Haryana News: रक्तदान में हरियाणा फिर बना नंबर-1, लगातार तीसरे साल मिला देश में पहला स्थान, 1 अक्टूबर को दिल्ली में होगा सम्मान

रक्तदान में हरियाणा फिर बना नंबर-1, लगातार तीसरे साल मिला देश में पहला स्थान, 1 अक्टूबर को दिल्ली में होगा सम्मान
Haryana News: दूसरों की जिंदगी बचाने और सामाजिक सरोकार निभाने में हरियाणा के लोगों का कोई सानी नहीं है। प्रति दस लाख की आबादी पर स्वैच्छिक रक्तदान करने के मामले में हरियाणा लगातार तीसरे साल देश भर में शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाए हुए है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए केंद्र सरकार आगामी 1 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में आयोजित होने वाले ‘राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस’ समारोह में हरियाणा को विशेष रूप से सम्मानित करेगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ई-रक्तकोष (e-Raktkosh) पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश भर में कुल 8,189 रक्तदान शिविर आयोजित किए गए, जिनमें नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए 5.89 लाख यूनिट रक्त दान किया। इससे पहले हरियाणा को वर्ष 2024 और 2025 में भी इस श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है।
बुनियादी ढांचा हुआ मजबूत: सभी 22 जिलों में सरकारी ब्लड सेंटर, 163 तक पहुंची संख्या
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में ब्लड बैंक सुविधाओं का बड़े पैमाने पर विस्तार किया गया है। चरखी दादरी के जिला नागरिक अस्पताल में नए ब्लड सेंटर को लाइसेंस मिलने के साथ ही अब प्रदेश के सभी 22 जिलों में कम से कम एक क्रियाशील सरकारी ब्लड सेंटर उपलब्ध हो गया है।
प्रदेश में कुल ब्लड सेंटरों की संख्या 146 से बढ़कर 163 हो गई है, जिनमें 34 सरकारी और 129 निजी केंद्र शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से 150 सेंटरों (लगभग 92%) में ‘ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन’ (रक्त अवयव पृथक्करण) की आधुनिक सुविधा मौजूद है। इसी का नतीजा है कि राज्य में स्वैच्छिक रक्तदान की दर 79 प्रतिशत से छलांग लगाकर 92 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो 95 प्रतिशत के राष्ट्रीय मानक के बेहद करीब है।
डिजिटल हुआ सिस्टम: 89 सेंटर आभा से जुड़े, वेस्टेज दर 2.69% पर सिमटी
हरियाणा ने न केवल रक्तदान का रिकॉर्ड बनाया, बल्कि अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में भी मिसाल कायम की है। राज्य के 89 ब्लड सेंटरों को ‘आभा’ (ABHA) आधारित डोनर रजिस्ट्रेशन सिस्टम से जोड़ दिया गया है। वर्तमान में 134 सेंटर ई-रक्तकोष प्लेटफॉर्म पर सीधे ऑनलाइन डेटा अपडेट कर रहे हैं, जिससे ब्लड की उपलब्धता की रियल-टाइम जानकारी मिल रही है और पारदर्शिता बढ़ी है।
चिकित्सकीय सुरक्षा के मामले में भी राज्य का प्रदर्शन शानदार रहा है। रक्त की बर्बादी (Discard Rate) को महज 2.69 प्रतिशत पर रोक लिया गया है, जो 4 प्रतिशत के राष्ट्रीय मानक से काफी बेहतर है। इसके अलावा, हाई-रिस्क रिएक्टिव डोनर्स की ट्रैकिंग दर 96.17 फीसदी दर्ज की गई।
जरूरतमंदों को राहत: बीपीएल, डेंगू, थैलेसीमिया और हीमोफीलिया मरीजों को मुफ्त ब्लड
राज्य सरकार की स्वास्थ्य नीतियों के तहत सरकारी अस्पतालों में भर्ती सभी मरीजों को रक्त और उसके कंपोनेंट्स मुफ्त में दिए जा रहे हैं। बीपीएल कार्डधारकों और डेंगू मरीजों को ‘सिंगल डोनर प्लेटलेट्स’ (SDP) मुफ्त मुहैया कराए जाते हैं।
इसके साथ ही, जीवनभर नियमित रक्त चढ़वाने पर निर्भर रहने वाले थैलेसीमिया और हीमोफीलिया के गंभीर मरीजों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। वर्तमान में राज्य के जिला नागरिक अस्पतालों में 1,443 थैलेसीमिया और 1,018 हीमोफीलिया मरीज पंजीकृत हैं, जिन्हें मुफ्त ब्लड के साथ-साथ एंटी-हीमोफीलिया फैक्टर्स और आवश्यक दवाएं दी जा रही हैं।
जनभागीदारी की मिसाल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल 5 मई को चलाए गए एक दिवसीय अभियान में 10,183 लोगों ने रक्तदान किया था, जबकि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत युवाओं ने 51 शिविर लगाकर 2,374 यूनिट रक्त इकट्ठा किया था।
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