सुखना लेक कैचमेंट में नए निर्माण पर रोक: प्रशासन ने तोड़ीं चारदीवारियां, हाईकोर्ट में 10 सितंबर को सुनवाई

चंडीगढ़ प्रशासन ने फार्म हाउस की दीवारें और स्ट्रक्चर हटाए
Sukhna Lake Catchment: चंडीगढ़ के सुखना लेक कैचमेंट एरिया में निर्माण को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। कैम्बवाला क्षेत्र में खेती योग्य जमीन पर फार्म हाउस बनाने के लिए खड़ी की गई चारदीवारियां तोड़ी गईं। इसके अलावा लोहे के स्ट्रक्चर हटाए गए और जहां निर्माण के लिए नींव भरी गई थी, उसे भी कार्रवाई के दौरान हटाया गया।
इस कार्रवाई में कुछ रिटायर्ड IAS और PCS अधिकारियों की जमीनों पर बनी चारदीवारियां और अन्य निर्माण भी शामिल रहे। सुखना का कैचमेंट क्षेत्र इसलिए संवेदनशील है क्योंकि बारिश के दौरान इसी इलाके से पानी प्राकृतिक रास्तों से होकर झील तक पहुंचता है। निर्माण से जलप्रवाह प्रभावित होने पर इसका सीधा असर सुखना लेक के जलस्तर और पूरे इकोसिस्टम पर पड़ सकता है।
2012 से कैचमेंट में नए निर्माण पर रोक
सुखना लेक और उसके कैचमेंट को बचाने का कानूनी मामला करीब डेढ़ दशक से हाईकोर्ट में चल रहा है। 14 मई 2012 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कैचमेंट एरिया में आगे के निर्माण पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद 22 मई 2012 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई। 23 मई 2012 को हाईकोर्ट ने फिर कहा कि 21 मई 2012 के बाद कैचमेंट एरिया में किसी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं है।
इस मामले में 21 सितंबर 2004 का सर्वे ऑफ इंडिया मैप भी अहम रहा है। इसी मैप के आधार पर सुखना लेक कैचमेंट की पहचान और उसकी सीमाओं को लेकर अदालत में सुनवाई होती रही है।
2020 के फैसले में भी नए निर्माण पर रोक
2 मार्च 2020 को हाईकोर्ट ने सुखना लेक कैचमेंट को लेकर अहम फैसला सुनाया था। अदालत ने कैचमेंट क्षेत्र में नए निर्माण पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए थे।
कैचमेंट में मौजूद कई निर्माणों को अनधिकृत मानते हुए उनसे जुड़े मामलों में कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे। अदालत ने सुखना लेक के संरक्षण को केवल झील तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसके आसपास के पूरे प्राकृतिक और पर्यावरणीय तंत्र को इसके साथ जोड़कर देखा।
इसी फैसले में सुखना लेक को कानूनी/ज्यूरिस्टिक पर्सन का दर्जा देने, इसे वेटलैंड घोषित करने और पर्यावरणीय संरक्षण से जुड़े कई निर्देश दिए गए थे। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि झील और उसके कैचमेंट को एक साथ सुरक्षित रखना जरूरी है।
कांसल, कैम्बवाला और सकेतरी भी मामले में शामिल
सुखना कैचमेंट की सुरक्षा का विवाद सिर्फ कैम्बवाला तक सीमित नहीं है। कांसल और सकेतरी भी इस पर्यावरणीय और कानूनी मामले से जुड़े रहे हैं।
पुराने हाईकोर्ट निर्देशों में कांसल, कैम्बवाला और सकेतरी से सुखना लेक की तरफ जाने वाले सीवेज को रोकने के निर्देश भी दिए गए थे। इसका कारण यह है कि कैचमेंट से झील तक पहुंचने वाला पानी और आसपास का प्राकृतिक क्षेत्र सुखना के पूरे पर्यावरणीय तंत्र का हिस्सा है।
कैचमेंट में जमीन का स्वरूप बदलने, निर्माण करने या प्राकृतिक जलप्रवाह को रोकने से बारिश का पानी झील तक पहुंचने में बाधा आ सकती है। इसका असर सिर्फ पर्यावरण पर नहीं, बल्कि सुखना लेक के जलस्तर पर भी पड़ सकता है।
कैचमेंट में निर्माण का असर सुखना लेक पर क्यों पड़ेगा?
सुखना लेक में बारिश के पानी की आपूर्ति उसके कैचमेंट क्षेत्र से होती है। ऐसे में कैचमेंट में बड़े पैमाने पर जमीन को घेरने, निर्माण करने या पानी के प्राकृतिक रास्ते बदलने से झील तक पहुंचने वाले पानी की मात्रा प्रभावित हो सकती है।
जलस्तर में कमी का असर सुखना लेक की बोटिंग और दूसरी गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। साथ ही प्राकृतिक जलनिकासी व्यवस्था में बदलाव से आसपास के इलाके में बारिश के पानी के बहाव की समस्या भी बढ़ सकती है।
यही वजह है कि अदालत कैचमेंट में किसी एक निर्माण को अलग घटना के तौर पर नहीं देख रही है। मामला पूरे क्षेत्र में प्राकृतिक जलप्रवाह, पर्यावरण और झील के संरक्षण से जुड़ा है।
कोर्ट ने पूछा- रोक के बावजूद नई दीवारें कैसे बनीं?
स्थानीय कमिश्नर नितिन कौशल ने कोर्ट के सामने अपनी रिपोर्ट के साथ एक पेन ड्राइव भी पेश की। कोर्ट ने वीडियो देखा तो कैम्बवाला क्षेत्र में निर्माण और कई जगहों पर नई चारदीवारियां दिखाई दीं।
रिपोर्ट में संबंधित खसरा नंबरों पर हुए निर्माण का भी उल्लेख किया गया। वीडियो और रिपोर्ट सामने आने के बाद कोर्ट ने सवाल उठाया कि डिवीजन बेंच की ओर से रोक लगाए जाने के बावजूद अधिकारियों की मौजूदगी में ऐसे निर्माण कैसे होने दिए गए।
अब राजस्व अधिकारियों को हलफनामा दाखिल करके यह बताना होगा कि नई चारदीवारियां किन लोगों ने बनाईं। इससे निर्माण करने वालों की पहचान के साथ यह भी स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि अदालत के आदेशों के बावजूद निर्माण कैसे हुआ।
10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने स्थानीय कमिश्नर की रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए साफ किया कि संबंधित क्षेत्र में पहले दिए गए आदेशों के मुताबिक स्टेटस-को बनाए रखना होगा। किसी भी अनधिकृत निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मामला सुखना लेक कैचमेंट से जुड़े पुराने केस और उससे संबंधित रिव्यू याचिकाओं में चल रहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।
