Haryana Online Transfer Policy: हरियाणा में अब ऑनलाइन होंगे सरकारी तबादले, जानें 2026 की नई नीति के कड़े नियम
Haryana Online Transfer Policy: हरियाणा के सरकारी महकमों में मनचाही पोस्टिंग और तबादलों के लिए चक्कर काटने वाले कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और जरूरी खबर है। प्रदेश सरकार ने ट्रांसफर के पूरे सिस्टम को हाईटेक और पारदर्शी बनाने के लिए ‘मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी-2026’ को अमलीजामा पहना दिया है।
मानव संसाधन विभाग (Human Resources Department) ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि 25 जून से ही यह नई नीति पूरे राज्य में प्रभावी हो चुकी है, जिसके बाद साल 2025 की पुरानी ट्रांसफर एडवाइजरी और नीतियां इतिहास का हिस्सा बन गई हैं। अब किसी भी विभाग में मैन्युअल तरीके से फाइलें आगे बढ़ाकर ट्रांसफर कराना मुमकिन नहीं होगा।
नोडल अधिकारी रखेंगे नजर, एचआरएमएस डेटा में गड़बड़ी पड़ी भारी
इस नई व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने हर विभाग को एक विशेष नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया है, जो अपने महकमे की पूरी ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया की सीधे निगरानी करेगा। मानव संसाधन विभाग द्वारा 7 जुलाई को जारी ताजा पत्र के मुताबिक, पूरी तबादला प्रक्रिया का एकमात्र आधार ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) पोर्टल पर मौजूद डेटा होगा।
अगर किसी कर्मचारी ने चालाकी दिखाते हुए पोर्टल पर अपनी प्रोफाइल, पद, कैडर या जॉइनिंग डेट से जुड़ी कोई भी गलत जानकारी दर्ज की, तो उसे इस पारदर्शी प्रक्रिया से तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। सजा के तौर पर सरकार ऐसे कर्मचारियों को राज्य के किसी भी कोने में खाली पड़े पद पर भेज सकती है।
रुकेंगी नियमित पोस्टिंग, तय मानकों पर बनेगी ट्रांसफर मेरिट
पॉलिसी के कड़े नियमों के तहत, जैसे ही किसी विशिष्ट कैडर के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर का मॉड्यूल खुलेगा, उस कैडर के भीतर होने वाले तमाम नियमित तबादलों और नई पोस्टिंग पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।
यहां तक कि अगर पुरानी नीति के तहत किसी के ट्रांसफर के आदेश केवल कागजों पर तैयार थे और जारी नहीं हो पाए थे, तो उन्हें भी तत्काल प्रभाव से निरस्त समझा जाएगा। तबादले के लिए कर्मचारियों की मेरिट उनकी कुल सेवा अवधि, कठिन या दुर्गम क्षेत्रों में उनके द्वारा दी गई सेवाओं और नीति में तय किए गए अन्य कड़े मापदंडों के आधार पर ऑनलाइन सॉफ्टवेयर ही तय करेगा।
कर्मचारी खुद भी कर सकेंगे डेटा अपडेट, इन विभागों में सिस्टम पहले से एक्टिव
इस पूरी कवायद में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को एम्प्लॉई सेल्फ सर्विस (ESS) पोर्टल के जरिए अपनी कुछ निजी जानकारियां और दस्तावेज खुद अपडेट करने की छूट दी गई है। हालांकि, उनके सर्विस रिकॉर्ड और पोस्टिंग की अंतिम सत्यता जांचने की जिम्मेदारी संबंधित डीडीओ (DDO) और एचआरएमएस एडमिनिस्ट्रेटर की होगी।
अंतिम मोहर विभागाध्यक्ष ही लगाएंगे। गौरतलब है कि स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई एवं जल संसाधन जैसे प्रमुख विभागों में यह ऑनलाइन व्यवस्था पहले से सफलतापूर्वक काम कर रही है। मार्च 2026 में सरकार ने 29 विभागों और बोर्डों के करीब 271 कैडरों को इसके दायरे में लिया था, जिसका विस्तार अब इस नई नीति के जरिए बाकी बचे महकमों में भी किया जा रहा है।
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