Rohtak News: रोहतक के पूर्व रेसलर का शर्मनाक कारनामा, अखाड़ों में स्टैमिना बढ़ाने के नाम पर सप्लाई कर रहा था अफीम

रोहतक के पूर्व रेसलर का शर्मनाक कारनामा, अखाड़ों में स्टैमिना बढ़ाने के नाम पर सप्लाई कर रहा था अफीम
Rohtak News: खेल की दुनिया से अपराध के दलदल में उतरे एक पूर्व नेशनल पहलवान का चौंकाने वाला कारनामा सामने आया है। रोहतक के 31 वर्षीय पूर्व रेसलर अमित श्योराण को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। 2013 में देश के लिए मेडल जीतने वाला यह पहलवान दिल्ली और हरियाणा के नामी अखाड़ों में अफीम का नेटवर्क चला रहा था। कोर्ट द्वारा भगोड़ा घोषित किए जा चुके अमित के खिलाफ एनडीपीएस, हत्या और धोखाधड़ी जैसे 6 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।
पीतमपुरा में रिश्तेदार से मिलने आया था आरोपी, मेट्रो स्टेशन पर दबोचा
क्राइम ब्रांच को पुख्ता सूचना मिली थी कि लंबे समय से फरार चल रहा अमित श्योराण रानीबाग-पीतमपुरा इलाके में अपने किसी रिश्तेदार से मिलने आ रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने मधुबन चौक मेट्रो स्टेशन के पास घेराबंदी की। जैसे ही अमित वहां पहुंचा, मुस्तैद पुलिसकर्मियों ने उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी की कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दिल्ली पुलिस ने उसे आगे की कार्रवाई के लिए झारखंड पुलिस के हवाले कर दिया है।
अखाड़ों में स्टैमिना बढ़ाने के नाम पर अफीम का खेल
पुलिस पूछताछ में अमित ने जो खुलासे किए हैं, वे खेल जगत और अखाड़ों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। अमित ने बताया कि रोहतक और दिल्ली के कई चर्चित अखाड़ों में ट्रेनिंग करने वाले पहलवान अपनी शारीरिक क्षमता (स्टैमिना) और प्रैक्टिस का समय बढ़ाने के लिए अफीम का सेवन करते हैं। इसी मांग को देखते हुए उसने अखाड़ों को अपना मुख्य बाजार बनाया। झारखंड के रांची से अफीम लाकर वह दिल्ली-हरियाणा के पहलवानों को सप्लाई करता था। इस नेटवर्क से जुड़े एक बड़े तस्कर राजेश नाग को पुलिस पहले ही 492 ग्राम अफीम के साथ गिरफ्तार कर चुकी है।
मेडल से बाउंसर की नौकरी और फिर अफीम तस्करी तक का सफर
1994 में रोहतक के साधारण परिवार में जन्मे अमित ने 2008 में कुश्ती की शुरुआत की थी। मेहनत रंग लाई और उसने 2013 में कन्याकुमारी में आयोजित नेशनल कैडेट रेसलिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता। हालांकि, मेडल जीतने के बावजूद जब रेलवे में सरकारी नौकरी पाने का उसका सपना अधूरा रह गया, तो उसका रुख बदल गया।
उसने दिल्ली के बार और नाइट क्लबों में बाउंसर की नौकरी शुरू कर दी। वहीं उसकी मुलाकात रंजीत नाम के व्यक्ति से हुई, जिसने उसे रांची के ड्रग तस्करों से मिलवा दिया। ज्यादा पैसा कमाने की हवस में नेशनल मेडलिस्ट देखते ही देखते अंतर्राज्यीय नशा तस्कर बन बैठा।
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