Chandigarh News: चंडीगढ़ सेक्टर-17 की बिल्डिंग से खाली होंगे हरियाणा सरकार के 2 दफ्तर, कोर्ट ने दी दो महीने की मोहलत
31 साल बाद खाली होगा हरियाणा सरकार का कार्यालय
Chandigarh News: चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में एससीओ नंबर 38-39 में करीब 31 साल से चल रहे हरियाणा सरकार के दो कार्यालय अब खाली करने होंगे। जिला अदालत ने बिल्डिंग मालिक पुन्य ग्रेवाल की याचिका पर फैसला सुनाते हुए हरियाणा तकनीकी शिक्षा विभाग को दो महीने के भीतर परिसर खाली करने और उसका वास्तविक कब्जा मालिक को सौंपने का आदेश दिया है। इसी बिल्डिंग में हरियाणा सेवा अधिकार आयोग का कार्यालय भी चल रहा है, इसलिए उसे भी परिसर खाली करना होगा।
बिल्डिंग मालिक ने करीब तीन साल पहले हरियाणा सरकार के दोनों विभागों के खिलाफ अदालत में मामला दायर किया था। याचिका में किराया नहीं देने, परिसर में कथित अवैध निर्माण और लीज की शर्तों का उल्लंघन करने समेत कई आरोप लगाए गए थे। सरकार ने इन दलीलों का विरोध किया था। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद बुधवार को अदालत ने परिसर खाली करने का आदेश दिया।
1995 में तकनीकी शिक्षा विभाग को मिली थी लीज
अदालत में दाखिल याचिका के अनुसार, एससीओ 38-39 की पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल का करीब 6,900 वर्गफुट क्षेत्र 7 जून 1995 को हरियाणा तकनीकी शिक्षा विभाग को लीज पर दिया गया था। यहां विभाग की एडमिशन एंड फी रेगुलेटरी कमेटी का कार्यालय चल रहा था। लीज एग्रीमेंट के मुताबिक परिसर का मासिक किराया 39 हजार रुपए तय किया गया था। इस व्यवस्था के तहत यह जगह करीब 31 साल तक हरियाणा सरकार के इस्तेमाल में रही।
कथित निर्माण को लेकर एस्टेट ऑफिस ने जारी किए थे नोटिस
बिल्डिंग मालिक ने अदालत में आरोप लगाया कि किराए पर दिए गए परिसर में कई तरह के बदलाव और निर्माण किए गए। मालिक के मुताबिक, इन बदलावों को लेकर चंडीगढ़ एस्टेट ऑफिस ने बिल्डिंग को कई नोटिस भी जारी किए थे। मालिक ने अदालत के सामने कहा कि कथित वायलेशन के कारण करीब 40 करोड़ रुपए कीमत वाली बिल्डिंग पर कार्रवाई की स्थिति बन गई थी। यहां तक कि बिल्डिंग सील होने की नौबत आने का भी दावा किया गया। मालिक का कहना था कि परिसर में किए गए बदलावों के कारण उसकी संपत्ति को लेकर परेशानी बढ़ रही थी।
2019 से किराया बंद होने का आरोप, सरकार ने बकाया चुकाया
याचिका में बिल्डिंग मालिक ने आरोप लगाया था कि हरियाणा तकनीकी शिक्षा विभाग ने 1 मई 2019 से किराया देना बंद कर दिया था। इसके बाद बकाया किराए की मांग को लेकर भी अदालत का रुख किया गया। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने अदालत को बताया कि बकाया किराए का भुगतान कर दिया गया है। सरकार के मुताबिक, जनवरी 2026 तक करीब 18.72 लाख रुपए पुराना किराया और करीब 2.31 लाख रुपए ब्याज के तौर पर जमा कराया जा चुका था।
इस जानकारी के बाद अदालत ने किराया जमा नहीं कराने से जुड़ी बिल्डिंग मालिक की दलील को स्वीकार नहीं किया। हालांकि, परिसर में किए गए कथित बदलावों, लीज की शर्तों और उसके इस्तेमाल से जुड़े दूसरे मुद्दों पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं।
तकनीकी शिक्षा विभाग की लीज वाली जगह में चल रहा था दूसरा कार्यालय
मामले में एक और अहम मुद्दा हरियाणा सेवा अधिकार आयोग के कार्यालय को लेकर सामने आया। बिल्डिंग मालिक की याचिका के मुताबिक, परिसर तकनीकी शिक्षा विभाग को लीज पर दिया गया था, लेकिन बाद में इसी बिल्डिंग में हरियाणा सेवा अधिकार आयोग का कार्यालय भी चलने लगा। मालिक ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि परिसर का इस्तेमाल लीज एग्रीमेंट में तय व्यवस्था के अलावा दूसरे सरकारी कार्यालय के लिए किया गया। अदालत के आदेश के बाद अब तकनीकी शिक्षा विभाग के साथ हरियाणा सेवा अधिकार आयोग को भी यह परिसर खाली करना होगा।
मालिक रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हॉल शुरू करने की योजना में
पुन्य ग्रेवाल ने अदालत के सामने बताया कि वह अपने पति के साथ मिलकर इस बिल्डिंग में नया कारोबार शुरू करना चाहती हैं। उनकी योजना यहां रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, पार्टी हॉल और कॉन्फ्रेंस रूम जैसी सुविधाएं विकसित करने की है। अदालत के आदेश के अनुसार, हरियाणा सरकार के दोनों कार्यालयों को दो महीने के भीतर परिसर खाली करना होगा। इसके बाद बिल्डिंग का वास्तविक कब्जा मालिक पुन्य ग्रेवाल को सौंपा जाएगा।
