Punjab paddy contribution central pool : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चंडीगढ़ स्थित पंजाब कला भवन में तीन जिल्दों और 1,980 पृष्ठों की ऐतिहासिक पुस्तक ‘पंजाब का इतिहास’ का विमोचन किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की समृद्ध विरासत का जिक्र करते हुए घोषणा की कि पंजाब इस साल फिर से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूत करते हुए केंद्रीय अन्न भंडार में रिकॉर्ड 180 लाख मीट्रिक टन धान का योगदान देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चावल पंजाबियों का मुख्य आहार नहीं है, फिर भी राज्य देश की भूख मिटाने के लिए लगातार अग्रिम पंक्ति में खड़ा है।
देश के अन्न भंडार में पंजाब का ऐतिहासिक योगदान
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पंजाब के मेहनती किसानों ने देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपनी जमीन का पूरा इस्तेमाल किया है। स्वतंत्रता के बाद से ही जब भी देश को अनाज की जरूरत पड़ी, पंजाब के किसानों ने दिन-रात मेहनत करके अन्न का संकट दूर किया। इस साल भी 180 लाख मीट्रिक टन धान का योगदान देकर पंजाब अपने इस गौरवशाली इतिहास को दोहराने जा रहा है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पंजाब के उन उद्यमियों और उद्योगपतियों के योगदान की भी सराहना की, जिन्होंने देश और राज्य की आधुनिक अर्थव्यवस्था की नींव रखी है। उन्होंने कहा कि कृषि और उद्योग के इस अनोखे तालमेल ने पंजाब को देश के आर्थिक नक्शे पर एक विशेष स्थान दिलाया है।
स्वतंत्रता संग्राम में 90 फीसदी कुर्बानियां पंजाबियों की
आजादी की लड़ाई में पंजाबियों के योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने एक ऐतिहासिक तथ्य सामने रखा। उन्होंने कहा कि उस समय देश की कुल आबादी का महज 2 प्रतिशत होने के बावजूद भारत के स्वतंत्रता संग्राम में 90 प्रतिशत से ज्यादा कुर्बानियां पंजाबियों ने दी थीं।
जालियांवाला बाग से लेकर कामागाटामारू आंदोलन और गदर पार्टी तक, हर बड़े स्वतंत्रता आंदोलन की कमान पंजाब की धरती के वीरों ने संभाली। सिख गुरु साहिबान द्वारा अन्याय और जुल्म के खिलाफ दी गई सीख का जिक्र करते हुए मान ने कहा कि अन्याय से लड़ना पंजाबियों के खून में शामिल है।
आजादी के बाद भी देश की सीमाओं की सुरक्षा से लेकर आर्थिक स्वावलंबन तक, पंजाब के लोगों ने हमेशा अपनी जान की परवाह किए बिना सबसे आगे रहकर फर्ज निभाया है।
भावी पीढ़ी के लिए अपनी जड़ों को सहेजना जरूरी
1,980 पन्नों की इस विस्तृत पुस्तक का महत्व समझाते हुए भगवंत मान ने कहा कि सदियों के उतार-चढ़ाव, जीत और संघर्ष को पन्नों पर दर्ज करना एक बेहद जिम्मेदारी का काम था। उन्होंने कहा कि केवल वही कौमें समय की कसौटी पर जीवित रहती हैं, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों और अतीत को याद रखती हैं। अपने गौरवशाली अतीत को भुलाने वाली कौमें धीरे-धीरे अपनी पहचान खो देती हैं।
पंजाब सरकार अब प्रदेश की इसी अनमोल विरासत, साहित्य और कला को सहेजने के लिए विशेष अभियान चला रही है ताकि नई पीढ़ी को अपने इतिहास की पूरी जानकारी मिल सके।

