September 5, 2026

सुखना लेक पर सजा हुनर का बाजार: अब बिचौलियों के बिना पर्यटकों को सीधे अपने हाथों से बनाए उत्पाद बेच रहे कारीगर

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सुखना लेक पर सजा हुनर का बाजार, अब बिचौलियों के बिना पर्यटकों को सीधे अपने हाथों से बनाए उत्पाद बेच रहे कारीगर

सुखना लेक पर सजा हुनर का बाजार

Sukhna Lake: अब सुखना लेक की सैर करने वालों को केवल झील का खूबसूरत नजारा ही नहीं, बल्कि शहर के पारंपरिक कारीगरों का हुनर भी देखने और खरीदने को मिल रहा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय (डीएफओ), लुधियाना ने पर्यटन विभाग, चंडीगढ़ के सहयोग से सुखना लेक पर पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थी कारीगरों के लिए विशेष बाजार उपलब्ध कराया है। शनिवार तक चलने वाली इस पहल में कारीगर अपने हाथों से तैयार उत्पाद सीधे शहरवासियों और पर्यटकों को बेच रहे हैं। इस पहल का सबसे खास पहलू यह है कि कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा। शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल पर सीधे ग्राहकों तक पहुंच मिलने से उन्हें न केवल अपने उत्पादों की बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है, बल्कि नए ग्राहक और भविष्य के बाजार भी मिल रहे हैं।

कार्यक्रम के तहत पीएम विश्वकर्मा योजना के पांच लाभार्थियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और बेचने के लिए समर्पित स्टॉल दिए गए हैं। पर्यटन स्थल पर बड़ी संख्या में पहुंचने वाले लोगों के बीच पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रदर्शित करने से कारीगरों को अपने हुनर की नई पहचान बनाने का अवसर मिल रहा है। एमएसएमई डीएफओ की ओर से कारीगरों को बाजार से सीधे जोड़ने की यह पहल इससे पहले शुरू किए गए ‘वन एयरपोर्ट वन प्रोडक्ट’ जैसे प्रयासों की अगली कड़ी है। शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, चंडीगढ़ पर भी पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों को अपने उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराया गया है।

सुखना लेक पर केवल बिक्री का मंच ही नहीं बनाया गया है, बल्कि स्थानीय छोटे कारोबारियों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए उद्यम पंजीकरण का विशेष स्टॉल भी लगाया गया है। यहां उद्यमियों को पंजीकरण के फायदे बताए जा रहे हैं और मौके पर ही पंजीकरण कराने में सहायता दी जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, बाजार तक सीधी पहुंच छोटे कारीगरों के लिए महज बिक्री का माध्यम नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे पारंपरिक हुनर को नई पीढ़ी और नए ग्राहकों तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

 

पीएम विश्वकर्मा से कारीगरों को हुनर की पहचान

कार्यक्रम का उद्घाटन एमएसएमई डीएफओ के सहायक निदेशक दीपक चेची और प्रतीक कटारिया ने किया। इस पहल का संचालन एमएसएमई मंत्रालय के जेडीसी दानिश अशरफ और एमएसएमई डीएफओ, लुधियाना के संयुक्त निदेशक पंकज झा के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। पर्यटन विभाग के हितेश भारद्वाज और यूटी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम कार्यक्रम के समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रही है। पीएम विश्वकर्मा योजना के जरिए पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, टूलकिट प्रोत्साहन, रियायती ब्याज दर पर ऋण और बाजार उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। योजना का मकसद पारंपरिक हुनर को आर्थिक ताकत देना, कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़ना है।

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