September 3, 2026

नेपाल की तबाही के बीच तिब्बत में 5 तीव्रता का भूकंप: 10 किमी नीचे था केंद्र

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नेपाल की तबाही के बीच तिब्बत में 5 तीव्रता का भूकंप: 10 किमी नीचे था केंद्र, अब DNA से हो रही शवों की पहचान

नेपाल की तबाही के बीच तिब्बत में 5 तीव्रता का भूकंप

Tibet Earthquake: नेपाल सीमा से करीब 55 किलोमीटर दूर तिब्बत में गुरुवार को 5 तीव्रता का भूकंप आया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के जोशीमठ से करीब 128 किलोमीटर उत्तरपूर्व में था। भूकंप की गहराई जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर नीचे बताई गई है। कम गहराई पर आने वाले भूकंपों में सतह तक भूकंपीय ऊर्जा अपेक्षाकृत कम दूरी तय करके पहुंचती है, इसलिए आबादी वाले इलाकों में इनके झटके ज्यादा महसूस हो सकते हैं और नुकसान की आशंका बढ़ सकती है। हालांकि, इस भूकंप के बाद फिलहाल किसी तरह के नुकसान या लोगों के घायल होने की सूचना सामने नहीं आई है।

एक हफ्ते पहले बाढ़भूस्खलन से मची थी तबाही

तिब्बत में यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब करीब एक सप्ताह पहले नेपाल और तिब्बत में बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई थी। 26 अगस्त को आई इस आपदा के बाद कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोग लापता हुए और राहतबचाव अभियान चलाया गया। अब तक इस आपदा में नेपाल और तिब्बत में कुल 1273 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें नेपाल में 1252 और तिब्बत में 21 लोगों की जान गई है। आपदा के बाद बड़ी चुनौती मृतकों की पहचान की भी है। कई शवों की हालत इतनी खराब है कि उनकी पहचान सामान्य तरीकों से करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे मामलों में DNA जांच के जरिए मृतकों की पहचान की जा रही है।

भारत ने नेपाल भेजी 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम

मृतकों की पहचान में नेपाल की मदद के लिए भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम भेजी है। यह टीम काठमांडू में नेपाल पुलिस और स्थानीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम कर रही है। टीम शवों से DNA सैंपल लेने, उनकी जांच करने और संदिग्ध मृतकों के DNA को उनके परिजनों के DNA से मिलाने में तकनीकी सहायता दे रही है। इससे उन शवों की पहचान करने में मदद मिलती है, जिनकी हालत के कारण चेहरा या अन्य पहचान योग्य निशान सुरक्षित नहीं रह पाए हैं।

DNA जांच से शव की पहचान कैसे होती है?

DNA शरीर में मौजूद एक तरह का जेनेटिक कोड है, जो व्यक्ति को उसके मातापिता से मिलता है। जुड़वां बच्चों को छोड़कर सामान्य तौर पर हर व्यक्ति का DNA प्रोफाइल अलग होता है। फोरेंसिक विशेषज्ञ क्षतिग्रस्त शवों से आमतौर पर हड्डी या दांत जैसे सुरक्षित ऊतक से DNA सैंपल लेते हैं। इसके बाद उस सैंपल की तुलना लापता व्यक्ति के मातापिता, बच्चे या अन्य जैविक परिजन के DNA से की जाती है। अगर DNA प्रोफाइल में पर्याप्त आनुवंशिक समानता मिलती है, तो विशेषज्ञ मृतक की पहचान की पुष्टि कर सकते हैं। आपदा में बुरी तरह क्षतिग्रस्त शवों की पहचान के लिए यह सबसे भरोसेमंद वैज्ञानिक तरीकों में से एक है।

DNA रिपोर्ट आने में कितना समय लगता है?

सामान्य परिस्थितियों में DNA जांच में करीब 1 से 3 सप्ताह लग सकते हैं। हालांकि, किसी बड़ी आपदा के दौरान एक साथ बड़ी संख्या में सैंपल मिलने से प्रक्रिया में ज्यादा समय लग सकता है। कुछ आधुनिक तकनीकों और प्राथमिकता के आधार पर चुनिंदा मामलों में DNA प्रोसेसिंग 24 से 72 घंटे में भी पूरी की जा सकती है। अंतिम पहचान के लिए सैंपल की गुणवत्ता, उपलब्ध परिजन के DNA और प्रयोगशाला की क्षमता जैसे कई कारक जिम्मेदार होते हैं। नेपाल में जारी पहचान प्रक्रिया इसलिए भी अहम है क्योंकि मृतकों के परिवारों को आधिकारिक पुष्टि मिलने के बाद ही अंतिम संस्कार और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

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