हाईकोर्ट ने उज्जैन शाही मस्जिद तोड़ने के खिलाफ याचिका खारिज की, पथराव और लाठीचार्ज के बाद 7 लोगों पर FIR
उज्जैन में शाही मस्जिद पर हाईकोर्ट का फैसला
Madhya Pradesh High Court: उज्जैन में शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने के खिलाफ दायर याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने खारिज कर दी है। अदालत ने सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि काम जारी रहेगा। मस्जिद का जो हिस्सा सड़क के दायरे में आ रहा है, उसे हटाने को लेकर सोमवार को शहर में तनाव की स्थिति बन गई थी। अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मस्जिद कमेटी और प्रशासन के बीच समझौता हुआ है। याचिकाकर्ता ने मांग की कि समझौते में किए गए आश्वासनों को पूरा होने और रिकॉर्ड पर आने तक कार्रवाई रोकी जाए। वहीं, प्रतिवादी पक्ष ने समझौते से इनकार करते हुए कहा कि मस्जिद प्रशासन खुद संबंधित हिस्सा हटाने की कार्रवाई कर रहा है।
कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता और नगर निगम के बीच मामला पहले ही तय हो चुका था, लेकिन समझौते का विवरण अदालत के पास उपलब्ध नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि नगर निगम ने अपने जवाब और नोटिस में जो आश्वासन दिए हैं, वे उस पर बाध्यकारी होंगे। इसके बावजूद कोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण का काम रोकने से इनकार कर दिया।
सुबह पथराव के बाद पुलिस ने किया लाठीचार्ज, आंसू गैस भी छोड़ी
शाही मस्जिद का एक हिस्सा हटाने की कार्रवाई के दौरान सोमवार सुबह जमकर हंगामा हुआ। पुलिस पर पथराव किया गया, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान महिला थाना प्रभारी घायल हो गईं। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। हालांकि, दोपहर होते-होते फिर पथराव शुरू हो गया। पुलिस ने दोबारा लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। हंगामे के बीच कार्रवाई जारी रही, लेकिन नमाज के समय इसे रोक दिया गया। इसके बाद स्थिति शांत हुई। पुलिस ने मामले में 15 लोगों को हिरासत में लिया है और 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इनमें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी शामिल हैं। पुलिस का आरोप है कि इन लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब डेढ़ किलोमीटर सड़क को 15 मीटर चौड़ा किया जाना है। इस परियोजना के लिए 323 मकानों को हटाया जाना है। सड़क के दायरे में 15 धार्मिक स्थल भी आ रहे हैं, जिनमें से अब तक 12 हटाए जा चुके हैं। शाही मस्जिद का करीब 9 फीट लंबा और 4 फीट चौड़ा हिस्सा भी प्रस्तावित सड़क के दायरे में आ रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों में मस्जिद के 100 साल से अधिक पुरानी होने की पुष्टि होने की बात कही गई है। वहीं, मस्जिद के इमाम का दावा है कि यह करीब 600 साल पुरानी है। मस्जिद के जिस हिस्से को हटाया जाना है, उसे लेकर मुस्लिम समाज और मस्जिद कमेटी के लोग खुद कार्रवाई कर रहे हैं। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने भी कहा है कि मस्जिद को न तो शहीद किया जा रहा है और न ही विस्थापित किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे हिस्से को समाज और कमेटी के लोग खुद हटा रहे हैं।
कोर्ट में समझौते और याचिका की सुनवाई को लेकर हुई बहस
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि उज्जैन में मौजूदा स्थिति अव्यवस्थित है और दोनों रिट अपीलों में प्रशासन, प्रतिवादी तथा याचिकाकर्ता के बीच समझौता हुआ है। उन्होंने समिति को प्रशासन के साथ बातचीत करने का अवसर देने और समझौते के पूरा होने तक कार्रवाई रोकने की मांग की। इसके जवाब में प्रतिवादी पक्ष ने कहा कि कोई समझौता नहीं हुआ है। उनका कहना था कि एकल पीठ के आदेश के बाद मस्जिद प्रशासन को संबंधित हिस्सा खुद हटाने का अवसर दिया गया था और उसने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रतिवादी पक्ष ने अदालत में दो वीडियो का भी उल्लेख किया, जिनमें मस्जिद प्रशासन को संरचना हटाते हुए दिखाए जाने की बात कही गई।
याचिकाकर्ता ने काजी के वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि उसमें भी समझौते की बात कही गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिद से जुड़े अलग-अलग गुटों के विवाद का फैसला वक्फ बोर्ड को करना है। दूसरी ओर, प्रतिवादी ने अपील की सुनवाई पर भी सवाल उठाए और कहा कि एकल पीठ ने पहले ही विस्तृत आदेश पारित किया था। प्रतिवादी पक्ष ने अदालत में यह भी कहा कि मस्जिद के कुल क्षेत्रफल के 10 प्रतिशत से भी कम हिस्से को हटाया जाना है और मस्जिद कमेटी ने खुद इसे हटाना शुरू कर दिया है। ऐसे में उनके अनुसार अपील में अब कोई मुद्दा शेष नहीं रह जाता। कोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण का काम जारी रखने की बात कही।
मंदिर और मस्जिद दोनों को हटाने की नौबत नहीं आनी चाहिए थी: मसूद
भोपाल मध्य सीट से विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि प्रशासन को ऐसी तैयारी करनी चाहिए थी, जिससे मंदिर और मस्जिद दोनों को हटाने की स्थिति नहीं बनती। उनके मुताबिक, मुस्लिम समाज मस्जिद की मीनार हटाने के बजाय करीब 3 फीट जगह देने के लिए तैयार है। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने कहा कि शाही मस्जिद को न तो शहीद किया जा रहा है और न ही विस्थापित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आ रहे हिस्से को मुस्लिम समाज और मस्जिद कमेटी के लोग खुद हटा रहे हैं। पटेल ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग इस मामले को लेकर समाज को भ्रमित और भड़काने का काम कर रहे हैं। सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई और मस्जिद के हिस्से को हटाने को लेकर विवाद के बीच पुलिस की तैनाती जारी है। हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद प्रशासन की कार्रवाई आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है, जबकि मस्जिद की उम्र और समझौते को लेकर पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
