PGI professor resignation: पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) के मनोरोग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. ग्रोवर और संस्थान के प्रशासन के बीच छुट्टी और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को लेकर विवाद केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) तक पहुंच गया। ऑस्ट्रेलिया में रिसर्च और फेलोशिप के लिए गए डॉ. ग्रोवर ने छह महीने की अतिरिक्त छुट्टी मांगी थी, लेकिन PGI प्रशासन ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की। इसके बाद उन्होंने संस्थान से इस्तीफा स्वीकार करने या वालंटरी रिटायरमेंट देने की मांग की। PGI प्रशासन ने फैकल्टी की कमी का हवाला देते हुए उनका इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद डॉ. ग्रोवर ने PGI प्रशासन, संस्थान के प्रेसिडेंट और निदेशक के खिलाफ कैट में याचिका दायर की। शुक्रवार को कैट ने PGI के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनका इस्तीफा खारिज किया गया था। न्यायाधिकरण ने प्रशासन को तीन सप्ताह के भीतर मामले पर दोबारा विचार करने और नियमानुसार फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।
डॉ. ग्रोवर ने अपनी याचिका में बताया कि उन्हें ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित रॉयल कॉलेज ऑफ साइकेट्री में फेलोशिप के लिए जाना था। इसके लिए उन्होंने PGI प्रशासन से दो साल की एक्स-इंडिया लीव मांगी थी। हालांकि, संस्थान ने उन्हें केवल एक साल की छुट्टी मंजूर की। एक साल की छुट्टी मिलने के बाद डॉ. ग्रोवर ऑस्ट्रेलिया चले गए। वहां अपनी रिसर्च और फेलोशिप से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने छुट्टी की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि उन्हें अपने अकादमिक और शोध कार्य को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत थी। लेकिन PGI प्रशासन ने उनकी छुट्टी बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की।
छह महीने की अतिरिक्त छुट्टी का आवेदन भी हुआ खारिज
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डॉ. ग्रोवर 3 फरवरी 2025 को ऑस्ट्रेलिया गए थे। उन्होंने 25 सितंबर 2025 को PGI प्रशासन को आवेदन देकर 3 फरवरी 2026 से 2 अगस्त 2026 तक छह महीने की अतिरिक्त छुट्टी देने की मांग की। हालांकि, प्रशासन ने इस अनुरोध को भी मंजूरी नहीं दी। अतिरिक्त छुट्टी नहीं मिलने के बाद डॉ. ग्रोवर ने संस्थान में अपनी सेवा जारी रखने के बजाय इस्तीफा स्वीकार करने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने की मांग उठाई। यह मामला इसलिए भी अहम हो गया, क्योंकि वह PGI में लंबे समय से काम कर रहे थे और मनोरोग विभाग में प्रोफेसर के पद पर तैनात थे।
डॉ. ग्रोवर 2 फरवरी 2026 को भारत लौटे। इसके बाद उन्होंने PGI को तीन महीने का नोटिस देकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने या इस्तीफा स्वीकार करने की मांग की। लेकिन संस्थान ने उनका इस्तीफा खारिज कर दिया। PGI प्रशासन की ओर से फैकल्टी की कमी को इसका आधार बनाया गया। प्रशासन का कहना था कि हाल ही में दो डॉक्टरों के संस्थान छोड़ने के कारण विभाग में फैकल्टी की कमी हो गई है। ऐसे समय में एक वरिष्ठ प्रोफेसर को सेवानिवृत्ति देने से संस्थान की सेवाओं और विभागीय कामकाज पर असर पड़ सकता है। प्रशासन के इस फैसले के बाद डॉ. ग्रोवर ने न्यायाधिकरण में याचिका दाखिल की। उन्होंने PGI प्रशासन के साथ संस्थान के प्रेसिडेंट और निदेशक के फैसले को चुनौती दी। कैट ने मामले पर सुनवाई के बाद इस्तीफा खारिज करने वाले आदेश को रद्द कर दिया और प्रशासन को तीन सप्ताह के भीतर नए सिरे से फैसला लेने को कहा।
कैट के आदेश के बाद PGI प्रशासन को तीन सप्ताह में लेना होगा फैसला
कैट के आदेश से डॉ. ग्रोवर के मामले पर दोबारा विचार करने का रास्ता खुल गया है। न्यायाधिकरण ने PGI प्रशासन को तीन सप्ताह के भीतर उनके मामले की समीक्षा कर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब है कि संस्थान को अब उनके इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग पर फिर से विचार करना होगा। हालांकि, आदेश रद्द होने का अर्थ यह नहीं है कि डॉ. ग्रोवर का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है या उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मंजूर हो गई है। अंतिम फैसला PGI प्रशासन को ही लेना है। अब यह देखना होगा कि संस्थान फैकल्टी की कमी और डॉ. ग्रोवर की मांग से जुड़े पहलुओं पर विचार करने के बाद क्या निर्णय लेता है।
डॉ. ग्रोवर की उम्र फिलहाल 53 साल है, जबकि PGI में फैकल्टी की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित है। इस हिसाब से उन्होंने निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु से करीब 12 साल पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग की थी। डॉ. ग्रोवर ने 1 जनवरी 2000 को PGI में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम शुरू किया था। इसके बाद वह असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर बने। 12 मई 2017 को उन्हें प्रोफेसर के पद पर पदोन्नति मिली। इस तरह उन्होंने संस्थान में जूनियर रेजिडेंट से लेकर वरिष्ठ प्रोफेसर तक का सफर तय किया।
कैटाटोनिया के इलाज में काम को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
डॉ. ग्रोवर मनोरोग के जाने-माने विशेषज्ञ हैं। कैटाटोनिया बीमारी के इलाज में उनके काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। कैटाटोनिया एक ऐसी चिकित्सकीय स्थिति है, जिसमें व्यक्ति की गतिविधियों, व्यवहार और प्रतिक्रिया देने की क्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसके उपचार में सही समय पर पहचान और विशेषज्ञ चिकित्सा की अहम भूमिका होती है। PGI जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थान में वरिष्ठ विशेषज्ञों की भूमिका मरीजों के इलाज के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध में भी अहम होती है। ऐसे में डॉ. ग्रोवर के इस्तीफे और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से जुड़ा मामला संस्थान के प्रशासनिक निर्णयों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अब कैट के निर्देश के बाद PGI प्रशासन को तीन सप्ताह के भीतर इस मामले पर नया फैसला लेना होगा।
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