LPU Jalandhar Violence मामले की जांच CBI से करवाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर
LPU Jalandhar Violence मामले की जांच CBI से करवाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर
LPU Jalandhar Violence | CBI : जालंधर स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के विशाल परिसर में पिछले दिनों हुए भारी उपद्रव और हिंसा के मामले में अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। घटनाक्रम की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने का आग्रह किया गया है।
मंगलवार को यह याचिका मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ के सामने त्वरित सुनवाई के लिए प्रस्तुत की गई। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव चोपड़ा और अधिवक्ता अर्जुन श्योराण ने अदालत को परिसर में घटे घटनाक्रम की गंभीरता से अवगत कराया। पीठ ने मामले के महत्व को देखते हुए इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई तय की है।
परिसर में दंगा, आगजनी और यूनिमॉल में लूटपाट: याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
अदालत में दायर याचिका में दावा किया गया है कि हिंसा के दौरान यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। उपद्रवियों द्वारा बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की गई, यूनिमॉल सहित कई दुकानों में लूटपाट हुई और सरकारी व निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया। याचिका में तर्क दिया गया है कि चूंकि मामला एक प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान और हजारों छात्रों की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए राज्य पुलिस के बजाए किसी केंद्रीय एजेंसी द्वारा इसकी गहन जांच आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि 26 और 27 सितंबर को यूनिवर्सिटी परिसर में लगभग 22 घंटे तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। इस दौरान उपद्रव के कारण दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यातायात करीब 18 घंटे तक बाधित रहा, जिससे आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था।
छात्रा से दुष्कर्म की अफवाह के बाद भड़की थी हिंसा: पुलिस जांच जारी
पूरे विवाद की शुरुआत रविवार को यूनिवर्सिटी कैंपस में एक छात्रा के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म होने की खबर फैलने के बाद हुई थी। इस सूचना के सामने आते ही छात्रों में भारी रोष फैल गया और देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप धारण कर लिया। हालांकि, स्थानीय पुलिस ने छात्रा से जुड़े आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन आधिकारिक तौर पर अब तक जांच में किसी ऐसी अप्रिय घटना की निर्णायक पुष्टि नहीं हो सकी है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने और परिसर में शांति व्यवस्था बहाल करने के उद्देश्य से 28 सितंबर से अगले 10 दिनों के लिए सभी कक्षाओं और शैक्षणिक गतिविधियों को स्थगित कर दिया गया है। फिलहाल कैंपस में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
बुधवार की सुनवाई पर टिकी नजरें: क्या सीबीआई को सौंपी जाएगी जांच?
हाईकोर्ट द्वारा याचिका पर सुनवाई की सहमति दिए जाने के बाद अब कानूनी और शैक्षणिक गलियारों की नजरें बुधवार को होने वाली अदालती कार्यवाही पर टिक गई हैं। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि छात्रों के भविष्य, कैंपस की सुरक्षा और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी की जांच बेहद जरूरी है।
दूसरी ओर, राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखे जाने की संभावना है। बुधवार को होने वाली सुनवाई से ही यह साफ हो पाएगा कि हाईकोर्ट इस मामले में राज्य पुलिस की अब तक की जांच से संतुष्ट होता है या फिर पूरे प्रकरण को सीबीआई के हवाले करने के निर्देश जारी करता है।
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