Patti sub jail drug de-addiction : सब जेल पट्टी में बंदियों को नशामुक्त करने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे
सब जेल पट्टी में बंदियों को नशामुक्त करने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे
Patti sub jail drug de-addiction : अक्सर जेलों को लेकर समाज में यही धारणा रहती है कि वहां केवल सजा मिलती है, लेकिन पंजाब की पट्टी सब जेल इस रूढ़िवादी सोच को पूरी तरह झुठला रही है। यहां सलाखों के पीछे बंद कैदियों को अपराधियों से बेहतर इंसान बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटाने का एक अनूठा अभियान चल रहा है।
सब जेल पट्टी के सुपरिंटेंडेंट और डीएसपी इंद्रप्रीत सिंह, पीपीएस का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को जेल के अंदर सही मार्गदर्शन, सकारात्मक माहौल और अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाए, तो वह अपराध का रास्ता हमेशा के लिए छोड़कर एक जिम्मेदार नागरिक बन सकता है।
ओएटी (OAT) और काउंसलिंग से बदल रही जिंदगी
जेल में आने वाले नशा पीड़ित बंदियों के लिए पंजाब सरकार की नीतियों के तहत विशेष डी-एडिक्शन प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इसके तहत कैदियों को ओएटी (OAT) की दवा देने के साथ-साथ जेल प्रशासन की टीम द्वारा लगातार उनकी काउंसलिंग की जाती है। धीरे-धीरे काउंसलर की देखरेख में दवा की मात्रा को कम (टेपर) किया जाता है।
इस प्रक्रिया के दौरान कैदियों को होने वाली शारीरिक या मानसिक परेशानियों से बचाने के लिए डॉक्टरों की सलाह पर मल्टीविटामिन और अन्य जरूरी दवाइयां भी दी जाती हैं। इसी का नतीजा है कि टीम इंचार्ज गुरजिंदर सिंह और अन्य कर्मियों के प्रयासों से अब तक लगभग 93 बंदी पूरी तरह नशा छोड़ चुके हैं। इनमें से कई कैदी अपनी सजा पूरी कर समाज में लौट चुके हैं और एक साफ-सुथरा जीवन जी रहे हैं।
सकारात्मक बदलाव के लिए योग और पुस्तकालय
कैदियों की मानसिक और आध्यात्मिक सोच को बदलने के लिए जेल के भीतर अनूठी व्यवस्था की गई है। यहां बंदियों को हर सुबह पी.टी., योग और मेडिटेशन करवाया जाता है ताकि उनका शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहें। ‘
इसके अलावा जेल परिसर में बने गुरुद्वारा साहिब में रोजाना सुबह-शाम गुरबाणी का पाठ होता है और उसी का प्रसाद मानकर कैदियों को भोजन परोसा जाता है। खाली समय का सदुपयोग करने के लिए जेल में एक शानदार लाइब्रेरी भी स्थापित की गई है, जहां हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी के अखबारों के साथ-साथ ज्ञानवर्धक पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
कानूनी सहायता और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
जेल प्रशासन सिर्फ सुधार पर ही नहीं, बल्कि कैदियों के कानूनी अधिकारों और स्वास्थ्य को लेकर भी पूरी तरह गंभीर नजर आता है। जिला एवं सेशन जज और जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी, तरनतारन के निर्देशों के मुताबिक जरूरतमंद बंदियों को समय-समय पर मुफ्त कानूनी सहायता मुहैया कराई जाती है।
इसके अलावा नियमित अंतराल पर मेडिकल कैंप लगाकर विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। इन तमाम जनहित और सुधारात्मक कार्यों के चलते डीएसपी इंद्रप्रीत सिंह को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किए जाने हेतु नामांकित किया गया है, वहीं उनकी टीम के सदस्य गुरजिंदर सिंह के नाम की भी अनुशंसा प्रशासन को भेजी गई है।
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