Navratri Akhand Jyoti: नवरात्र में अखंड ज्योति जलाने से पहले जान लें ये 5 नियम, बुझने से बचाने के लिए अपनाएं ये तरीका
नवरात्र में अखंड ज्योति जलाने से पहले जान लें ये 5 नियम, बुझने से बचाने के लिए अपनाएं ये तरीका
Navratri Akhand Jyoti: आश्विन मास के शारदीय नवरात्र पर्व के आगमन के साथ ही देश भर में भक्ति और आस्था का माहौल बन जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन उत्सव में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के पूजन-अर्चन के साथ ही घरों और पंडालों में (Navratri Akhand Diya Guidelines) ‘अखंड ज्योति’ स्थापित करने की प्राचीन परंपरा रही है।
माना जाता है कि घटस्थापना वाले दिन प्रज्वलित की जाने वाली यह दिव्य ज्योति केवल एक दीपक नहीं, बल्कि साक्षात देवी दुर्गा की उपस्थिति और शक्ति का जाग्रत प्रतीक है। यदि आप भी इस नवरात्र अपने घर में अखंड ज्योति जलाने जा रहे हैं, तो इससे जुड़े शास्त्रों और परंपराओं के नियमों को समझना बेहद आवश्यक है।
क्या है अखंड ज्योति का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व?
‘अखंड’ का सीधा अर्थ है—जो खंडित न हो, यानी जो बिना रुके निरंतर जलती रहे। शास्त्रों के अनुसार दीप प्रज्वलित करते समय दीप-ज्योति मंत्र का पाठ किया जाता है, जो जीवन से अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर आरोग्य, समृद्धि और शुभता लाने की प्रार्थना है। (How to Burn Akhand Jyoti Navratri) मान्यता है कि नवरात्र के दौरान पूरी निष्ठा और शुद्धता के साथ जलाई गई अखंड ज्योति घर के भीतर मौजूद नकारात्मक शक्तियों का नाश करती है और परिवार में खुशहाली का संचार करती है।
शुद्ध घी, तिल का तेल और संकल्प की परंपरा
अखंड ज्योति प्रज्वलित करने के लिए केवल शुद्ध देसी घी या फिर तिल के तेल का ही उपयोग उत्तम माना गया है। शास्त्रों में विधान है कि दीपक जलाने से पहले साधक को यह संकल्प लेना होता है कि वह नौ दिनों तक इस ज्योति को निरंतर जलाए रखेगा। (Maa Durga Worship Rules) इसके लिए बाती का चुनाव भी ध्यानपूर्वक किया जाता है—घी के दीपक में लाल सूती या कलावे की बाती और तेल के दीपक में साधारण रुई या सूती बाती का प्रयोग किया जाता है। दीपक में समय-समय पर घी या तेल डालते रहना चाहिए ताकि लौ कभी धीमी न पड़े।
हवा से बचाव और इन सावधानियों का रखें विशेष ध्यान
धार्मिक परंपराओं में पूजा के बीच अखंड ज्योति का बुझ जाना बेहद अशुभ माना जाता है। इसलिए इसे ऐसी सुरक्षित जगह पर रखें जहाँ सीधे पंखे या खिड़की की हवा न लगे। सुरक्षा और निरंतरता के लिए कांच के चिमनी या कवर का उपयोग करना बेहद व्यावहारिक उपाय माना गया है।
इसके अलावा, सबसे मुख्य नियम यह है कि एक बार जब घर में अखंड ज्योति प्रज्वलित हो जाए, तो उसके बाद घर को कभी भी पूरी तरह खाली छोड़कर ताला नहीं लगाना चाहिए। (Shardiya Navratri 2026 Puja) परिवार का कोई न कोई सदस्य हमेशा घर में मौजूद रहे, जो समय-समय पर बाती को आगे बढ़ाता रहे और घी-तेल की मात्रा जांचता रहे। नौ दिनों तक नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करने से ही पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
(डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल लोक मान्यताओं, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक जानकारियों पर आधारित है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को शुरू करने से पूर्व विद्वान पंडित या ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना उचित रहता है।)
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