Bhiwani News: भिवानी की शिक्षिका मनीषा मौत मामला, महापंचायत का बड़ा फैसला, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी जाएगी इंसाफ की लड़ाई

भिवानी की शिक्षिका मनीषा मौत मामला, महापंचायत का बड़ा फैसला, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी जाएगी इंसाफ की लड़ाई
Bhiwani News: भिवानी जिले के गांव ढाणी लक्ष्मण की 23 वर्षीय शिक्षिका मनीषा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला एक बार फिर गरमा गया है। बीते एक साल से न्याय की गुहार लगा रहे पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने अब इस लड़ाई को देश की सबसे बड़ी अदालत तक ले जाने का मन बना लिया है। गांव स्थित धर्मदास आश्रम में आयोजित एक बड़ी पंचायत में मृतका के पिता संजय और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने हुंकार भरते हुए कहा कि वे सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं और इंसाफ मिलने तक अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
सीबीआई कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल, 22 तारीख पर टिकी निगाहें
पंचायत में जानकारी देते हुए भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान मेवा सिंह आर्य और कमेटी के सदस्यों ने बताया कि गत 7 सितंबर को गांव के 11 मौजिज लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल पंचकूला स्थित सीबीआई कोर्ट गया था। वहां सीबीआई जांच टीम ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश कर दी है।
हालांकि, मामले में अभी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है। सीबीआई की रिपोर्ट में मनीषा की मौत का मुख्य कारण आत्महत्या ही दर्शाया गया है। कोर्ट ने पीड़ित पक्ष को स्पष्ट किया है कि यदि वे जांच से असहमत हैं, तो अपना निजी वकील खड़ा कर इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं। अदालत ने अब इस मामले में 22 तारीख तय की है।
‘बेटी को न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे’
महापंचायत की अध्यक्षता कर रहे पूर्व सरपंच शिशमूराम और मृतका के पिता संजय ने बेहद भावुक होकर अपनी बात रखी। पिता संजय ने कहा, “बीते एक साल से पूरा गाम-राम और समाज मेरी बेटी के लिए संघर्ष कर रहा है। सभी के सहयोग से ही यह मामला कोर्ट तक पहुंचा है। हम हार नहीं मानेंगे और तथ्यों के आधार पर अंतिम सांस तक कानूनी जंग लड़ेंगे, चाहे इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा ही क्यों न खटखटाना पड़े।” बैरागी समाज के प्रतिनिधियों ने भी स्पष्ट किया कि अब यह लड़ाई सिर्फ एक पिता की न होकर पूरे समाज की बन चुकी है।
समाज का मिला अटूट समर्थन, गठित होगी मजबूत लीगल टीम
पंचायत में मौजूद विभिन्न सामाजिक और किसान संगठनों के प्रमुखों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि इस संघर्ष में परिवार को कभी अकेला नहीं पड़ने दिया जाएगा। जहां भी सामाजिक या आर्थिक मदद की जरूरत होगी, पूरा समाज कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ वकीलों की टीम से सलाह ली जा रही है ताकि 22 तारीख को होने वाली सुनवाई के दौरान सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ ठोस तथ्यों के साथ आपत्ति दर्ज कराई जा सके।
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