Sonipat Farmer Protest: सोनीपत के सोहटी गांव में फिर लगा किसानों का पक्का मोर्चा, पावर ग्रिड मुआवजे को लेकर भूख हड़ताल पर अभिमन्यु कुहाड़
सोनीपत के सोहटी गांव में फिर लगा किसानों का पक्का मोर्चा, पावर ग्रिड मुआवजे को लेकर भूख हड़ताल पर अभिमन्यु कुहाड़
Sonipat Farmer Protest: सोनीपत में एक बार फिर किसानों के जमावड़े और नारों की गूंज ने पुराने किसान आंदोलनों के दौर की यादें ताजा कर दी हैं। जिले के सोहटी गांव में पावर ग्रिड लाइन से प्रभावित जमीन के उचित मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। (Abhimanyu Kohar Hunger Strike Sonipat) सड़क पर एक तरफ किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे युवा किसान नेता अभिमन्यु कुहाड़ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।
किसानों का स्पष्ट कहना है कि मुआवजे के मुद्दे पर जिला प्रशासन का रवैया बिल्कुल भी सहयोगात्मक नहीं रहा है। कई दौर की बातचीत के बाद भी जब कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, तो मजबूरी में उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा। अब किसानों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी वाजिब मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो इस आंदोलन का दायरा पूरे प्रदेश और देश में बढ़ाया जाएगा।
नरेला-सीकर पावर ग्रिड लाइन से प्रभावित हैं जमीनें, बातचीत रही बेनतीजा
पूरे विवाद की जड़ नरेला (दिल्ली) से राजस्थान के सीकर तक जाने वाली हाई-टेंशन पावर ग्रिड लाइन (Narela Sikar Power Grid Line Compensation) है। इस परियोजना के लिए सोहटी और आसपास के कई गांवों के किसानों की उपजाऊ जमीनें प्रभावित हो रही हैं। किसानों का आरोप है कि पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन और प्रशासन की ओर से जो मुआवजा दिया जा रहा है, वह बाजार दर की तुलना में बेहद कम है।
अपनी जमीनों के हक के लिए किसान पिछले कई दिनों से मांग उठा रहे थे, लेकिन जब प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया, तो मंगलवार से किसानों ने सोहटी गांव में सड़क पर पक्का मोर्चा लगा दिया। भूख हड़ताल पर बैठे किसान नेता अभिमन्यु कुहाड़ का कहना है कि जब तक प्रभावित किसानों को उनका जायज हक और सम्मानजनक मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है।
धरना स्थल पर दिखा अनोखा रंग: महिलाएं गा रही हैं भजन, तो किसान बना रहे रणनीति
सोहटी गांव में चल रहे इस धरने के दौरान आंदोलन के कई रंग देखने को मिल रहे हैं। (Power Grid Land Acquisition Compensation Haryana) एक तरफ जहां धरने में शामिल बुजुर्ग और महिलाएं भजन-कीर्तन गाकर माहौल को आध्यात्मिक और अनुशासित बनाए हुए हैं, वहीं युवा और अन्य किसान ताश खेलकर या आपस में चर्चा कर समय बिताते नजर आ रहे हैं। लेकिन इन तस्वीरों के पीछे किसानों का आक्रोश साफ झलक रहा है।
किसानों का कहना है कि वे किसी तरह का टकराव नहीं चाहते, केवल अपनी जमीन का उचित दाम मांग रहे हैं। यदि सरकार उनकी बात सुन लेती है, तो वे तुरंत घर लौटने को तैयार हैं, वरना धरना यूं ही जारी रहेगा।
देशव्यापी आंदोलन में तब्दील करने की चेतावनी, आज हो सकता है बड़ा फैसला
किसानों के इस रुख ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। किसान नेताओं का दावा है कि इस मुद्दे को लेकर हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के प्रमुख किसान संगठनों से भी लगातार बातचीत चल रही है।
आंदोलनकारी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि प्रशासन ने जल्द सकारात्मक रुख नहीं दिखाया, तो इस स्थानीय विरोध प्रदर्शन को देशव्यापी किसान आंदोलन में बदल दिया जाएगा। आज धरना स्थल पर होने वाली महापंचायत/बैठक में आगे की भावी रणनीति को लेकर कोई बड़ा और कड़ा फैसला लिया जा सकता है।
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