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Shefali Verma Rohtak: रोहतक की बेटी का लॉर्ड्स में धमाका, भारत की ऐतिहासिक जीत में चमकीं शेफाली वर्मा

Shefali Verma Rohtak: रोहतक की बेटी का लॉर्ड्स में धमाका, भारत की ऐतिहासिक जीत में चमकीं शेफाली वर्मा

बाल कटवाकर लड़कों संग खेला क्रिकेट, आज लॉर्ड्स में इंग्लैंड को चटाया धूल

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AAmandeep Singh

Shefali Verma Rohtak: क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले इंग्लैंड के ऐतिहासिक लॉर्ड्स ग्राउंड पर भारतीय महिला टीम ने टेस्ट मैच जीतकर एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। इस अविस्मरणीय जीत में हरियाणा के रोहतक की रहने वाली स्टार सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से अहम भूमिका निभाई।

अपनी बेबाक और ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के दम पर शेफाली आज विश्व क्रिकेट में भारतीय महिला टीम का सबसे मजबूत चेहरा बन चुकी हैं। हालांकि, लॉर्ड्स के मैदान पर मिली इस सफलता की जड़ें रोहतक की उन गलियों में छिपी हैं, जहां उनके पिता संजय वर्मा ने अपनी बेटी के सपने को सच करने के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया था।

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संजय वर्मा खुद एक बेहतरीन क्रिकेटर थे, लेकिन वक्त और हालात के चलते वे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच सके। जब उन्होंने अपनी नन्हीं बेटी शेफाली में क्रिकेट का वही जुनून देखा, तो उन्होंने अपना अधूरा सपना बेटी के जरिए पूरा करने का अटूट संकल्प ले लिया। महज 9 साल की उम्र से ही उन्होंने शेफाली को बल्ला थमाकर कड़ा अभ्यास कराना शुरू कर दिया था।

जब एकेडमी ने मना किया, तो बाल कटवाकर लड़कों के बीच उतारा मैदान में

शेफाली का शुरुआती सफर कांटों भरा रहा। जब उनके पिता उन्हें प्रोफेशनल ट्रेनिंग के लिए रोहतक की एक क्रिकेट एकेडमी लेकर पहुंचे, तो वहां एक भी लड़की खिलाड़ी नहीं थी। कोच ने साफ कह दिया कि लड़कियों के लिए यह खेल ठीक नहीं है और उन्हें कोई दूसरा खेल चुनने की सलाह दे डाली। लेकिन संजय वर्मा पीछे हटने वालों में से नहीं थे। उन्होंने एक बड़ा और निडर फैसला लिया—उन्होंने शेफाली के बाल लड़कों की तरह कटवा दिए और उनका दाखिला लड़कों की टीम में करा दिया।

लड़कों की तेजतर्रार गेंदों का सामना करते हुए शेफाली की बल्लेबाजी दिन-ब-दिन निखरती गई। महज 10 साल की उम्र तक आते-आते वे लेदर बॉल से गगनचुंबी छक्के लगाने लगी थीं।

सचिन तेंदुलकर को देखकर बदला नजरिया, रिश्तेदारों के तानों को किया दरकिनार

साल 2013 में जब क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर अपना आखिरी रणजी ट्रॉफी मैच खेलने रोहतक के लाहली स्टेडियम पहुंचे थे, तब नन्हीं शेफाली भी अपने पिता के साथ वह मुकाबला देखने गई थीं। सचिन को मैदान पर खेलता देख शेफाली का जुनून और गहरा हो गया। 12 साल की उम्र में उन्हें आखिरकार महिला क्रिकेट एकेडमी में दाखिला मिला। इस पूरे सफर के दौरान परिवार को रिश्तेदारों और समाज की तीखी आलोचनाएं भी सहनी पड़ीं कि ‘लड़की को क्रिकेट क्यों खिला रहे हो’। लेकिन बाप-बेटी की यह जोड़ी अपने लक्ष्य से टस से मस नहीं हुई।

रोहतक और हरियाणा के घरेलू क्रिकेट में बल्ले से तबाही मचाने के बाद शेफाली ने महज 15 साल की बेहद छोटी उम्र में भारतीय राष्ट्रीय महिला टीम में कदम रखा। वे भारत के लिए डेब्यू करने वाली सबसे युवा खिलाड़ियों की फेहरिस्त में शामिल हैं।

19 की उम्र में बनाए रिकॉर्ड, भारत को बनाया वर्ल्ड चैंपियन

अपनी तूफानी बल्लेबाजी के चलते ‘लेडी सहवाग’ के नाम से मशहूर शेफाली ने 19 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते 51 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 134.53 के शानदार स्ट्राइक रेट से 1231 रन ठोक दिए थे, जिसमें 149 चौके और 48 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे।

इतना ही नहीं, आईसीसी (ICC) के पहले अंडर-19 महिला टी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की कप्तानी करते हुए शेफाली ने देश को विश्व विजेता का खिताब दिलाया। आज वे टेस्ट, वनडे और टी-20 तीनों ही फॉर्मेट में भारतीय टीम की सबसे भरोसेमंद सलामी बल्लेबाज के रूप में देश का नाम रोशन कर रही हैं।

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