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Hydrogen Train Haryana: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को कल हरी झंडी दिखाएंगे पीएम मोदी, हरियाणा बनेगा क्लीन एनर्जी का गढ़

Hydrogen Train Haryana: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को कल हरी झंडी दिखाएंगे पीएम मोदी, हरियाणा बनेगा क्लीन एनर्जी का गढ़

पानीपत में लग रहा है देश का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट, ₹38 करोड़ के प्रोजेक्ट्स के बाद एक और बड़ी छलांग

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AAmandeep Singh

Hydrogen Train Haryana: भारत की परिवहन व्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र के लिए 17 जुलाई का दिन बेहद ऐतिहासिक होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन का उद्घाटन करने वाले हैं। यह शुरुआत सिर्फ भारतीय रेल को धुआं-मुक्त करने की कवायद नहीं है, बल्कि देश को ग्रीन हाइड्रोजन आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी छलांग है।

केंद्र की इस पहल के साथ ही हरियाणा सरकार ने भी खुद को देश के अग्रणी ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। बुनियादी ढांचे से लेकर औद्योगिक प्रोत्साहन तक, राज्य में एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है।

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हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (HAREDA) इस समय राज्य की एक बेहद महत्वाकांक्षी समर्पित ग्रीन हाइड्रोजन नीति को अंतिम रूप देने में जुटा है, जिसका ड्राफ्ट पहले ही पब्लिक डोमेन में रायशुमारी के लिए जारी किया जा चुका है। इस नीति के जरिए प्रदेश में न सिर्फ हाइड्रोजन उत्पादन को रफ्तार दी जाएगी, बल्कि इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण, सुरक्षित भंडारण, परिवहन और रिसर्च सेक्टर्स में निवेश करने वाली कंपनियों को मोटी वित्तीय छूट और रियायतें दी जाएंगी।

2030 तक ढाई लाख टन उत्पादन का खाका, उद्योगों को कार्बन-मुक्त करने की तैयारी

राज्य सरकार ने भविष्य की जरूरतों को भांपते हुए साल 2030 तक के लिए बेहद कड़े लक्ष्य तय किए हैं। नई नीति के मुताबिक, साल 2030 तक हरियाणा में सालाना 250 किलो टन (ढाई लाख टन) ग्रीन हाइड्रोजन पैदा करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही उद्योगों के लिए सबसे जरूरी 2 गीगावाट की इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण क्षमता भी सूबे में ही विकसित की जाएगी।

दरअसल, एक अनुमान के मुताबिक 2030 तक हरियाणा में इस स्वच्छ ईंधन की मांग बढ़कर 300 किलो टन सालाना तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि खट्टर-सैनी प्रशासन समय रहते भारी-भरकम औद्योगिक बुनियादी ढांचा खड़ा करने में लगा है ताकि भविष्य में बिजली और ईंधन के संकट को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके।

इस पूरी कवायद को जमीनी स्तर पर रफ्तार देने का काम किया है राज्य की ‘मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति-2026’ ने। सरकार ने इस नीति में ग्रीन हाइड्रोजन को ‘थ्रस्ट सेक्टर’ यानी विशेष प्राथमिकता वाले उद्योगों की सूची में डाला है।

इसका सीधा मतलब यह है कि जो भी कंपनियां हरियाणा में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट, फ्यूल सेल, स्टोरेज टैंक या इससे जुड़े साजो-सामान बनाने की यूनिट लगाएंगी, उन्हें पूंजीगत अनुदान (Capital Grant) पर 5 फीसदी का अतिरिक्त टॉप-अप इंसेंटिव मिलेगा। सरकार का यह कदम साफ तौर पर निवेशकों को आकर्षित करने का एक बड़ा दांव है।

पानीपत रिफाइनरी में लग रहा है देश का सबसे बड़ा प्लांट, एनसीआर कनेक्टिविटी का मिलेगा फायदा

इस बड़े बदलाव का सबसे बड़ा गवाह पानीपत बनने जा रहा है। यहाँ इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) की रिफाइनरी के लिए एलएंडटी एनर्जी ग्रीनटेक द्वारा 10,000 टन प्रतिवर्ष क्षमता का एक विशाल ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है।

यह प्लांट अगले 25 सालों तक पानीपत रिफाइनरी को क्लीन एनर्जी की सप्लाई करेगा, जिससे अब तक इस्तेमाल होने वाले जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) पर निर्भरता खत्म होगी और रिफाइनरी से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। इसे भारत की सबसे बड़ी औद्योगिक ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं में गिना जा रहा है।

औद्योगिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि दिल्ली-एनसीआर से सटी भौगोलिक स्थिति के कारण हरियाणा इस रेस में सबसे आगे है। पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार और यमुनानगर जैसे पहले से स्थापित मजबूत औद्योगिक बेल्ट, बेहतरीन रेल-सड़क नेटवर्क और भारी उद्योगों की मौजूदगी के चलते यहाँ उत्पादित हाइड्रोजन की खपत के लिए बाजार ढूंढना नहीं पड़ेगा। ऑटोमोबाइल, स्टील और केमिकल सेक्टर में इस ईंधन की भारी मांग रहने वाली है, जिससे आने वाले समय में न सिर्फ पर्यावरण सुधरेगा बल्कि रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे।

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