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। इस खतरे को भांपते हुए ही मामले में तुरंत न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई थी, जिसे कोर्ट ने सही ठहराया।

गूगल और मेटा ने आदेश पर क्या कहा?

अदालत की इस सख्ती के बाद तकनीकी जगत के दो सबसे बड़े दिग्गजों—गूगल और मेटा—की ओर से पेश हुए वकीलों ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि प्रीति जिंटा ने अपनी याचिका में जिन विशिष्ट पोस्ट, लिंक्स और यूआरएल (URL) की शिकायत दर्ज कराई है, उन्हें हटाने में कंपनियों को कोई आपत्ति नहीं है और इस पर तुरंत अमल किया जाएगा।

हालांकि, उन्होंने कोर्ट के उस संभावित रुख का विरोध भी किया, जिसमें प्लेटफॉर्म्स को खुद से ऐसे कंटेंट की निगरानी करने को कहा जाए जो अभी तक चिन्हित नहीं हैं। टेक कंपनियों का तर्क है कि बिना किसी स्पेसिफिक इनपुट के करोड़ों पोस्ट्स की मैन्युअल या ऑटोमेटेड निगरानी करना व्यावहारिक रूप से बेहद जटिल है।

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