Kisan Mazdoor Morcha Rail Roko : Punjab के 5 जिलों में रेल रोको आंदोलन की चेतावनी, पटरी पर डटे किसान
Punjab के 5 जिलों में रेल रोको आंदोलन की चेतावनी, पटरी पर डटे किसान
Kisan Mazdoor Morcha Rail Roko | Punjab : पंजाब की सियासत में एक बार फिर टकराव के बादल मंडराने लगे हैं। किसान-मजदूर मोर्चे के आह्वान पर आज दोपहर 12 बजे से राज्य के पांच अलग-अलग स्थानों पर रेल रोको आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया गया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि तय समय से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो रेल पटरियों पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया जाएगा, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।
भारी बारिश के बावजूद रेलवे ट्रैक पर डटे अन्नदाता
इस वक्त किसान नेता सरवन सिंह पंधेर अमृतसर के देवीदासपुरा रेलवे ट्रैक पर सैकड़ों किसानों के साथ डटे हुए हैं। बीती रात हुई मूसलाधार बारिश के चलते हालात काफी मुश्किल हो चुके हैं, जिससे खेतों में खड़ी फसलें भी प्रभावित हुई हैं। इसके बावजूद किसानों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। पंधेर का कहना है कि मौसम की मार अपनी जगह है, लेकिन सरकार की अनदेखी के खिलाफ उनका यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी आवाज अनसुनी होती रहेगी।
सीएम मान को पत्र और मंत्रियों के आवास के बाहर प्रदर्शन
सरकार पर दबाव बनाने के लिए किसान संगठनों ने चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन किए हैं। किसान नेताओं का कहना है कि वे पहले ही मुख्यमंत्री भगवंत मान को विस्तृत पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत करा चुके हैं। इसके बाद 31 अगस्त को जिला उपायुक्त कार्यालयों के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर मांग पत्र सौंपे गए थे। इतना ही नहीं, पिछले तीन दिनों से किसान पंजाब के विभिन्न कैबिनेट मंत्रियों के घरों के बाहर भी धरने पर बैठे हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस समाधान निकलता नहीं दिखाई दिया।
एमएसपी की कानूनी गारंटी और यूएस ट्रेड डील मुख्य मुद्दे
मोर्चे की प्रमुख मांगों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बिजली संशोधन अधिनियम और बीज संशोधन अधिनियम को लेकर सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग शामिल है। इसके अलावा शंभू और खनौरी बॉर्डर पर चले आंदोलन के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा भी मुख्य मांग है, जहां लगभग 3 करोड़ 77 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ था और सैकड़ों किसान घायल हुए थे।
किसान नेता मूंग, मक्का और आलू समेत पांच प्रमुख फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी दिए जाने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही, पंजाब का गिरता भूजल स्तर, नदी के पानी की सुरक्षा, लैंड पूलिंग नीति, भारतमाला परियोजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटरों का विरोध जैसे गंभीर स्थानीय मुद्दे भी इस आंदोलन के केंद्र में हैं। आज शाम 18 सितंबर को होने वाली बैठक में इस पूरे आंदोलन की समीक्षा कर आगामी रणनीति का ऐलान किया जाएगा।
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