Gold Silver Price Today: दिवाली से पहले सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच सर्राफा बाजार में गिरावट दर्ज की जा रही है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, सोमवार को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत ₹2,282 घटकर करीब ₹1.38 लाख पर आ गई। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत ₹1,264 कम होकर ₹1.80 लाख रह गई। इससे पहले शुक्रवार को सोना करीब ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹1.81 लाख प्रति किलो के स्तर पर बिक रही थी। दिवाली के दौरान सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए कीमतों में यह गिरावट अहम है। हालांकि, ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज, GST और स्थानीय बाजार के रेट के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।
अक्टूबर 2026 में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के दौरान सोना ₹8,084 और चांदी ₹39,485 सस्ती हुई। 1 अक्टूबर 2026 को 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.48 लाख थी, जबकि एक किलो चांदी का भाव करीब ₹2.20 लाख था। इसके बाद महीने के दौरान दोनों की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिली। सोना और चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली गतिविधियों से भी प्रभावित होते हैं। डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड, निवेशकों की खरीद-बिक्री और औद्योगिक मांग जैसे कारक घरेलू सर्राफा बाजार की कीमतों पर असर डालते हैं।
सोना सस्ता होने के पीछे क्या हैं 3 बड़ी वजहें?
सोने की कीमतों में गिरावट की एक वजह ऊंचे भाव पर बड़े निवेशकों की बिकवाली बताई जा रही है। त्योहारों से पहले सोने की कीमत काफी ऊपर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए बिकवाली शुरू की। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड मजबूत होने का भी सोने की कीमतों पर असर पड़ा। डॉलर की मजबूती के बीच वैश्विक बाजार में सोने पर दबाव देखने को मिला। इसके अलावा ऊंची कीमतों को देखकर आम खरीदारों ने भी खरीदारी कम की। मांग कमजोर पड़ने और बाजार में बिकवाली बढ़ने से कीमतों में गिरावट आई।
चांदी का इस्तेमाल ज्वेलरी के अलावा सोलर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों में भी बड़े स्तर पर होता है। इन क्षेत्रों से मांग कम होने का असर चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है। बाजार में बड़े ट्रेडर्स की बिकवाली भी कीमतों में गिरावट का एक कारण बताई जा रही है। शेयर और वायदा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच हुई बिकवाली से चांदी के भाव पर दबाव बढ़ा। सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा कई बार एक जैसी भी रहती है। सोने में गिरावट के बाद चांदी में बिकवाली बढ़ने से इसके भाव में भी तेजी से कमी आई।
ऑल टाइम हाई से ₹2.06 लाख सस्ती हो चुकी है चांदी
इस साल सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 को चांदी का भाव करीब ₹2.30 लाख प्रति किलो था। इसके बाद 29 जनवरी को चांदी करीब ₹3.86 लाख प्रति किलो के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। उस स्तर से मौजूदा कीमत तक चांदी करीब ₹2.06 लाख सस्ती हो चुकी है। वहीं, 31 दिसंबर 2025 को सोने का भाव करीब ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम था। 29 जनवरी को यह बढ़कर ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। मौजूदा भाव के हिसाब से सोना उस रिकॉर्ड स्तर से करीब ₹38 हजार प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है। लगातार उतार-चढ़ाव के कारण निवेश और ज्वेलरी खरीदारी करने वालों के लिए कीमतों पर नजर रखना जरूरी है।
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के अनुसार, सोने और चांदी की खरीदारी एक ही बार में पूरी करने के बजाय किश्तों में करना बेहतर हो सकता है। उन्होंने कुछ खरीदारी अभी और बाकी रकम से 15 से 20 दिन के अंतराल पर खरीद करने की बात कही है। उनके मुताबिक, निवेश के लिए केवल एक-दो महीने की अवधि के बजाय 6 महीने से एक साल के नजरिए से खरीदारी पर विचार करना चाहिए। बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहने की स्थिति में चरणबद्ध खरीदारी जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
अलग-अलग शहरों में सोने के रेट क्यों बदलते हैं?
देश के अलग-अलग शहरों में सोने की कीमत एक जैसी नहीं होती। एक प्रमुख कारण ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी पर आने वाला खर्च है। एक शहर से दूसरे शहर सोना पहुंचाने की लागत के कारण स्थानीय कीमतों में अंतर आ सकता है। स्थानीय मांग और खरीदारी की मात्रा भी रेट को प्रभावित करती है। दक्षिण भारत में सोने की खपत काफी अधिक होने के बावजूद स्थानीय बाजार की स्थितियां अंतिम कीमत तय करने में भूमिका निभाती हैं। राज्य और शहर स्तर की ज्वेलरी एसोसिएशन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर बाजार के रेट को प्रभावित करती हैं। इसके अलावा ज्वेलर्स ने पुराना स्टॉक किस कीमत पर खरीदा था, इसका असर भी ग्राहकों को मिलने वाली कीमत पर पड़ सकता है।
सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड खरीदना चाहिए। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट से जुड़ी जानकारी की पुष्टि करने में मदद मिलती है। खरीदारी के दिन सोने की कीमत और वजन को अलग-अलग विश्वसनीय स्रोतों से क्रॉस चेक करना भी जरूरी है। 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के रेट अलग-अलग होते हैं।
चांदी की शुरुआती पहचान के लिए मैग्नेट टेस्ट किया जा सकता है। सामान्य तौर पर शुद्ध चांदी चुंबक से नहीं चिपकती, लेकिन केवल इस टेस्ट के आधार पर अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। आइस टेस्ट और स्मेल टेस्ट जैसे घरेलू तरीके भी इस्तेमाल किए जाते हैं। सफेद कपड़े से रगड़ने पर निशान आने जैसे परीक्षणों के बजाय कीमती चांदी की खरीदारी करते समय शुद्धता की प्रमाणित जांच और विश्वसनीय विक्रेता को प्राथमिकता देना अधिक सुरक्षित रहता है।
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