Thought of the Day: जानिए क्यों ‘अहंकार’ को माना गया है ज्ञान का सबसे बड़ा शत्रु

'अहंकार' को माना गया है ज्ञान का सबसे बड़ा शत्रु
Thought of the Day: मानव सभ्यता का इतिहास इस बात का साक्षी रहा है कि ज्ञान ने हमेशा समाज को अंधकार से उजाले की ओर ढकेला है। लेकिन उसी ज्ञान के मार्ग में यदि कोई सबसे बड़ा रोड़ा बनकर खड़ा होता है, तो वह मनुष्य का अपना ‘अहंकार’ है। जब किसी व्यक्ति के भीतर यह भाव घर कर जाता है कि वह सब कुछ जानता है, तो ठीक उसी क्षण से उसका बौद्धिक विकास थम जाता है।
सीखने के प्रवाह को रोकता है अहम् का भाव
अहंकार वस्तुतः ज्ञान का वो विरोधी तत्त्व है, जो व्यक्ति की दृष्टि को धुंधला कर देता है। ज्ञानी होने का भ्रम, वास्तविक ज्ञानी होने से कहीं अधिक खतरनाक माना गया है। जब तक मन में यह स्वीकारोक्ति नहीं होगी कि “मुझे अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है”, तब तक नया ज्ञान ग्रहण करना असंभव है। एक भरा हुआ पात्र जिस प्रकार और जल समाहित नहीं कर सकता, ठीक उसी तरह अहंकार से भरा मस्तिष्क नए विचारों को स्वीकार नहीं कर पाता।
आज का विचार: अहंकार ज्ञान का सबसे बड़ा शत्रु है
विनम्रता ही सच्चे ज्ञान की पहचान
भारतीय दर्शन और दुनियाभर के महान चिंतकों ने सदैव इस बात पर जोर दिया है कि विद्या ददाति विनयं—अर्थात सच्चा ज्ञान मनुष्य को विनम्र बनाता है। इतिहास उठाकर देखें तो वही विद्वान कालजयी बने, जिन्होंने अपने ज्ञान पर कभी घमंड नहीं किया। अहंकार व्यक्ति को आत्ममुग्धता की ओर ले जाता है, जहां वह अपनी त्रुटियों को देखने और सुधारने की क्षमता खो बैठता है।
दैनिक जीवन में इस विचार की प्रासंगिकता
आज की आपाधापी और प्रतिस्पर्धी दौर में यह विचार और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। चाहे कार्यस्थल हो, व्यक्तिगत संबंध हों या सामाजिक जीवन, अहंकार न केवल ज्ञान के अर्जन में बाधा बनता है बल्कि बने-बनाये संबंधों और विवेकपूर्ण निर्णयों को भी नष्ट कर देता है। जीवन में निरंतर प्रगति के लिए आवश्यक है कि हम अपने ज्ञान का संचय तो करें, परंतु उसके साथ आने वाले अहंकार के प्रति सदैव सतर्क रहें।
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