Sonipat News: सोनीपत में सफाई कर्मचारियों का अनोखा प्रदर्शन, भेड़ों पर मंत्रियों के पोस्टर लगा निकाली बारात

सोनीपत में सफाई कर्मचारियों का अनोखा प्रदर्शन, भेड़ों पर मंत्रियों के पोस्टर लगा निकाली बारात
Sonipat News: हरियाणा में सफाई कर्मचारियों और सरकार के बीच तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। सोनीपत की सड़कों पर बुधवार को उस वक्त लोग ठिठक कर देखने लगे, जब सफाई कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने दो भेड़ों पर हरियाणा सरकार के मंत्रियों—विपुल गोयल और कृष्ण बेदी के पोस्टर टांगे और उन्हें रस्सियों से बांधकर शहर में घुमाया। ढोल-बाजे की धुन पर निकली इस प्रतीकात्मक ‘मंत्रियों की बारात’ ने सरकार के खिलाफ कर्मचारियों के गुस्से को साफ जाहिर कर दिया।
‘सहमति के बाद भी वादे से मुकर रही सरकार’
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कर्मचारी नेता भारत खंडेरा ने बताया कि प्रदेश भर में सफाई कर्मी बीते 6 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। आंदोलन को 14 दिन बीत जाने के बावजूद सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों के साथ कई दौर की वार्ताओं में मांगों पर सहमति बन चुकी थी, लेकिन अब सरकार अपने ही फैसलों से पीछे हट रही है और आधिकारिक पत्र जारी करने में आनाकानी कर रही है।
पक्की नौकरी और ठेका प्रथा के खात्मे की आर-पार की लड़ाई
सफाई कर्मियों का कहना है कि वे वर्षों से शहर की गंदगी उठाकर लोगों को बीमारियों से बचाते हैं, लेकिन सरकार उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में कच्चे कर्मचारियों को तुरंत पक्का करना, ठेकेदारी प्रथा को जड़ से समाप्त करना और ‘समान काम के लिए समान वेतन’ लागू करना शामिल है। चेतावनी दी गई है कि अगर लिखित आदेश जारी नहीं किए गए, तो आंदोलन का दायरा और बढ़ाया जाएगा।
540 करोड़ के बजट और नगर निगम पर दागे भ्रष्टाचार के तीर
विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सोनीपत नगर निगम के कामकाज पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि शहर के विकास और बुनियादी सुविधाओं के नाम पर आया 540 करोड़ रुपये का बजट कहां चला गया, इसका किसी को पता नहीं है।
थोड़ी सी बारिश होते ही पूरा शहर जलमग्न हो जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों और चहेतों को टेंडर बांटकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि सड़कों पर पसीना बहाने वाले मूल कर्मचारियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
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