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Prehistoric Life: 5 आंखें और हाथी जैसी सूंड, 50 करोड़ साल पुराने इस उंगली बराबर जीव को देख वैज्ञानिक भी रह गए थे हैरान

Prehistoric Life: 5 आंखें और हाथी जैसी सूंड, 50 करोड़ साल पुराने इस उंगली बराबर जीव को देख वैज्ञानिक भी रह गए थे हैरान

बिना पैर 15 जोड़ी पंखों से तैरता था ओपबीनिया, जानिए इसके होश उड़ाने वाले फैक्ट्स

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AAmandeep Singh

Prehistoric Life: यदि आज कोई फिल्ममेकर किसी हॉरर या साइंस फिक्शन फिल्म के लिए एलियन का स्केच तैयार करे, तो शायद वह ओपबीनिया जैसा ही दिखेगा। लेकिन यह कोई काल्पनिक रचना नहीं, बल्कि आज से ठीक 50.5 करोड़ साल पहले हमारी धरती के महासागरों में तैरने वाला एक कड़वा सच है।

पृथ्वी के इतिहास में ‘कैम्ब्रियन विस्फोट’ (Cambrian Explosion) उस दौर को कहा जाता है जब समंदर में अचानक अजीब और नए किस्म के जीवों का जन्म हो रहा था। इसी दौर की सबसे रहस्यमयी और अनोखी पैदाइश थी ओपबीनिया, जिसकी शारीरिक संरचना ने डार्विन के विकासवाद के सिद्धांतों को समझने वाले वैज्ञानिकों को भी लंबे समय तक चक्कर में डाल रखा था।

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5 आंखें और 360 डिग्री का सुरक्षा कवच

इस नन्हे जीव के सिर का ढांचा सबसे ज्यादा हैरान करने वाला है। इसके सिर के ऊपरी हिस्से पर बल्ब या छोटे मशरूम की तरह दिखने वाली पांच आंखें उगी हुई थीं।

दो आंखें बाईं तरफ, दो दाईं तरफ और एक आंख बिल्कुल केंद्र में स्थापित थी। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि समंदर की गहराइयों में जहां रोशनी बेहद कम होती थी, वहां ये पांचों आंखें मिलकर ओपबीनिया को एक ऐसा विजुअल रडार देती थीं जिससे यह चारों तरफ (360 डिग्री) एक साथ नजर रख सकता था। प्रागैतिहासिक काल के बड़े शिकारियों से बचने के लिए कुदरत ने इसे यह अनूठा सुरक्षा कवच दिया था।

सूंड से शिकार और सिर के नीचे भोजन

ओपबीनिया की दूसरी सबसे बड़ी खासियत थी इसके चेहरे के आगे निकली एक लंबी और बेहद लचीली सूंड, जो इसके कुल शरीर का लगभग एक-तिहाई हिस्सा थी। आधुनिक हाथी की सूंड की तरह दिखने वाली इस नली के अंतिम छोर पर नुकीले कांटे या पंजे जैसी पकड़ बनी हुई थी। यह जीव समंदर की तलहटी में जमी रेत को इस सूंड से कुरेदता था और उसमें छिपे कीड़े-मकौड़ों को दबोच लेता था।

दिलचस्प बात यह है कि इसका मुंह सीधे सामने की तरफ नहीं था। सूंड से पकड़े गए शिकार को यह अपने सिर के नीचे और पिछले हिस्से में बने मुंह की तरफ खींचकर ले जाता था। चलने के लिए पैरों के बजाय इसके शरीर के किनारों पर 15 जोड़ी तैरने वाले फ्लैप (पंख) लगे थे, जो पानी में तरंगें पैदा कर इसे आगे बढ़ाते थे।

जब वैज्ञानिकों की महफिल में उड़ा इस जीव का मजाक

इस विचित्र जीव के आकार की बात करें तो यह किसी मॉन्स्टर की तरह विशाल नहीं, बल्कि बेहद छोटा था। इसकी कुल लंबाई महज 4 से 7 सेंटीमीटर के बीच हुआ करती थी— यानी आपकी एक उंगली के बराबर।

इस जीव के खोजे जाने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। साल 1975 में जब मशहूर जीवाश्म विज्ञानी हैरी व्हिटिंगटन ने एक अंतरराष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन में पहली बार ओपबीनिया का प्लास्टिक मॉडल और उसका शोध पत्र दुनिया के सामने रखा, तो हॉल में मौजूद अन्य वैज्ञानिक ठहाके मारकर हंस पड़े थे।

विशेषज्ञों को लगा कि हैरी उनके साथ कोई मज़ाक कर रहे हैं और ऐसा कोई जीव धरती पर कभी अस्तित्व में रह ही नहीं सकता। हालांकि, बाद में कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में स्थित ‘बर्गेस शेल’ की प्रागैतिहासिक चट्टानों से मिले अकाट्य जीवाश्मों ने दुनिया के तमाम वैज्ञानिकों को अपने शब्द वापस लेने पर मजबूर कर दिया। आज ओपबीनिया को धरती पर जीवन के क्रमिक विकास की सबसे अद्भुत और रहस्यमयी कड़ियों में से एक माना जाता है।

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