September 29, 2026

Ludhiana केे Angad Singh Dhillon UAE में Canada के Ambassador बने

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Ludhiana केे Angad Singh Dhillon UAE में Canada के Ambassador बने

Ludhiana केे Angad Singh Dhillon UAE में Canada के Ambassador बने

Ludhiana | Angad Singh Dhillon UAE | Canada | Ambassador : पंजाब की उर्वर माटी और समृद्ध सार्वजनिक परंपरा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। Ludhiana जिले के ऐतिहासिक गांव घूंगराणा से ताल्लुक रखने वाले 35 वर्षीय भारतीय मूल के सिख युवा Angad Singh Dhillon को कनाडा सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अपना नया Ambassador नियुक्त किया है। कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद ने 25 सितंबर को इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा की। अंगद यूएई में कनाडा के मौजूदा राजदूत राधा कृष्ण पांडेय का स्थान संभालेंगे।

महज 35 वर्ष की आयु में Canada जैसे विकसित राष्ट्र का शीर्ष राजनयिक पद हासिल करना न केवल Angad Singh Dhillon की व्यक्तिगत क्षमता और लगन को दर्शाता है, बल्कि यह लुधियाना के घूंगराणा गांव और पूरे पंजाब के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है।

सार्वजनिक सेवा की ऐतिहासिक विरासत: परदादा एसजीपीसी से तो दादा रहे किसान आंदोलन के ध्वजवाहक

Angad Singh Dhillon की इस वैश्विक सफलता के पीछे उनके परिवार की कई पीढ़ियों से चली आ रही सामाजिक और सार्वजनिक भागीदारी की मजबूत पृष्ठभूमि रही है। उनके परदादा गुरनाम सिंह घूंगराणा वर्ष 1930 के दशक में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की स्थापना और शुरुआती दौर से जुड़े प्रमुख सदस्यों में शामिल थे। वहीं उनके दादा जगतजीत सिंह घूंगराणा अपने दौर के जाने-माने प्रगतिशील किसान और मालवा क्षेत्र के प्रमुख किसान नेताओं में गिने जाते थे, जिन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय और पंजाब एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन के प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

अंगद के पिता नैनिंदर सिंह ढिल्लों बताते हैं कि परिवार की इसी जनसेवा और सामाजिक चेतना की परंपरा ने अंगद को हमेशा से नीति-निर्माण और सार्वजनिक जीवन की ओर प्रेरित किया।

पटियाला से न्यू ब्रंसविक तक उत्कृष्ट शिक्षा: 19 साल की उम्र में शुरू हुई कनाडाई यात्रा

Angad Singh Dhillon की शुरुआती शैक्षणिक यात्रा पंजाब की धरती पर ही शुरू हुई। उन्होंने पटियाला स्थित प्रसिद्ध यादवेंद्रा पब्लिक स्कूल से शुरुआती पढ़ाई पूरी की और तत्पश्चात पुणे के महिंद्रा यूनाइटेड वर्ल्ड कॉलेज से आगे का अध्ययन किया। वर्ष 2010 में महज 19 वर्ष की आयु में वे उच्च शिक्षा के लिए कनाडा चले गए, जहां उन्होंने न्यू ब्रंसविक स्थित माउंट एलिसन यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय संबंधों (इंटरनेशनल रिलेशंस) में स्नातक की डिग्री हासिल की।

शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कनाडाई राजनीति और नीति-निर्माण की प्रक्रियाओं को गहराई से समझा। वर्ष 2015 में उन्होंने लिबरल पार्टी के साथ एक मैदानी संगठक के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की और पील क्षेत्र में चुनावी संगठन की कमान संभाली।

पीएमओ में निभाई रणनीतिक भूमिका: दो कैबिनेट मंत्रियों के चीफ ऑफ स्टाफ भी रहे

कनाडा की संघीय राजनीति में कदम रखने के बाद अंगद का सफर बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने ओटावा स्थित लिबरल रिसर्च ब्यूरो में आउटरीच और ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभाली। अपने शुरुआती राजनीतिक दौर में उन्होंने ऐतिहासिक कामागाटा मारू प्रकरण पर कनाडाई सरकार द्वारा मांगी गई औपचारिक माफी से जुड़ी पृष्ठभूमि और प्रशासनिक तैयारियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संगठनात्मक दक्षताओं के बल पर वे आगे बढ़ते गए और कनाडा सरकार में लघु व्यवसाय तथा परिवहन मंत्रालय जैसे दो प्रमुख संघीय कैबिनेट मंत्रियों के चीफ ऑफ स्टाफ रहे। इस दौरान उन्होंने जी7, जी20, संयुक्त राष्ट्र महासभा और एपेक जैसे वैश्विक मंचों पर कनाडाई प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनकर कूटनीतिक अनुभव हासिल किया। हाल के दिनों में उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री कार्यालय में परिचालन एवं हितधारक संबंध निदेशक के रूप में कार्य करते हुए भारत और चीन जैसे प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने में योगदान दिया।

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