Rewari : रेवाड़ी में 85 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क महज 25 दिन में उखड़ी
Rewari : रेवाड़ी में 85 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क महज 25 दिन में उखड़ी
Rewari : शहर के वार्ड नंबर 10 के बंजारवाड़ा-सैयद सराय मोहल्ले में विकास कार्यों के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। करीब 85 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से बनाई गई नई सड़क महज 25 दिनों के भीतर ही टूटने लगी है।
स्थिति यह है कि सड़क की रोड़ियां बाहर निकल आई हैं और कई जगहों पर डामर व सतह उखड़ चुकी है। इस घटिया निर्माण कार्य को लेकर किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि नगर परिषद के पार्षदों और स्थानीय निवासियों ने खुद तीखा सवाल उठाया है।
केमिकल और सीमेंट की मरम्मत भी हुई फेल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क बनने के कुछ ही दिनों बाद उसकी ऊपरी परत उखड़ने लगी थी। जब इसकी शिकायत की गई, तो ठेकेदार के कर्मचारियों ने क्षतिग्रस्त हिस्सों पर केमिकल और सीमेंट डालकर लीपापोती करने की कोशिश की। आरोप है कि कुछ ही दिनों में वह सामग्री भी पानी के साथ बहकर नालियों में जा पहुंची, जिससे निर्माण में बरती गई भारी अनियमितताएं साफ उजागर हो गईं।
ग्रामीणों और पार्षदों ने सड़क की मोटाई पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि वर्ष 2018 में इसी सड़क का निर्माण लगभग 8 इंच मोटाई में हुआ था, जबकि इस बार नई सड़क की मोटाई 3 इंच से भी कम है। लोगों ने मांग की है कि सड़क की मौके पर नपाई कराई जाए और निर्माण सामग्री के सैंपल लेकर किसी सक्षम तकनीकी एजेंसी से जांच कराई जाए।

पार्षद बोले- निर्माण के दौरान ही अधिकारियों को चेताया था
वार्ड नंबर 10 के पार्षद पवन बटला ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि सड़क के निर्माण कार्य के दौरान ही उन्होंने संबंधित जेई, एमओ और डीएमसी सहित तमाम अधिकारियों को इसकी खराब गुणवत्ता की लिखित शिकायत दी थी। पार्षद का आरोप है कि उन्होंने बार-बार अधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी नहीं जागे और निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले पुरानी सड़क को उखाड़ दिया गया था, जिसके बाद करीब 15 से 20 दिन तक सड़क का मलबा रास्ते में ही फैला रहा। इस वजह से मुख्य मार्ग पूरी तरह बाधित रहा और मंदिर-गुरुद्वारे आने-जाने वाले श्रद्धालुओं व आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सीमेंट की कमी और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
लोगों का कहना है कि सड़क बनाने के दौरान पर्याप्त मात्रा में सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया। यमुना सैंड और क्रेशर की रोड़ी से मसाला तैयार कर सड़क बना दी गई, जो तीन-चार दिन टिक भी नहीं पाई।
मामले में मुख्यमंत्री द्वारा गठित चार सदस्यीय कमेटी के सदस्यों ने भी सड़क निर्माण और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कमेटी ने इस पूरे मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष रखने की बात कही है। अब सवाल यह उठता है कि 85 लाख रुपये की लागत वाली सड़क यदि 25 दिन में उखड़ रही है, तो निर्माण के दौरान गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई और बिना मानकों के इसे किस आधार पर पास कर भुगतान जारी कर दिया गया।
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