Yamunanagar news: यमुनानगर के नाहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक नवजात बच्ची को जन्म देने के कुछ ही घंटों बाद 25 वर्षीय प्रसूता की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए अब एक मेडिकल बोर्ड के माध्यम से गहन जांच कराने का फैसला किया है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रसव के दौरान महिला की हालत बिगड़ने के पीछे असल वजह क्या थी, उसे समय पर उचित चिकित्सा सहायता मिल पाई थी या नहीं, और क्या अस्पताल स्तर पर किसी तरह की लापरवाही बरती गई थी।
रेफरल पर्ची पर दर्ज ब्यौरों ने खड़े किए गंभीर सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद से अस्पताल से जारी की गई रेफरल पर्ची चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जिसमें दर्ज विवरण कई बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। पर्ची के मुताबिक, प्रसव के तुरंत बाद महिला की हालत ‘अच्छी’ दर्शाई गई है, जबकि उसी पर्ची में उसका हीमोग्लोबिन स्तर महज 6 ग्राम लिखा हुआ है, जो गंभीर एनीमिया की ओर इशारा करता है। इसके अलावा, पर्ची में उस दौरान डॉक्टर के ड्यूटी पर मौजूद न होने से जुड़ी टिप्पणी भी दर्ज है। अब जांच टीम इन सभी विरोधाभासी बिंदुओं की कड़ियां जोड़कर यह स्पष्ट करने की कोशिश करेगी कि जब स्थिति गंभीर थी, तो अस्पताल प्रबंधन ने क्या कदम उठाए।
बच्ची के जन्म के 36 मिनट बाद सिविल अस्पताल किया गया था रेफर
दौलतपुर गांव की रहने वाली 25 वर्षीय मुन्नी देवी को शुक्रवार, 9 अक्टूबर की तड़के करीब 4:50 बजे प्रसव पीड़ा के बाद नाहरपुर सीएचसी में भर्ती कराया गया था। यहां सुबह 5:04 बजे उन्होंने 2.4 किलोग्राम वजन की स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। हालांकि, इसके तुरंत बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें यमुनानगर के सिविल अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। रेफरल पर्ची पर सुबह 5:40 बजे का समय दर्ज है, यानी प्रसव के महज 36 मिनट बाद यह फैसला लिया गया। सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान ही शुक्रवार शाम करीब आठ बजे मुन्नी देवी ने दम तोड़ दिया।
जांच के दायरे में होंगी ये अहम प्रक्रियाएं और दस्तावेज
स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित बोर्ड इस मामले में भर्ती के समय से लेकर रेफर करने की पूरी प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा करेगा। जांच के दायरे में प्रसव के बाद की स्थिति, हीमोग्लोबिन जांच रिपोर्ट, ड्यूटी रोस्टर, केस शीट और यमुनानगर सिविल अस्पताल में दिए गए उपचार का पूरा रिकॉर्ड शामिल होगा। विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज के दौरान चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हुआ था या इसमें किसी स्तर पर चूक हुई।
यह भी पढ़ें– मां भद्रकाली मंदिर में अर्पित की गई 2.25 किलो चांदी की गोल्ड प्लेटेड पोशाक

