Tea seller daily income viral: क्या वाकई चाय बेचकर कमाए जा सकते हैं महीने के ₹1.35 लाख? सोशल मीडिया पर वायरल
चाय बेचने वाले की एक दिन की कमाई देख फटी रह गईं आंखें
Tea seller daily income viral: आज के दौर में जब देश का युवा बड़ी डिग्रियों के सहारे कॉरपोरेट दफ्तरों में नौ से पांच की नौकरी या किसी बड़े स्टार्टअप का सपना देख रहा है, तब सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने बिजनेस के पारंपरिक नजरिए को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। अक्सर हम और आप रेलवे स्टेशनों या बाजारों के बाहर रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने वालों को देखकर उनकी कमाई का अंदाजा नहीं लगा पाते।
इसी कौतूहल को शांत करने के लिए एक युवक ने जमीन पर उतरकर एक ऐसा एक्सपेरिमेंट किया, जिसके नतीजों ने बड़े-बड़े सैलरी पैकेज वालों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। युवक यह जानना चाहता था कि आखिर एक आम चाय वाला भीड़भाड़ वाले इलाके में रोजाना कितना कमा लेता है।
₹5 की चाय खरीदकर ₹15 में बेची; गर्मी में भी उमड़ पड़ी भीड़
इंस्टाग्राम पर सामने आए इस वीडियो में देखा जा सकता है कि युवक रेलवे स्टेशन के बाहर पहले से मौजूद एक चाय विक्रेता के पास जाता है। वह उससे ₹5 प्रति कप के थोक भाव के हिसाब से अपनी पूरी केतली (कैटल) चाय से भरवा लेता है। इसके बाद, वह उसी चाय को लेकर स्टेशन के ठीक बाहर खड़े मुसाफिरों और राहगीरों को ₹15 प्रति कप के हिसाब से बेचना शुरू कर देता है। शुरुआत में युवक के मन में यह हिचक थी कि भरी दुपहरी और तपती गर्मी में शायद ही कोई उससे चाय खरीदेगा, लेकिन जमीन की हकीकत बिल्कुल उलट निकली। देखते ही देखते मुसाफिरों की भीड़ उसके पास जुटने लगी और महज 2 घंटे के भीतर उसने 70 कप चाय बेच डाली।
हर महीने सवा लाख से ज्यादा की कमाई! क्या है इस जादुई आंकड़े का सच?
जैसे ही युवक की केतली खाली होती, वह दौड़कर मूल दुकानदार के पास जाता, पैसे चुकाकर केतली दोबारा भरवाता और फिर से ग्राहकों को परोसने में जुट जाता। सुबह से शाम तक चले इस सिलसिले के बाद जो अंतिम आंकड़े सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। युवक ने पूरे दिन में करीब 400 कप चाय बेच दी थी।
अब अगर इस धंधे के गणित को समझें, तो ₹5 की लागत पर ₹15 की बिक्री यानी सीधे तौर पर प्रति कप ₹10 का शुद्ध मुनाफा। इस लिहाज से युवक ने एक ही दिन में ₹4,500 की कमाई कर ली। अगर इसी रफ्तार से महीने के 30 दिन काम किया जाए, तो यह राशि ₹1,35,000 प्रति माह बनती है, जो कि किसी बड़े शहर में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर या मैनेजर की सैलरी के बराबर है। वहीं, इसका सालाना टर्नओवर ₹16 लाख के पार निकल जाता है।
सोशल मीडिया पर ‘दुकानदारी’ बनाम ‘व्यावहारिकता’ की बहस
इस दिलचस्प प्रयोग को @dhandhaonground नाम के इंस्टाग्राम हैंडल पर पोस्ट किया गया है, जिसे खबर लिखे जाने तक 8 लाख से ज्यादा व्यूज और 21 हजार से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं। वीडियो के कमेंट बॉक्स में अब डिजिटल बहस छिड़ गई है। डिजिटल जनता का एक धड़ा इस बात से पूरी तरह सहमत है कि भारत जैसे देश में ‘लोकेशन’ ही सबसे बड़ा राजा है;
अगर जगह सही हो और स्वाद में दम हो, तो छोटे से छोटा धंधा भी आपको करोड़पति बना सकता है। इसके विपरीत, कुछ अनुभवी यूजर्स ने व्यावहारिक चुनौतियां भी गिनाई हैं। उनका कहना है कि वीडियो में जो मुनाफा दिख रहा है, उसमें रेलवे पुलिस (GRP/RPF), स्थानीय नगर पालिका, जगह का किराया और हर मौसम में एक जैसी बिक्री न होने जैसे जमीनी फैक्टर्स को शामिल नहीं किया गया है। बहरहाल, जमीनी स्तर पर किया गया यह एक्सपेरिमेंट यह साबित करने के लिए काफी है कि हुनर और सही रणनीति हो, तो कमाई के लिए किसी बड़े ऑफिस की जरूरत नहीं होती।
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