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Unique Farewell Viral: चपरासी की ऐसी विदाई कभी नहीं देखी होगी! रिटायरमेंट पर 100 फीट ऊंची क्रेन पर चढ़कर गांव पहुंचे महाबीर

Unique Farewell Viral: चपरासी की ऐसी विदाई कभी नहीं देखी होगी! रिटायरमेंट पर 100 फीट ऊंची क्रेन पर चढ़कर गांव पहुंचे महाबीर

फूड एंड सप्लाई विभाग के सेवादार ने रचा इतिहास, विदाई पर क्रेन को फूलों से सजाकर पहुंचे गांव

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AAmandeep Singh

Unique Farewell Viral: सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद अमूमन लोग दफ्तर की गाड़ी, अपनी कार या बहुत हुआ तो फूलों से सजे रथ पर बैठकर घर लौटते हैं। लेकिन हरियाणा के पानीपत में एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने अपनी विदाई को ऐसा फिल्मी और भव्य अंदाज दिया कि देखने वालों की आंखें फटी की फटी रह गईं।

फूड एंड सप्लाई विभाग में पिछले 23 वर्षों से सेवादार (चपरासी) के पद पर तैनात 58 वर्षीय महाबीर बांगड़ ने अपनी सेवानिवृत्ति के दिन कुछ ऐसा करने की ठानी जो मिसाल बन जाए। महाबीर 30 जून को अपनी विदाई के बाद किसी पालकी या गाड़ी में नहीं, बल्कि सीधे 100 फीट ऊंची हाइड्रा क्रेन के बूम (अगले हिस्से) पर सवार होकर अपने गांव के लिए रवाना हुए। रास्ते भर क्रेन पर खड़े होकर नाचते गाते महाबीर को देखने के लिए सड़कों के दोनों ओर लोगों का तांता लग गया।

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बरसों पुराना सपना, जून की शुरुआत से ही जुटी थी पूरी फैमिली

महाबीर के बेटे अमित ने बताया कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। उनके पिता ने बरसों पहले ही यह मन बना लिया था कि जब वह सेवामुक्त होंगे, तो उनकी विदाई दुनिया से बिल्कुल जुदा होगी। महाबीर अक्सर कहते थे कि जीवन में रिटायरमेंट का दिन सिर्फ एक ही बार आता है, इसलिए यह साधारण नहीं होना चाहिए।

जून 2026 की शुरुआत होते ही परिवार और रिश्तेदारों के बीच गुप्त बैठकों का दौर शुरू हुआ। कई अनोखे आइडियाज पर विचार करने के बाद खुद महाबीर ने हाइड्रा क्रेन का विकल्प चुना। पिता की इस अनोखी जिद के आगे बच्चों ने भी हामी भर दी और विदाई से ठीक 10 दिन पहले एक बड़ी हाइड्रा क्रेन बुक कर ली गई। 29 जून की रात को इस क्रेन को फूलों, मालाओं और चुन्नियों से किसी दुल्हन की तरह सजाया गया और सुरक्षा के मद्देनजर इसकी पूरी टेक्निकल जांच भी कराई गई।

लघु सचिवालय से गांव ‘कवि’ तक का वो यादगार सफर

30 जून को विदाई की घड़ी आई। महाबीर बांगड़ को पहले मतलौडा तहसील और फिर पानीपत के जिला लघु सचिवालय में अधिकारियों और उनके साथी कर्मचारियों ने नम आंखों से भावभीनी विदाई दी। स्मृति चिन्ह और मिठाई खाने के बाद जैसे ही महाबीर दफ्तर से बाहर निकले, वहां खड़ी सजी-धजी क्रेन को देखकर बड़े-बड़े अधिकारी भी हैरान रह गए।

महाबीर क्रेन के बूम पर सवार हुए और मतलौडा से अपने गांव ‘कवि’ (जो शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा का पैतृक गांव भी है) के लिए रवाना हुए। मतलौडा से गांव की दूरी महज 5 किलोमीटर है, जो आम तौर पर गाड़ियों से 10 मिनट में पूरी हो जाती है। लेकिन क्रेन की धीमी रफ्तार, डीजे की धुन पर नाचते रिश्तेदारों और रास्ते में फोटो-वीडियो खींचती भीड़ के चलते इस दूरी को तय करने में 50 मिनट लग गए। काफिले में थार और चमचमाती काली स्कॉर्पियो गाड़ियों की कतार लगी हुई थी।

घर पर पत्नी ने उतारी आरती, अमेरिका तक फैली चर्चा

जैसे ही क्रेन महाबीर को लेकर उनके घर के आंगन तक पहुंची, गांव में उत्सव का माहौल हो गया। क्रेन से उतरते ही महाबीर की पत्नी शीला देवी ने पारंपरिक तरीके से उनकी आरती उतारी, तिलक लगाया और ग्रामीणों ने उन पर फूलों की बारिश कर गृह प्रवेश कराया। आपको बता दें कि सेवादार के पद से रिटायर हुए महाबीर का परिवार काफी समृद्ध है।

उनके दो बेटे और एक बेटी है, जिनमें से उनका बड़ा बेटा चानू अमेरिका (USA) में रहता है। महाबीर की इस ‘शाही’ विदाई के वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि पद चाहे चपरासी का हो, लेकिन महाबीर ने विदाई किसी राजा-महाराजा जैसी ली है।

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