Haryana News: धान की कटाई शुरू होते ही पराली पर बैन, धारा 163 लागू; जलाया तो दर्ज होगी FIR
धान की कटाई शुरू होते ही पराली पर बैन, धारा 163 लागू
Haryana News: प्रदेश में धान की कटाई का सीजन शुरू होते ही वायु प्रदूषण को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। खेतों में फसल अवशेष यानी पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जिलाधीश ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत कड़े प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों के तहत जिले भर के खेतों में धान/जीरी की कटाई के बाद बचने वाले ठूंठ या पराली में आग लगाना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि पर्यावरण और वायु गुणवत्ता से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
खेत में दिखी आग तो दर्ज होगी FIR, BNS की धारा 223 के तहत होगी कार्रवाई
प्रशासन ने केवल आदेश जारी नहीं किए हैं, बल्कि इनकी धरातल पर पालना सुनिश्चित करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों और मैदानी अमले (फील्ड स्टाफ) की जवाबदेही तय कर दी है। विशेष निगरानी टीमें लगातार गांवों और खेतों का दौरा कर रही हैं। यदि कोई किसान खेत में पराली जलाते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 223 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
गांव-गांव मुस्तैद टीमें, बच्चों और ग्रामीणों को भी किया जा रहा जागरूक
कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि जिले में नोडल अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों की विशेष ड्यूटियां लगाई गई हैं। ये टीमें दिन-रात खेतों की सैटेलाइट और जमीनी स्तर पर निगरानी कर रही हैं। इसके साथ ही गांव-गांव जाकर किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। स्कूलों में बच्चों और पंचायतों में ग्रामीणों को जोड़कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, ताकि किसान पराली को समस्या मानने की बजाय इसे एक संसाधन के रूप में इस्तेमाल करें।
इन आधुनिक कृषि यंत्रों से करें पराली का वैज्ञानिक प्रबंधन
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को पराली में आग लगाने के बजाय आधुनिक कृषि मशीनों की मदद लेनी चाहिए। विभाग की ओर से सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS), स्ट्रॉ चॉपर और रोटावेटर जैसी आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल की सलाह दी जा रही है। इन यंत्रों के जरिए फसल अवशेषों को मिट्टी में ही मिलाकर बुवाई की जा सकती है। इससे न केवल पराली का निस्तारण आसानी से हो जाता है, बल्कि मिट्टी में जैविक कार्बन और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति मजबूत होती है।
धुएं से सड़क हादसों का खतरा, मिट्टी के मित्र कीटों को भी भारी नुकसान
विभाग ने किसानों को आगाह किया है कि पराली जलाने से जहरीला धुआं हवा में घुलता है, जिससे सांस की बीमारियां फैलती हैं। वहीं, आग की गर्मी से जमीन की ऊपरी परत में मौजूद मित्र कीट और सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जो फसलों के लिए बेहद जरूरी होते हैं। कई बार खेतों की आग पास की संपत्तियों और दूसरे किसानों के खड़े खेतों तक फैल जाती है। इसके अलावा सड़कों के किनारे खेतों में पराली जलाने से घना धुआं फैल जाता है, जिससे दृश्यता (विजिबिलिटी) घटती है और बड़े सड़क हादसों की आशंका बनी रहती है। प्रशासन ने किसानों से खुद पराली न जलाने और दूसरों को भी जागरूक करने की अपील की है।
यह भी पढ़ें – हरियाणा में बदला मौसम का मिजाज, आज से छमाछम बारिश के आसार
