Yamunanagar News: कुछ घंटों की बारिश में डूब गया यमुनानगर! यमुनानगर-जगाधरी में सड़कों पर लबालब पानी, वाहन चालक परेशान

कुछ घंटों की बारिश में डूब गया यमुनानगर! यमुनानगर-जगाधरी में सड़कों पर लबालब पानी
Yamunanagar News: हर साल मानसून के आगमन से पहले नगर निगम और जिला प्रशासन नालों की सफाई व जल निकासी के पुख्ता इंतजामों के लंबे-चौड़े दावे करता है, लेकिन मंगलवार को हुई मूसलाधार बारिश ने इन तमाम दावों का सच सामने ला दिया। महज कुछ घंटों की बारिश ने यमुनानगर और जगाधरी को मानो टापू में तब्दील कर दिया। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी गलियों तक में कई-कई फीट पानी भर गया। आलम यह रहा कि सड़कें और नाले एक समान नजर आने लगे, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए हर कदम पर हादसे का खतरा मंडराता रहा।
अस्पताल जलमग्न, जगाधरी में दीवार ढहने से टला बड़ा हादसा
बारिश का सितम सिर्फ रिहाइशी इलाकों तक सीमित नहीं रहा। सढौरा स्थित सरकारी अस्पताल के परिसर और कमरों के भीतर तक पानी भर गया। इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों को इस दुर्व्यवहार और बदइंतजामी के बीच बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उधर, जगाधरी के ऐतिहासिक राजा साहब महल के पास एक पुरानी दीवार भरभरा कर गिर गई। गनीमत यह रही कि वहां मौजूद तीन लोग ऐन वक्त पर हट गए और एक बड़ा हादसा होने से टल गया।
घंटों सड़क पर बंद होती रहीं गाड़ियां, पानी निकालने में जुटे रहे लोग
शहर के शादीपुर आईटीआई, कन्हैया साहिब चौक, हाइडल कॉलोनी और कमानी चौक जैसे प्रमुख इलाकों में जलभराव की विकराल तस्वीर देखने को मिली। सड़कों पर लबालब भरे पानी के चलते दर्जनों दोपहिया वाहन पानी के नीचे छिपे गड्ढों में फंसकर बंद हो गए। निचले इलाकों की हालत सबसे ज्यादा बदतर रही, जहां नालों का गंदा पानी लोगों के ड्राइंग रूम और रसोई तक में दाखिल हो गया। सुबह से ही लोग अपने-अपने घरों से बाल्टियों और डिब्बों के सहारे पानी बाहर फेंकते नजर आए।
ग्रामीण अंचल में भी आफत, आक्रोशित जनता ने प्रशासन को घेरा
आफत की यह बारिश केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। छछरौली, रादौर और सढौरा के ग्रामीण इलाकों से भी जलभराव की खबरें लगातार आती रहीं। कई गांवों में गलियां लबालब हो गईं और खेतों व मकानों के आसपास पानी भर गया। लगातार हर साल दोहराई जाने वाली इस समस्या से नाराज स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब तक प्री-मानसून नालों की तली झाड़कर सफाई नहीं होगी, तब तक राहत मिलना मुमकिन नहीं है। लोगों ने सवाल उठाया कि जब हर साल बजट खर्च होता है, तो पहली ही बारिश में शहर नारकीय स्थिति में क्यों पहुंच जाता है?
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