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Sirsa News: सिरसा में शहीद सुखचैन सिंह की अंतिम यात्रा रुकी, 1 करोड़ मुआवजे की मांग पर अड़े ग्रामीण

Sirsa News: सिरसा में शहीद सुखचैन सिंह की अंतिम यात्रा रुकी, 1 करोड़ मुआवजे की मांग पर अड़े ग्रामीण

सिरसा में शहीद सुखचैन सिंह की अंतिम यात्रा रुकी, 1 करोड़ मुआवजे की मांग पर अड़े ग्रामीण

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Sirsa News: जम्मू-कश्मीर के राजौरी में देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले हरियाणा के सिरसा जिले के लाल सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह 10 बजे उनके पैतृक गांव कुत्ताबढ़ पहुंचा। लेकिन, गांव के प्रवेश द्वार पर पहुंचते ही माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। प्रशासनिक अधिकारियों की बेरुखी से नाराज ग्रामीणों ने शहीद की अंतिम यात्रा को रोक दिया और नारेबाजी शुरू कर दी।

गांव वालों का साफ कहना है कि शहादत की खबर मिले तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक शासन या प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा पीड़ित परिवार का हाल-चाल जानने नहीं पहुंचा। आक्रोशित ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक राज्य सरकार की ओर से शहीद के परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे अंतिम संस्कार नहीं होने देंगे।

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राजौरी में तैनात थे सुखचैन, परिवार में 5 साल का मासूम

27 सितंबर 2015 को भारतीय सेना में भर्ती हुए सुखचैन सिंह वर्तमान में 59 इंजीनियरिंग रेजीमेंट, राजौरी में अपनी सेवाएं दे रहे थे। बीते गुरुवार सुबह करीब 11 बजे ड्यूटी के दौरान वे शहीद हो गए थे। सुखचैन सिंह अपने पीछे मां अमर कौर, पत्नी निर्मल कौर और 5 साल के छोटे मासूम बेटे को छोड़ गए हैं।

सुखचैन की शादी साल 2020 में हुई थी। बचपन में ही (जब वे महज 7 साल के थे) उनके पिता बलविंद्र सिंह का साया सिर से उठ गया था। बड़े भाई गांव में ही शटरिंग का काम कर किसी तरह परिवार की आजीविका चलाते हैं।

खराब मौसम के कारण देर से पहुंचा पार्थिव शरीर

कुत्ताबढ़ गांव के सरपंच बेअंत सिंह ने बताया कि गुरुवार को शहादत की सूचना मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि शुक्रवार दोपहर तक पार्थिव शरीर गांव पहुंच जाएगा। हालांकि, खराब मौसम और भारी बारिश के चलते यात्रा का मार्ग बदलना पड़ा।

राजौरी से हवाई जहाज से पार्थिव देह को पठानकोट लाया गया, जिसके बाद एम्बुलेंस के जरिए सड़क मार्ग से शुक्रवार रात करीब 11 बजे सिरसा एयरफोर्स स्टेशन पहुंचाया गया था। शनिवार सुबह जब पार्थिव देह गांव पहुंची, तो पूरा गांव भारत माता के जयकारों और आंसुओं के साथ उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ा, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया। फिलहाल सेना के अधिकारी और सिरसा प्रशासन के प्रतिनिधि ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।

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