Rohtak Dobh Village School Dispute: हरियाणा के रोहतक जिले स्थित डोभ गांव में सोमवार को उस वक्त प्रशासनिक और सामाजिक पारा चढ़ गया, जब सरकारी स्कूल के कंडम (जर्जर) भवन को तोड़े जाने की प्रक्रिया के दौरान ग्रामीण और ग्राम पंचायत आमने-सामने आ गए। ग्रामीणों ने स्कूल की नीलामी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसमें धांधली और अपारदर्शिता के गंभीर आरोप लगाए और काम को मौके पर ही बंद करवा दिया। स्थिति में तनाव बढ़ता देख प्रशासन को मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
स्थानीय निवासी रामपाल और नवीन ने रोष जाहिर करते हुए कहा कि गांव का यह स्कूल दशकों पहले ग्रामीणों के सहयोग और सरकारी तंत्र से बना था। भवन जर्जर होने के कारण इसे कंडम तो घोषित कर दिया गया, लेकिन इसे ढहाने की नीलामी प्रक्रिया के बारे में पूरे गांव को अंधेरे में रखा गया। 90 फीसदी से अधिक ग्रामीणों को नीलामी की तारीख और नियमों की भनक तक नहीं लगने दी गई। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि सरपंच और टेंडर हासिल करने वाले ठेकेदार की मिलीभगत से यह पूरा खेल खेला गया है। ग्रामीणों की मांग है कि इस नीलामी को रद्द कर दोबारा सार्वजनिक और पारदर्शी तरीके से बोली करवाई जाए।
साढ़े 4 करोड़ से बनेगा नया भवन, जिला परिषद सदस्य बोले- प्रक्रिया सही हो
विवाद के बीच जिला परिषद सदस्य जयदेव डागर ने बताया कि डोभ गांव के इस स्कूल के नए और आधुनिक भवन के निर्माण के लिए उन्होंने जिला परिषद की बैठकों में लगातार आवाज उठाई थी। उनकी कोशिशों से शासन की ओर से नए भवन के निर्माण के लिए साढ़े 4 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो चुका है। नया स्कूल बनाने की दिशा में काम चल रहा है, लेकिन पुराने भवन को हटाने की प्रक्रिया में ग्रामीणों को विश्वास में लिया जाना बेहद जरूरी है ताकि निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए।
‘आरोप बेबुनियाद, शिक्षा विभाग ने नियमानुसार कराई नीलामी’ – सरपंच प्रतिनिधि
दूसरी ओर, ग्रामीणों के तीखे आरोपों का खंडन करते हुए ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि प्रदीप सुहाग ने सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूल भवन ढहाने की नीलामी प्रक्रिया में पंचायत का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं है। यह पूरी प्रक्रिया शिक्षा विभाग और सरकारी एजेंसियों द्वारा तय नियमों के मुताबिक ही अमल में लाई गई है।
सुहाग ने कहा कि विभाग की ओर से नियमानुसार समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी कर बोलियां आमंत्रित की गई थीं। उनके ऊपर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार और सांठगांठ के आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं। फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्षों को शांत कराया गया है, जबकि ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं।
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