September 13, 2026

Pathankot की बेटी अंशिका भारद्वाज ने Asian Karate Championship में जीता रजत पदक

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Pathankot की बेटी अंशिका भारद्वाज ने Asian Karate Championship में जीता रजत पदक

Pathankot की बेटी अंशिका भारद्वाज ने Asian Karate Championship में जीता रजत पदक

Pathankot | Asian Karate Championship | पंजाब के Pathankot की धरती ने देश को एक और गौरवशाली पल दिया है। शहर की बेटी अंशिका भारद्वाज ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए Asian Karate Championship में रजत पदक अपने नाम किया है।

उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। आर्मी बैकग्राउंड से ताल्लुक रखने वाली अंशिका के पिता भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं, जबकि उनकी माता एक शिक्षिका हैं जिन्होंने हर कदम पर अपनी बेटी की हौसलाफजाई की। बचपन से ही घर में अनुशासन और देशभक्ति का माहौल देखने के कारण अंशिका के भीतर भी देश के लिए कुछ कर गुजरने की ललक पैदा हुई थी।

कड़ी मेहनत और अनुशासन से तय किया सफर

अपनी स्कूली शिक्षा 12वीं कक्षा तक Pathankot से पूरी करने के बाद अंशिका ने कराटे को ही अपना मुख्य लक्ष्य बना लिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान खेल के कड़े अभ्यास और अनुशासन पर केंद्रित कर दिया।

उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि वह 22 सितंबर 2025 को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) का हिस्सा बनीं और वर्तमान में गोवा स्थित 6वीं बटालियन में तैनात हैं। इसके बाद इसी साल नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हुई 5वीं KIO सीनियर नेशनल कराटे चैंपियनशिप में महिलाओं के -61 किलोग्राम वर्ग में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर सीनियर स्तर पर अपनी जोरदार दस्तक दी थी।

एशियाई चैंपियनशिप में लहराया परचम

राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाने के बाद अंशिका ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने कदम बढ़ाए। गत 8 से 11 सितंबर 2026 के दौरान जॉर्डन के अम्मान शहर में 24वीं Asian Karate Championship का आयोजन किया गया था। इस प्रतिष्ठित महाद्वीपीय प्रतियोगिता में अंशिका ने अंडर-21 महिला -68 किलोग्राम भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

उन्होंने ईरान, जॉर्डन और सऊदी अरब की बेहद अनुभवी और मजबूत खिलाड़ियों को एक-एक करके मात दी और फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि स्वर्ण पदक के खिताबी मुकाबले में उन्हें सऊदी अरब की खिलाड़ी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम कर लिया। यह उनके खेल करियर की अब तक की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता है।

वर्दी का सपना और युवाओं के लिए प्रेरणा

जब अंशिका ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह पदक हासिल किया, तो उनकी नजरें उस बचपन के पल पर ठहर गईं जब उन्होंने पहली बार अपने पिता को सेना की वर्दी में देखा था। तभी उन्होंने ठान लिया था कि वे भी देश के लिए कुछ ऐसा करेंगी जिससे वे वर्दी पहनकर देश का नाम रोशन कर सकें। आज सीआईएसएफ की वर्दी में उनका वह सपना अंतरराष्ट्रीय पदकों के रूप में हकीकत बनकर सामने खड़ा है।

उनकी यह संघर्ष गाथा उन तमाम युवा एथलीटों के लिए एक मजबूत प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों या मुश्किलों के बावजूद अपनी मेहनत के दम पर सफलता की बुलंदियों को छूना चाहते हैं। CISF परिवार और देश भर के खेल प्रेमियों ने उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उन्हें ढेरों बधाइयां दी हैं।

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