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Cycle Tour: रेवाड़ी से उज्जैन पहुंची ‘जानू साइकिल’: 40 हजार KM की देशव्यापी यात्रा पर निकले महेश ने किए महाकाल के दर्शन

Cycle Tour: रेवाड़ी से उज्जैन पहुंची 'जानू साइकिल': 40 हजार KM की देशव्यापी यात्रा पर निकले महेश ने किए महाकाल के दर्शन

दुनिया की 13.9% आबादी मानसिक तनाव में, लोगों को जागरूक करने साइकिल लेकर निकला एयरफोर्स रिटायर्ड का बेटा

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AAmandeep Singh

Cycle Tour: हरियाणा के रेवाड़ी जिले के रहने वाले 28 वर्षीय महेश प्रजापति इन दिनों एक बेहद अनोखे और साहसिक मिशन पर हैं। देश के भूगोल को अपनी साइकिल से नापने निकले महेश शुक्रवार को भगवान महाकाल की पावन नगरी उज्जैन पहुंचे।

अपनी पसंदीदा साइकिल, जिसे उन्होंने प्यार से ‘जानू’ नाम दिया है, उस पर सवार होकर वे विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे और बाबा महाकाल के दर्शन कर अपनी लंबी यात्रा की सफलता का आशीर्वाद लिया। महेश की यह यात्रा महज एक सैर-सपाटा नहीं है, बल्कि इसके पीछे सामाजिक सरोकार और जन-जागरूकता का एक बड़ा उद्देश्य छिपा है।

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12 ज्योतिर्लिंग, चारधाम और लद्दाख फतह करने का लक्ष्य, अफसरों से कर रहे मुलाकात

महेश प्रजापति का यह अभियान बेहद विशाल है। वे भारत के सभी 28 राज्यों, 8 केंद्र शासित प्रदेशों, 12 ज्योतिर्लिंगों और चारधाम समेत दुर्गम लद्दाख तक साइकिल से पहुंचने का संकल्प ले चुके हैं। अपनी यात्रा के दौरान वे जिस भी जिले से गुजरते हैं, वहां के कलेक्टर और एसपी से मुलाकात कर अपने इस अभियान के उद्देश्यों को साझा करते हैं।

उज्जैन आगमन पर भी उन्होंने एडीजी राकेश गुप्ता, डीआईजी नवीन भसीन, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक करणदीप सिंह सहित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बड़े भाई व प्रेस क्लब अध्यक्ष नंदलाल यादव से भेंट की और अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए।

109 दिनों में तय किया 5 हजार किलोमीटर का सफर, राजस्थान के बाद अब एमपी की बारी

अपनी इस मुहिम के बारे में जानकारी देते हुए महेश ने बताया, “यह सफर बीते 15 मार्च को गृह राज्य हरियाणा के रेवाड़ी से शुरू हुआ था। आज मेरी यात्रा का 109वां दिन है और मैं अब तक लगभग 5 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर चुका हूं।

” उन्होंने बताया कि वे राजस्थान के चप्पे-चप्पे को साइकिल से खंगालने के बाद अब मध्य प्रदेश की धरती पर हैं, और यहां के बाद उनका अगला पड़ाव गुजरात होने वाला है। इस पूरे 40 हजार किलोमीटर के सफर में वे देश की विविधता को समझने के साथ-साथ लोगों को फिट इंडिया और पर्यावरण बचाने का संदेश भी दे रहे हैं।

मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) को लेकर जगा रहे अलख, वैश्विक आंकड़ों से चेताया

इस यात्रा का एक सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पहलू है ‘मानसिक स्वास्थ्य’ के प्रति लोगों को जागरूक करना। महेश ने बताया कि आज के दौर में लोग इस विषय पर बात करने से कतराते हैं, जबकि यह एक गंभीर समस्या है। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “दुनिया भर की करीब 802 करोड़ की आबादी में से लगभग 13.9 प्रतिशत लोग किसी न किस रूप में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं।”

महेश के मुताबिक, कुछ बीमारियां जन्मजात होती हैं जिन पर हमारा बस नहीं है, लेकिन एक बड़ी आबादी खराब जीवनशैली, तनाव और गलत खान-पान के कारण डिप्रेशन का शिकार हो रही है, जिसे सही काउंसलिंग और दिनचर्या में बदलाव करके ठीक किया जा सकता है।

विदेशों में भी चला चुके हैं पैडल, एयरफोर्स से रिटायर्ड पिता हैं सबसे बड़े संबल

साइकिल से लंबी दूरियां तय करना महेश के लिए कोई नया शौक नहीं है। इससे पहले पिछले साल वे इसी ‘जानू साइकिल’ से भारत के पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, भूटान, वियतनाम और थाईलैंड तक का सफर सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं।

अपने परिवार के बारे में बात करते हुए महेश ने भावुक होकर बताया कि उनके घर में माता-पिता, भाई-बहन और भाभी सभी उनका पूरा साथ देते हैं। उनके पिता भारतीय वायुसेना (Air Force) से सेवानिवृत्त हैं और उन्हीं के आर्थिक और नैतिक सहयोग की बदौलत महेश आज बिना रुके देश सेवा के इस अनोखे मार्ग पर पैडल मार पा रहे हैं।

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