Ambala News: हरियाणा के अंबाला शहर में धान के सीजन के बीच अन्नदाताओं का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। शनिवार सुबह अंबाला शहर की अनाज मंडी के बाहर हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के बैनर तले सैकड़ों किसान सड़कों पर उतर आए। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई वार्ताओं के बेनतीजा रहने के बाद किसानों ने हिसार नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। विरोध का अनूठा तरीका अपनाते हुए किसान सड़क के बीचोंबीच दरी बिछाकर बैठ गए और वहीं लंगर छकना शुरू कर दिया, जिससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
15 और 16 अक्टूबर का दिया गया था अल्टीमेटम
किसान नेताओं का कहना था कि प्रशासन और सरकार को अपनी मांगों के समर्थन में 15 और 16 अक्टूबर तक का स्पष्ट समय दिया गया था। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई थी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो 17 अक्टूबर को बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। शनिवार की सुबह जब किसान अनाज मंडी में एकत्रित हुए और संबंधित अधिकारियों से बातचीत की, तो उनकी समस्याओं का कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला। मजबूरन किसानों ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।
सरकार के साथ बैठकों के बाद भी नहीं निकला नतीजा
इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे किसान नेता जल सिंह ने जानकारी दी कि 10 और 11 अक्टूबर को सरकार के नुमाइंदों के साथ लंबी बैठकें हुई थीं। इन बैठकों में किसानों ने मंडियों में आ रही दिक्कतों और अपनी मांगों को बेहद प्रमुखता से उठाया था। इसके बावजूद सरकार या प्रशासन की तरफ से कोई ठोस राहत या समाधानकारक आदेश जारी नहीं किए गए। किसानों का साफ आरोप है कि कागजी आश्वासनों के अलावा ज़मीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा है, जिससे उन्हें हर साल सीजन के वक्त आर्थिक चपत झेलनी पड़ती है।
प्रशासन के साथ बैठक के बाद खुला रास्ता
अंबाला-हिसार मार्ग पर जाम लगने के कारण यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने किसानों को समझाने-बुझाने के तमाम प्रयास किए, लेकिन किसान अपनी मांगों पर डटे रहे। दोपहर के वक्त प्रशासन के साथ एक बार फिर उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें किसानों की मुख्य मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद दोपहर करीब 2:38 बजे किसानों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। किसानों की मांग है कि मंडियों में धान की खरीद 35 क्विंटल की जाए और तौल या गुणवत्ता के नाम पर फसल में की जाने वाली अनावश्यक कटौती पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
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