Shani Vakri 2026: भारतीय ज्योतिष और सनातन परंपरा में शनि देव को अनुशासित और कर्मों का हिसाब रखने वाला ग्रह माना गया है। यही वजह है कि जब भी शनि की चाल में कोई बदलाव होता है, तो जनमानस में उसे लेकर कौतूहल और सावधानी दोनों बढ़ जाती हैं। आगामी 27 जुलाई से शनि देव मीन राशि में वक्री होने जा रहे हैं।
ज्योतिषियों के मुताबिक, जब कोई क्रूर या न्यायप्रिय ग्रह वक्री होता है, तो उसका प्रभाव और अधिक तीव्र हो जाता है। इस दौरान जहां लोग शनि चालीसा, दान और विशेष अनुष्ठानों के जरिए उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं, वहीं शास्त्रों में कुछ ऐसी बंदिशें भी बताई गई हैं जिनका पालन न करने पर व्यक्ति को शनि के कोप का भाजन बनना पड़ सकता है। विशेष रूप से इस अवधि में कुछ चुनिंदा वस्तुओं की खरीदारी को पूरी तरह वर्जित माना गया है।
लोहा और सरसों का तेल बढ़ा सकता है कर्ज का बोझ
ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार, लोहा सीधे तौर पर शनि देव की धातु है। सामान्य दिनों में भले ही लोहे का व्यापार या खरीदारी सामान्य हो, लेकिन शनि के वक्री काल में लोहे का कोई भी नया सामान, वाहन या मशीनरी घर लाना भारी वित्तीय नुकसान का सबब बन सकता है।
ठीक इसी तरह, शनि पूजा का मुख्य आधार माना जाने वाला सरसों का तेल भी इस दौरान बाजार से खरीदकर घर की रसोई में नहीं लाना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, वक्री काल में तेल की खरीदारी करने से मनुष्य पर कर्ज का बोझ बढ़ता है और घर के मुखिया या सदस्यों के स्वास्थ्य में गिरावट आने लगती है।
नमक से बिगड़ेगा घर का माहौल, पहले ही कर लें स्टॉक
अक्सर घरों में नमक खत्म होने पर उसे तुरंत बाजार से मंगवा लिया जाता है, लेकिन शनि के वक्री होने पर इस आदत से बचना होगा। धार्मिक ग्रंथों में निहित है कि शनि की उल्टी चाल के दौरान नमक खरीदने से घर का वास्तु और चक्र प्रभावित होता है, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच बेवजह की बहस, गलतफहमियां और मानसिक तनाव का माहौल बनने लगता है। यही कारण है कि ज्योतिष के जानकार 27 जुलाई से पहले ही घर की जरूरत का नमक लाकर स्टॉक कर लेने की सलाह दे रहे हैं।
काले कपड़े, चमड़ा और उड़द की दाल खड़ी करेगी करियर में रुकावटें
इन चीजों के अलावा, शनिवार और शनि वक्री के दौरान काले रंग के वस्त्र और चमड़े (लेदर) से बने सामान जैसे बेल्ट, जूते या पर्स खरीदने पर भी सख्त मनाही होती है।
माना जाता है कि ऐसा करने से बनते हुए काम बिगड़ने लगते हैं और नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर राजनीति का शिकार होना पड़ता है। वहीं, शनि देव की प्रिय पूजा सामग्री माने जाने वाले काले तिल और साबुत उड़द को भी इस समयावधि में दुकान से मोल लाना उचित नहीं माना जाता। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, वक्री अवधि में इन चीजों का क्रय करने से व्यापार में अप्रत्याशित मंदी आ सकती है और नौकरी में तरक्की के रास्ते बंद हो सकते हैं।
यह भी पढ़ें– Chandra Gochar 2026: शनि के घर में चंद्र देव का प्रवेश, 1 जुलाई से इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत


