PU हॉस्टल मौत मामला: कमरे से सिरिंज मिलीं, मामले में 2 पर चार्ज फ्रेम; अब चलेगा मुकदमा
PU हॉस्टल में छात्र विकास की मौत मामले में 2 पर चार्ज फ्रेम
PU hostel death case: पंजाब यूनिवर्सिटी के बॉयज हॉस्टल में छात्र विकास की मौत के मामले में जिला अदालत ने मंगलवार को आरोपी आर्यन प्रभात और परीक्षित कौशल के खिलाफ आरोप तय कर दिए। चार्ज फ्रेम होने के बाद अब दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मामले में अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी। दोनों आरोपी हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं और पंजाब यूनिवर्सिटी के हॉस्टल नंबर-7 में रहते थे। आर्यन प्रभात कुल्लू जिले के बंजार का रहने वाला है, जबकि परीक्षित कौशल शिमला जिले के कुमारसैन के माधवानी गांव का निवासी है। रिकॉर्ड के मुताबिक, 18 नवंबर की रात करीब 9 से 9:30 बजे के बीच विकास आर्यन के कमरे में पहुंचा था। पुलिस जांच के अनुसार, उस समय विकास पहले से नशे की हालत में था। इसके बाद तीनों ने नशीले पदार्थों का सेवन किया और सो गए।
सुबह बेहोशी की हालत में मिला था विकास
पुलिस के अनुसार, अगली सुबह आर्यन और परीक्षित ने विकास को उल्टी करने के बाद बेहोशी की हालत में देखा। इसके बाद उसे इलाज के लिए जीएमएसएच-16 ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद विकास को मृत घोषित कर दिया। छात्र की मौत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और हॉस्टल के कमरे से मिले सामान के साथ दोनों आरोपियों के मोबाइल और अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया। जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के कमरे से उल्टी, एक बाल्टी और दो इस्तेमाल की गई डिस्पोजेबल सिरिंज मिली थीं। पुलिस ने इन चीजों को जांच का हिस्सा बनाया और घटनाक्रम से जोड़कर साक्ष्यों की पड़ताल की।
जांच के दौरान परीक्षित कौशल के मोबाइल से रात 3:17 बजे से सुबह 7:58 बजे तक के चार वीडियो भी मिले। इन वीडियो में विकास बेहोशी की हालत में दिखाई दे रहा था। पुलिस के अनुसार, एक वीडियो में आर्यन विकास के मुंह में सिगरेट का धुआं डालता हुआ और सीपीआर की कोशिश करता हुआ दिखाई देता है। एक अन्य वीडियो में विकास की नाक दबाने की बात भी रिकॉर्ड हुई थी।
हत्या से संबंधित धारा में दर्ज हुआ था केस
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस का आरोप था कि दोनों ने विकास को सुबह तक कमरे में रखा और उसके साथ ऐसी हरकतें कीं, जिनके आधार पर उनके खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया। हालांकि, दोनों आरोपियों को बाद में अदालत से जमानत मिल गई थी। जमानत पर सुनवाई के दौरान अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों को भी देखा था। अदालत के जमानत आदेश के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट नहीं था कि विकास की मौत वीडियो बनाए जाने से पहले हो चुकी थी या दोनों आरोपियों के कथित कृत्य से उसकी मौत हुई। इसी बिंदु को लेकर जांच और उपलब्ध साक्ष्यों की कानूनी व्याख्या महत्वपूर्ण रही है।
अब दोनों आरोपियों पर आरोप तय होने के बाद मामले की सुनवाई ट्रायल के चरण में आगे बढ़ेगी। इसमें पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कमरे से मिले सामान, मोबाइल वीडियो और अन्य साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा जाएगा। अदालत आगे गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर यह तय करेगी कि अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप कानूनी रूप से किस हद तक साबित होते हैं। फिलहाल चार्ज फ्रेम होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है और दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलना बाकी है।
