Zirakpur Crime News: मोहाली जिले के जीरकपुर में रामगढ़ भूड्डा इलाके के एक रिहायशी मकान में कथित तौर पर अवैध रूप से चलाई जा रही दवा फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ है। एंटी नारकोटिक्स सेल और फूड एंड ड्रग विभाग की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर भारी मात्रा में स्टेरॉयड, प्रतिबंधित दवाएं और नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाली दवाएं जब्त की हैं। कार्रवाई के दौरान मौके से एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है। अब पुलिस और संबंधित विभाग इस कथित अवैध कारोबार के मुख्य संचालक, सप्लाई नेटवर्क और दवाओं की पहुंच से जुड़े लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि रिहायशी इलाके में किराये का मकान लेकर यह कथित फैक्ट्री चलाई जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार, इसके संचालन के लिए किसी सरकारी अनुमति या वैध लाइसेंस के होने की जांच की जा रही है। रिहायशी इलाके में इस तरह की गतिविधि सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी कई सवाल खड़े हुए हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस मकान को किसने किराये पर लिया था और वहां यह काम कब से चल रहा था। प्राथमिक पड़ताल में यह भी सामने आया है कि यहां तैयार की जा रही प्रतिबंधित दवाओं और स्टेरॉयड को कथित तौर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सप्लाई किया जाता था। हालांकि, पुलिस और विभाग अब इस ऑनलाइन नेटवर्क के पूरे संचालन की जांच कर रहे हैं।
भारी मात्रा में स्टेरॉयड और प्रतिबंधित दवाएं जब्त
संयुक्त टीम ने छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में दवाएं बरामद की हैं। इनमें स्टेरॉयड, प्रतिबंधित दवाएं और नशे के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं शामिल बताई गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की जांच और उसके स्रोतों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि दवाओं को तैयार करने में किन पदार्थों और कच्चे माल का इस्तेमाल किया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए गिरफ्तार कर्मचारी से गहन पूछताछ की जा रही है। एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ से फैक्ट्री चलाने वाले लोगों और कथित सप्लाई नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी मिल सकती है।
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल इस कथित अवैध कारोबार के मुख्य संचालक तक पहुंचने का है। पुलिस यह पता कर रही है कि पूरी गतिविधि का संचालन कौन कर रहा था और मौके से गिरफ्तार कर्मचारी की इसमें क्या भूमिका थी। जांच का दूसरा अहम पहलू दवाएं तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल से जुड़ा है। अधिकारी यह जानकारी जुटा रहे हैं कि रॉ मैटेरियल कहां से मंगवाया जाता था और इसे किस माध्यम से जीरकपुर तक पहुंचाया जाता था। इसके अलावा, जांच एजेंसियां कथित तौर पर तैयार की गई प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई चेन भी खंगाल रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि इन्हें पंजाब तक सीमित रखा गया था या अन्य राज्यों और इलाकों में भी भेजा जाता था।
ऑनलाइन सप्लाई नेटवर्क की भी जांच
शुरुआती जांच में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कथित सप्लाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब जांच एजेंसियां उन डिजिटल और ऑनलाइन माध्यमों की पड़ताल कर रही हैं, जिनका इस्तेमाल दवाओं को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए किया जाता था। यदि जांच में व्यापक सप्लाई नेटवर्क की पुष्टि होती है तो इससे जुड़े अन्य लोगों तक कार्रवाई पहुंच सकती है। पुलिस और ड्रग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है और आने वाले दिनों में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी सामने आने की संभावना है। जीरकपुर और मोहाली क्षेत्र में इस कार्रवाई को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि रिहायशी मकान से कथित तौर पर प्रतिबंधित और नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की गतिविधि सामने आई है। अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि इस नेटवर्क का आकार कितना बड़ा था और इसके तार किन-किन इलाकों तक जुड़े थे।
फिलहाल, एक कर्मचारी को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। पुलिस और फूड एंड ड्रग विभाग संयुक्त रूप से मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का फोकस अब कथित मास्टरमाइंड की पहचान, किराये के मकान के दस्तावेज, कच्चे माल के स्रोत और तैयार दवाओं के खरीदारों व सप्लाई नेटवर्क पर है। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
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