Chandigarh Housing Board: सीएचबी के 2500 इंडीपेंडेंट मकानों के अलॉटियों को बड़ी राहत, अब गिराकर नए सिरे से बना सकेंगे मकान
सीएचबी की बैठक
Chandigarh Housing Board: चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के करीब 2500 इंडीपेंडेंट मकानों में रहने वाले परिवारों को बड़ी राहत मिली है। बोर्ड ने इन मकानों को चंडीगढ़ भवन नियम-2017 के तहत मरला मकानों के समान मानने की लंबे समय से लंबित मांग को मंजूरी दे दी है। अब अलॉटी निर्धारित नियमों के तहत पुराने मकान को तोड़कर नया नक्शा बनवाकर नए सिरे से निर्माण करा सकेंगे। इसके साथ ही बोर्ड ने सभी सीएचबी फ्लैटों और आवासीय इकाइयों में लिफ्ट लगाने को भी मंजूरी दे दी है। इसके लिए किसी ब्लॉक के हर निवासी की सहमति अनिवार्य नहीं होगी। जो निवासी लिफ्ट लगाने और उसके रखरखाव का खर्च उठाने को तैयार होंगे, उन्हें प्रस्ताव में शामिल होने और लिफ्ट का इस्तेमाल करने की अनुमति देनी होगी। लिफ्ट की सुविधा से विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों तथा चलने-फिरने में कठिनाई का सामना करने वाले निवासियों को लाभ मिलेगा।
सीएचबी की बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति का गठन 11 मई 2026 के आदेश के तहत किया गया था। समिति ने इंडीपेंडेंट मकानों में नीड बेस्ड चेंजेस और सभी फ्लैटों में लिफ्ट लगाने के संबंध में अपनी रिपोर्ट दी थी। बोर्ड ने मामूली संशोधनों के साथ दोनों रिपोर्टों को मंजूरी दे दी। नए प्रावधान के तहत आवेदन स्व-प्रमाणन योजना के अंतर्गत पंजीकृत वास्तुकारों के माध्यम से जमा किए जाएंगे। सीएचबी को आवेदन मिलने के बाद 30 दिनों के भीतर निर्णय लेना होगा। ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम (ओबीपीएएस) पर सुविधा उपलब्ध होने तक आवेदन ऑफलाइन भी लिए जाएंगे। लिफ्ट या लिफ्ट-वेल से घिरे क्षेत्र को ग्राउंड कवरेज या फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि, यह छूट इंडीपेंडेंट मकानों पर लागू नहीं होगी। लिफ्ट लगाने की अनुमति सीएचबी देगा। जिस ब्लॉक में लिफ्ट लगाने का प्रस्ताव होगा, वहां हर निवासी की सहमति जरूरी नहीं होगी। लेकिन जो निवासी लागत में योगदान देकर लिफ्ट का इस्तेमाल करना चाहते हैं, उन्हें इससे वंचित नहीं किया जा सकेगा।
लिफ्ट लगाने या उसके खर्च को लेकर निवासियों के बीच विवाद होने पर उसका निपटारा चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (आवासों का आवंटन, प्रबंधन और बिक्री) विनियम, 1979 की धारा 15 के तहत किया जाएगा। इसके लिए साझा सीढ़ी से जुड़े सभी आवासीय यूनिटों को एक ‘ब्लॉक’ माना जाएगा। बोर्ड ने इन फैसलों को लागू करने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को भी मंजूरी दी है। इसमें आवेदन की प्रक्रिया से लेकर निर्माण पूरा होने के बाद पूर्णता प्रमाण-पत्र जारी करने तक की व्यवस्था शामिल है। सीएचबी की आवासीय इकाइयों में प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत रूफटॉप सोलर फोटोवोल्टिक संयंत्र लगाने के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया गया। बोर्ड ने प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इन संयंत्रों की स्थापना को मंजूरी दी। इसके लिए सीएचबी से किसी पूर्व अनुमति अथवा अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) की आवश्यकता नहीं होगी।
अब समिति की रिपोर्टें, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की सिफारिशों सहित, अनुमोदन के लिए माननीय प्रशासक के समक्ष प्रस्तुत की जाएंगी। सीएचबी बोर्ड की बैठक मुख्य सचिव एवं सीएचबी चेयरमैन एच. राजेश प्रसाद की अध्यक्षता में हुई। बैठक में वित्त सचिव दिप्रवा लाकड़ा, डीसी निशांत कुमार यादव, सीएचबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डी. कार्तिकेयन, मुख्य वास्तुकार राजीव मेहता, चीफ इंजीनियर सी.बी. ओझा, बोर्ड सदस्य बलबीर सिंह ढोल, विनोद जोशी और शक्ति प्रकाश देवशाली तथा सीएचबी सचिव सौरभ कुमार अरोड़ा मौजूद रहे।
