कभी नहीं सोचा था कि सात एशियाई खेलों में खेल पाऊंगी: जोशना चिनप्पा
40 की उम्र में जोशना चिनप्पा का कमाल
Joshna Chinappa: भारतीय स्क्वॉश स्टार जोशना चिनप्पा के लिए एशियाई खेलों का सफर अब एक ऐसे मुकाम पर पहुंच गया है, जिसकी उन्होंने खुद कभी कल्पना नहीं की थी। 2002 के बुसान एशियाई खेलों से शुरू हुआ उनका सफर 2026 में नागोया तक पहुंच चुका है। जोशना ने रिकॉर्ड सातवीं बार एशियाई खेलों में हिस्सा लेकर नया रिकॉर्ड बनाया है और 40 साल की उम्र में भी भारतीय टीम के लिए कोर्ट पर उतर रही हैं। अपने 40वें जन्मदिन के महज 10 दिन बाद जोशना ने वेलावन सेंथिलकुमार के साथ मिश्रित युगल स्पर्धा के सेमीफाइनल में जगह बनाई। इसके साथ ही भारत का पदक पक्का हो गया। इस उपलब्धि के साथ एशियाई खेलों में जोशना के पदकों की संख्या भी छह हो जाएगी।
जोशना ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि सातवीं बार एशियाई खेलों में हिस्सा लेना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह इतनी बार इस प्रतियोगिता में खेल पाएंगी। चेन्नई की इस खिलाड़ी ने 2002 में बुसान एशियाई खेलों से अपने अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद वह लगातार भारतीय स्क्वॉश की प्रमुख खिलाड़ियों में बनी रहीं। अब वह साथी खिलाड़ी सौरव घोषाल से भी आगे निकल गई हैं। घोषाल ने पिछले साल संन्यास लिया था और अपने करियर में छह बार एशियाई खेलों में हिस्सा लिया था। जोशना के लिए यह सिर्फ रिकॉर्ड बनाने का सफर नहीं है। 40 की उम्र में भी वह भारत के लिए खेलना अपने लिए सौभाग्य मानती हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान अगले मुकाबले पर है और वह भविष्य के बारे में ज्यादा नहीं सोच रही हैं।
हर सप्ताह 25 से 30 घंटे तक ट्रेनिंग, फिटनेस के पीछे पूरी टीम
इतने लंबे करियर के बावजूद जोशना ने अपनी फिटनेस को बनाए रखा है। उन्होंने बताया कि वह सप्ताह में पांच से छह दिन अलग-अलग सत्रों में रोजाना करीब पांच से छह घंटे अभ्यास करती हैं। यानी उनका प्रशिक्षण कार्यक्रम आज भी बेहद नियमित और मेहनत वाला है। जोशना अपनी फिटनेस का श्रेय अकेले खुद को नहीं देतीं। उनके साथ फिटनेस ट्रेनर, मनोवैज्ञानिक, कोच और पोषण विशेषज्ञों की टीम काम करती है। इसके अलावा वह ध्यान और सांस से जुड़े अभ्यास भी नियमित रूप से करती हैं। जोशना ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर को पहले की तरह तेजी से रिकवरी करने में समय लगता है। 35 साल की उम्र के बाद उन्हें अपनी ट्रेनिंग में काफी बदलाव करना पड़ा। हालांकि, उनका कहना है कि आज वह अपने युवा दिनों की तुलना में खुद को बेहतर महसूस करती हैं, लेकिन मैदान पर उतरने के लिए पहले से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
मिश्रित युगल में सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ जोशना का एशियाई खेलों का छठा पदक तय हो गया है। इससे पहले वह दो रजत और तीन कांस्य पदक जीत चुकी हैं। उन्होंने 2014 और 2018 में टीम स्पर्धा में रजत पदक जीते थे। 2010 और 2022 में टीम स्पर्धा में उनके हिस्से कांस्य पदक आया। 2018 में उन्होंने एकल स्पर्धा में भी कांस्य पदक जीता था। हालांकि, एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक अभी जोशना की उपलब्धियों में शामिल नहीं है। वह विश्व चैंपियनशिप, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई चैंपियनशिप में अलग-अलग स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। लेकिन एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतना उनके लिए अब भी एक बड़ी चुनौती है। जोशना ने कहा कि एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतना बेहद मुश्किल है, क्योंकि एशिया में दुनिया के कुछ सर्वश्रेष्ठ स्क्वॉश खिलाड़ी मौजूद हैं।
40 की उम्र में भी संन्यास का फैसला नहीं, एकल खेलती रहेंगी
लंबे करियर और उम्र के बावजूद जोशना ने फिलहाल संन्यास का कोई संकेत नहीं दिया है। पिछले साल अक्टूबर में उन्होंने अपना आखिरी पीएसए एकल खिताब जीता था और अब भी एकल प्रतियोगिताओं में खेलना जारी रखेंगी। मिश्रित युगल में उनकी भागीदारी मुख्य रूप से एशियाई खेलों तक सीमित रहती है। उन्होंने बताया कि वह युगल में खास तौर पर एशियाई खेलों के दौरान ही खेलती हैं, क्योंकि यह प्रतियोगिता चार साल में एक बार होती है। उनका फोकस फिलहाल नागोया में चल रहे एशियाई खेलों पर है। जोशना के लिए यह टूर्नामेंट अपने रिकॉर्ड को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय स्क्वॉश में अपनी लंबी मौजूदगी को जारी रखने का एक और मौका है।
2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में स्क्वॉश पहली बार ओलंपिक खेलों का हिस्सा बनेगा। जोशना को उम्मीद है कि भारत के युवा खिलाड़ी इस मौके का फायदा उठाकर ओलंपिक में पदक जीत सकते हैं। उन्होंने कहा कि ओलंपिक में स्क्वॉश का शामिल होना शानदार है। उनके मुताबिक भारत के पास युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का मजबूत समूह है, जो लॉस एंजिलिस में जगह बनाने की क्षमता रखता है। जोशना का मानना है कि अगले दो वर्षों में इन खिलाड़ियों का स्तर और मजबूत होगा और उनमें से कोई खिलाड़ी भारत के लिए ओलंपिक पदक जीत सकता है। खुद जोशना का लंबा अंतरराष्ट्रीय अनुभव अब भारतीय स्क्वॉश की अगली पीढ़ी के लिए भी एक बड़ा संदर्भ है।
