September 23, 2026

सीईसी ने चुनाव में धांधली होने दी तो यह ‘देशद्रोह’ है: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी

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सीईसी ने चुनाव में धांधली होने दी तो यह ‘देशद्रोह’ है: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी

SIR विवाद के बीच प्रियंका गांधी का बड़ा बयान

Political Update: केरल के नीलांबुर में बुधवार को कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। वायनाड से लोकसभा सांसद प्रियंका ने कहा कि अगर सीईसी को चुनावों में धांधली की जानकारी थी और इसके बावजूद उन्होंने इसे होने दिया, तो यह देश के साथ विश्वासघात और देशद्रोह का कृत्य है। प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं होते और निर्वाचन आयोग में जिम्मेदार अधिकारी कथित गड़बड़ियों से अवगत होने के बावजूद उन्हें होने देते हैं, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव की निष्पक्षता बेहद जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चुनाव ही निष्पक्ष नहीं होंगे तो लोकतंत्र कैसे कायम रहेगा। उन्होंने अपने भाई और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से निर्वाचन आयोग के माध्यम से कथित पक्षपात और अन्याय के मुद्दे उठाए जाने का भी जिक्र किया। प्रियंका ने कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से कई मुद्दों को सामने रखते रहे हैं और अब निर्वाचन आयोग के भीतर से भी कुछ मुद्दे उठाए जाने की खबरें सामने आई हैं। यह संदर्भ निर्वाचन आयोग के दो सदस्यों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—की कथित आपत्तियों से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं से जुड़े कई मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता नाम हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी डेटा से जुड़ी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है।

 

 

निर्वाचन आयोग ने कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए

इन रिपोर्टों के बाद निर्वाचन आयोग की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है। आयोग के सूत्रों ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR समेत आयोग के सभी फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी हासिल थी और फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा के दौरान सदस्यों के अलग विचार, सुझाव या टिप्पणियां सामने आना आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। इस तरह एक तरफ मीडिया रिपोर्टों में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों का उल्लेख हुआ है, जबकि निर्वाचन आयोग ने अंतिम निर्णयों में किसी आंतरिक असहमति से इनकार किया है। विवाद का यही पहलू फिलहाल राजनीतिक बहस के केंद्र में है।

प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर सामने आ रही बातें जांच में सही साबित होती हैं तो जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले की उचित जांच की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि जांच की जिम्मेदारी ऐसे लोगों को नहीं दी जानी चाहिए जिनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद न हो। उनके मुताबिक जांच ऐसी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, जिससे देश के लोगों को यह भरोसा हो कि मामले की पड़ताल सही और उचित तरीके से की जा रही है। प्रियंका ने मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर और अलग-अलग राज्यों में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे का भी जिक्र किया। उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा में हुई कथित गड़बड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सामने आई बातें सही हैं तो मामला गंभीर है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

 

 

SIR को लेकर क्यों मचा है विवाद

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक और सार्वजनिक बहस चल रही है। इसी प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों को अपडेट और सत्यापित किया जा रहा है। ताजा विवाद उस मीडिया रिपोर्ट के बाद तेज हुआ, जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से आयोग की कुछ प्रक्रियाओं और फैसलों पर कथित आपत्तियों का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट में Form 6 में बदलाव, मतदाता नाम हटाने और चुनावी डेटा सिस्टम के संचालन से जुड़े मुद्दों का जिक्र है।

निर्वाचन आयोग ने इस रिपोर्ट के जवाब में कहा है कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। ऐसे में फिलहाल विवाद का एक प्रमुख हिस्सा यह है कि चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज कथित टिप्पणियों और आयोग के अंतिम फैसलों के बीच क्या संबंध था। आयोग का कहना है कि आंतरिक विचार-विमर्श और अलग-अलग सुझाव उसकी सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। प्रियंका गांधी इस मामले में जिम्मेदार लोगों की जांच और जवाबदेही की मांग कर रही हैं। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने SIR और अन्य फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है। ऐसे में आगे की जांच, दस्तावेज और आधिकारिक स्पष्टीकरण इस विवाद से जुड़े दावों की पुष्टि के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

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