Punjab Employees DA: पंजाब के सरकारी कर्मचारियों को अब 50% DA, 8% बढ़ोतरी पर बनी सहमति
पंजाब के सरकारी कर्मचारियों को अब 50% DA
Punjab Employees DA: चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इसके बाद कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कर्मचारियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में DA को लेकर सरकार के फैसले की जानकारी दी। अमन अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद कर्मचारियों और सरकार के बीच बना गतिरोध टूट गया है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अधिकार है और सरकार को कर्मचारियों की बात सुननी चाहिए।
अमन अरोड़ा के मुताबिक सरकार 8% DA देने पर सहमत हुई है। यह बढ़ोतरी 4-4% की दो किश्तों में जारी की जाएगी। इसके बाद पंजाब के सरकारी कर्मचारियों का DA 50% हो जाएगा। सरकार के मुताबिक इस 8% की बढ़ोतरी से सरकारी खजाने पर करीब ₹248 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। बैठक में कर्मचारियों की अन्य मांगों पर भी चर्चा हुई और आने वाले समय में सरकार तथा कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी। हालांकि, ताजा बैठक में घोषित 8% बढ़ोतरी को लेकर भुगतान की सटीक तारीख और किश्तों की अलग-अलग प्रभावी तारीख का विवरण सरकार की विस्तृत अधिसूचना से स्पष्ट होना बाकी है।
जालंधर में पहले नहीं हो पाई थी CM से बातचीत
इससे पहले जालंधर में मुख्यमंत्री भगवंत मान और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत नहीं हो पाई थी। मुख्यमंत्री ने उस समय कहा था कि पहले हड़ताल खत्म की जाए, उसके बाद कर्मचारियों के साथ बातचीत होगी। कर्मचारी नेताओं के अपनी मांग पर कायम रहने के बाद मुख्यमंत्री बिना बैठक किए वहां से चले गए थे। इसके बाद कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और अब चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के साथ बैठक हुई।
बैठक में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, पार्टी प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा तथा कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर मौजूद रहीं। इसके अलावा सांझा फ्रंट ऑफ पेंशनर्स, संयुक्त मुलाजिम मंच, पंजाब सचिवालय एसोसिएशन और पंजाब सिविल सचिवालय ऑफिसर्स एसोसिएशन समेत अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनर संगठनों के 12 नेताओं को बैठक में बुलाया गया था। अमन अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों की मांगों को विस्तार से सुना। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों से जुड़े करीब 99% मुद्दे पिछली सरकारों से चले आ रहे हैं। सरकार ने इन मामलों पर आगे भी बैठकें जारी रखने की बात कही है।
दो सप्ताह बाद फिर होगी कर्मचारियों से बैठक
अमन अरोड़ा के मुताबिक करीब दो सप्ताह बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान कर्मचारियों के साथ दोबारा बैठक करेंगे। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच DA के अलावा अन्य लंबित मांगों पर भी बातचीत जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार और कर्मचारियों के बीच अदालतों तक पहुंचे विवादों को भी बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की जाएगी। सरकार का कहना है कि लंबित मामलों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।
पंजाब के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स लंबे समय से लंबित DA और DR की किश्तों तथा एरियर के भुगतान की मांग कर रहे हैं। इस विवाद में छठे पंजाब पे कमीशन की सिफारिशें भी महत्वपूर्ण हैं। कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक पंजाब में DA/DR को केंद्रीय पैटर्न से जोड़ने और लंबित किश्तों के भुगतान को लेकर कर्मचारियों और सरकार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की 3 अगस्त 2026 की डिवीजन बेंच के फैसले में राज्य सरकार और PSPCL को कर्मचारियों तथा पेंशनर्स की लंबित DA/DR किश्तें केंद्रीय सरकार के पैटर्न के अनुरूप जारी करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने इन्हें पंजाब में कार्यरत IAS, IPS और IFS अधिकारियों को मिलने वाली दरों के अनुरूप रखने की बात कही थी।
सरकार और कर्मचारियों के बीच विवाद की कानूनी स्थिति
DA के मामले में पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सरकार की ओर से वित्तीय बोझ और राज्य के DA नियमों से जुड़े तर्क अदालत के समक्ष रखे गए हैं। दूसरी ओर, कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबित DA और एरियर का भुगतान किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट के 3 अगस्त के फैसले में राज्य सरकार और PSPCL की अपीलें खारिज करते हुए लंबित DA/DR किश्तों को केंद्रीय पैटर्न के अनुसार जारी करने का निर्देश दिया गया था। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, बाद में समयसीमा को संशोधित करते हुए लंबित किश्तें एक पखवाड़े के भीतर जारी करने का निर्देश दिया गया था।
DA और अन्य मांगों को लेकर पंजाब में सरकारी कर्मचारियों ने अगस्त-सितंबर में आंदोलन किया। 27 अगस्त को बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने राज्यव्यापी हड़ताल की थी। इसके बाद 8 सितंबर को कई विभागों के कर्मचारियों ने पेन-डाउन स्ट्राइक भी की। इससे पहले सरकार ने आंदोलन के दौरान ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ ‘नो वर्क, नो पे’ से जुड़ा आदेश भी जारी किया था। इसके बाद कर्मचारी नेताओं और सरकार के बीच बातचीत का रास्ता खुला।
कर्मचारियों और सरकार के दावों में अंतर
कर्मचारी संगठनों का दावा है कि राज्य के टैक्स राजस्व में वृद्धि हुई है और करीब ₹14,200 करोड़ के बकाये का भुगतान किया जा सकता है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि राजस्व बढ़ने के बावजूद वेतन, पेंशन, ब्याज और कर्ज की अदायगी जैसी कई वित्तीय जिम्मेदारियां हैं। इस वजह से उपलब्ध राशि को केवल DA बकाये के आधार पर नहीं देखा जा सकता। सरकार पहले भी DA से जुड़े अलग-अलग वर्गों के लिए अलग फैसले ले चुकी है। 4 सितंबर 2026 को अमन अरोड़ा ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए करीब 85,000 कर्मचारियों के DA को 42% से बढ़ाकर 60% करने की कैबिनेट सब-कमेटी की सिफारिश की जानकारी दी थी। यह फैसला उस वर्ग के कर्मचारियों से संबंधित था, जो केंद्रीय 7वें वेतन आयोग के वेतन ढांचे के तहत आते हैं।
नई 8% DA बढ़ोतरी के लागू होने के बाद संबंधित कर्मचारियों का DA 50% हो जाएगा। इसका सीधा असर उनके महंगाई भत्ते और कुल वेतन पर पड़ेगा। हालांकि वास्तविक वेतन में बढ़ोतरी कर्मचारी के बेसिक पे और लागू सेवा नियमों के आधार पर अलग-अलग होगी। सरकार की ओर से बताई गई व्यवस्था के मुताबिक 4-4% की दो किश्तों में DA जारी किया जाएगा। इस फैसले के साथ लंबित DA/DR और एरियर से जुड़े बाकी मुद्दों पर सरकार और कर्मचारी संगठनों की बातचीत भी आगे जारी रहेगी।
