Nuh News: हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले के बिसरू गांव के लिए सोमवार का दिन बेहद गौरवपूर्ण रहा, जब गांव के युवा नाजिम खान का चयन असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी (एडीए) के पद पर होने के बाद पहली बार गांव आगमन हुआ। नाजिम के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों और परिजनों ने उन्हें सिर-आंखों पर बिठा लिया। ढोल-नगाड़ों की थाप, आतिशबाजी और फूल-मालाओं के साथ उनका जोरदार नागरिक अभिनंदन किया गया। एक सामान्य और मेहनतकश परिवार से निकलकर कानून के क्षेत्र में यह बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाले नाजिम खान की इस सफलता से पूरे मेवात इलाके में खुशी का माहौल है।
अड़चनों और असफलताओं से नहीं मानी हार, जज बनने का था सपना
अपनी इस लंबी और संघर्षपूर्ण यात्रा के बारे में बात करते हुए नाजिम खान ने बताया कि वे फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत कर रहे हैं। वे साल 2017 से लगातार न्यायिक सेवाओं की तैयारी में जुटे हुए थे। इस दौरान वे दो बार हरियाणा ज्यूडिशियल सर्विस की मुख्य परीक्षा (मेंस) तक पहुंचे और हिमाचल ज्यूडिशियल परीक्षा में भी अपनी किस्मत आजमाई। नाजिम कहते हैं, “मेरा सपना जज बनने का था, लेकिन असफलताओं से हताश होने के बजाय मैंने अपनी कमियों को सुधारा। अब एडीए के पद पर चयन भी मेरे लिए एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।” उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि लक्ष्य तय कर अगर निरंतरता के साथ मेहनत की जाए, तो सफलता का रास्ता जरूर निकलता है।
“एक रोटी कम खाओ, पर बच्चों को जरूर पढ़ाओ”—नाजिम की भावुक अपील
देश के सबसे पिछड़े इलाकों में शुमार मेवात के युवाओं और अभिभावकों को प्रेरित करते हुए नाजिम खान ने शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मेवात में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसरों की जरूरत है। नाजिम ने भावुक अपील करते हुए कहा, “अभिभावकों से मेरी गुजारिश है कि आर्थिक स्थिति चाहे जैसी भी हो, बच्चों की पढ़ाई से कभी समझौता न करें। जरूरत पड़े तो पेट काटकर भी बच्चों को पढ़ाएं।” उन्होंने गांव के जनप्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को सुधारने पर ध्यान दें ताकि हर गरीब का बच्चा आगे बढ़ सके। उन्होंने बताया कि उनके अपने गांव की दो बेटियां पहले ही ज्यूडिशियल सर्विस में चयनित हो चुकी हैं, जिनसे उन्हें हमेशा प्रेरणा मिलती रही।
मजदूर पिता का सीना गर्व से चौड़ा, गांव में जश्न का माहौल
नाजिम की इस ऐतिहासिक सफलता पर उनके पिता सम्मन कुरैशी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। जीवनभर मजदूरी करके बेटे को पढ़ाने वाले सम्मन कुरैशी ने नम आंखों से कहा, “मैंने जिंदगी भर मेहनत-मजदूरी की, ताकि मेरे बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ सकें। आज बेटे ने मेरी सारी थकान मिटा दी। मैं हर पिता से यही कहूंगा कि अपने बच्चों का पूरा साथ दें और उन्हें नेक इंसान बनाएं।” वहीं गांव के वरिष्ठ अधिवक्ता शाहिद और स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि नाजिम का एडीए बनना पूरी बिरादरी और इलाके के लिए गर्व का विषय है। इससे मेवात के अन्य बच्चों को भी शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की दिशा में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिलेगी।
यह भी पढ़ें– मौसम विभाग का अलर्ट, हरियाणा में 28 से 31 अक्टूबर तक बारिश और तेज हवाओं के आसार

